ITBP के DG और केन्द्रीय खेल मंत्री की योजना से बदल रही आदिवासी लड़कियों की किस्मत

आईटीबीपी कुछ सालों के अंदर ही छत्तीसगढ़ में 50 से ज्यादा लड़कियों को हॉकी खेलने के लिए प्रशिक्षित कर चुकी है. (सांकेतिक तस्वीर)
आईटीबीपी कुछ सालों के अंदर ही छत्तीसगढ़ में 50 से ज्यादा लड़कियों को हॉकी खेलने के लिए प्रशिक्षित कर चुकी है. (सांकेतिक तस्वीर)

आईटीबीपी और खेल मंत्री की रंगत अब दिखने लगी है, क्योंकि उन कई आदिवासी लड़कियों में से फिलहाल 9 लड़कियों का चयन हॉकी इंडिया नेशनल ट्रायल कैंप के लिए हो चुका है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 5, 2020, 8:40 PM IST
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नई दिल्ली. नक्सली प्रभावित इलाकों (Naxalite affected areas) में रहने वाली और आर्थिक स्थित में कमजोर आदिवासी लड़कियों के हौसलों को पंख देने का काम आईटीबीपी (ITBP) और केन्द्रीय खेल मंत्री किरेन रिजीजू (Kiren Rijiju) कर रहे हैं. फिलहाल 9 आदिवासी लड़कियों को राष्ट्रीय स्तर के हॉकी कैंप के लिए चुनाव किया गया है, जो बहुत जल्द ही देश के लिए हॉकी खेलते हुए नजर आने वाली हैं. बुलंद हौसले और कुछ विशेष कर गुजरने की हिम्मत रखने वाली आदिवासी लड़कियों में खेल भावना और उसकी उस इच्छाशक्ति को एक आयाम देने की कोशिश की जा रही है, जिससे की वो देश में एक मिसाल बन सकें.

आईटीबीपी और केन्द्रीय खेल मंत्री के संयुक्त प्रयास से आदिवासी लड़कियां बढ़ाने वाली हैं देश की शान
अर्धसैनिक बल आईटीबीपी (ITBP ) के डीजी (Director General ) एस.एस देसवाल और केन्द्रीय खेल मंत्री किरेन रिजीजू की संयुक्त सोच की उड़ान से देश की कई आदिवासी लड़कियों की किस्मत बदलती हुई दिख रही है. छत्तीसगढ़ की रहने वाली 9 लड़कियों का चयन राष्ट्रीय हॉकी टीम में होने की संभावना है. इन लड़कियों को पिछले चार सालों से आईटीबीपी के द्वारा चयन करने के बाद छत्तीसगढ़ के कोंडागांव में रखकर उनको विशेष तौर पर प्रशिक्षित किया गया. उनके लिए हर संभव और आधुनिक तरीके से प्रशिक्षित करने के बाद उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर लाने की तैयारी की जा रही थी. लिहाजा इस मसले पर आईटीबीपी के डीजी सहित अन्य अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक केन्द्रीय खेल मंत्री किरेन रिजीजू के साथ हुई. रिजीजू ने भी हर संभव मदद दिलाने का अश्वासन दिया.

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आईटीबीपी और खेल मंत्री की रंगत अब दिखने लगी है, क्योंकि उन कई आदिवासी लड़कियों में से फिलहाल 9 लड़कियों का चयन हॉकी इंडिया नेशनल ट्रायल कैंप के लिए हो चुका है. इनमें से कई लड़कियां जल्द ही राष्ट्रीय हॉकी टीम में खेलती हुई नजर आने वाली हैं. आईटीबीपी कुछ सालों के अंदर ही छत्तीसगढ़ में 50 से ज्यादा लड़कियों को हॉकी खेलने के लिए प्रशिक्षित कर चुकी है.



अपने हौसले और मेहनत के दम पर हॉकी इंडिया नेशनल ट्रायल कैंप में चयनित खिलाड़ियों का नाम हैं-

1. सेवंती पोयम
2. तनिषा नाग
3.सुकमती मंडावी
4. सुकरी मंडावी
5.सुमनी कश्यप
6.सुलोचना नेताम
7.सावित्री नेताम
8.संजिनी सोड़ी
9.धनेश्वरी कोर्राम

कैसे आईटीबीपी के हेड कांस्टेबल सूर्या स्मिट बने इन लड़कियों के कोच
इस विशेष अभियान में आईटीबीपी के हेड कॉन्स्टेबल सूर्या स्मिट की चर्चा करना बेहद आवश्यक है. जिन्होंने खुद उन खिलाड़ी लड़कियों का चयन किया और उन लड़कियों को साधारण सी ग्रामीण लड़की से आज देश -विदेश स्तर पर खेलने के लिए काबिल बनाया.

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वामपंथ उग्रवाद के विरुद्ध तैनात आईटीबीपी की 41वीं बटालियन ने लगभग 4 साल पहले इन बालिकाओं को हेड कॉन्स्टेबल सूर्या स्मिट के नेतृत्व में हॉकी का प्रशिक्षण देना प्रारंभ किया था. 14 से 17 वर्ष की उम्र की इन बालिकाओं को अब हॉकी इंडिया ने पहचान दी है और इनकी प्रतिभा को आंकते हुए इन्हें स्थायी पहचान पत्र भी जारी कर दिया है. कम संसाधनों और हेलीपैड पर मैदान बनाकर आईटीबीपी के कोच हेड कांस्टेबल सूर्या स्मिट ने इन बालिकाओं को प्रशिक्षित किया है और इन सबको हॉकी किट भी मुहैया करवाई गई है. सूर्या के अनुसार अगर इन बालिकाओं को शीर्ष स्तर से अनुदान और संसाधन आदि मिलें तो ये देश के लिए खेलकर क्षेत्र का सम्मान बढ़ाने की काबिलियत रखती हैं. सभी खिलाड़ी अपने परिवारों में प्रथम हॉकी खिलाड़ी हैं और अपने प्रकार की बस्तर क्षेत्र की पहली स्थानीय टीम है.

बचपन से ही नक्सल प्रभावित इलाके में रहती हैं लड़कियां
ये सभी आदिवासी समुदाय की लड़कियां बचपन से ही इस नक्सल प्रभावित इलाके में रह रही हैं. इन सभी खिलाड़ी लड़कियों का आवास करीब 35 किलोमीटर दायरे के अंदर ही है. छत्तीसगढ़ का ये इलाक़ा एकदम घने जंगलों और पहाड़ों के बीच में है जहां के गांव में ये लड़कियां रहती हैं. इसी इलाके में ड्यूटी के दौरान कई बार आईटीबीपी के अधिकारियों ने उन लड़कियों और उन इलाके में रहने वालों के बारे में आईटीबीपी के डीजी से इस मसले पर चर्चा करते हुए सलाह दी थी कि इन लोगों को समाज के मुख्य धारा से जोड़ना बेहद आवश्यक है. लिहाजा इसी बात को ध्यान में रखते हुए डीजी ने स्वीकृति प्रदान की. उसके बाद कई बार उनकी और केन्द्रीय खेल मंत्री किरेन रिजीजू के साथ बैठक हुई, इसी का ये सफल प्रयास सामने अब दिखता हुआ प्रतीत हो रहा है.

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इस मसले पर आईटीबीपी के एक अधिकारी से जब बातचीत हुई तो उन्होंने कहा की जब हमने अलग-अलग गांवों में जाकर उन लड़कियों का खेल देखा, तो पाया की इनमें हौसला बहुत और देश के लिए खेलने का सपना भी है लेकिन ये खेलना तो बहुत दूर हॉकी स्टीक पकड़ना भी नहीं जानती थीं. लिहाजा हमने सबसे पहले उन सबों को खेल के रंग में ढाला और खिलाड़ियों की भावनाओं को समझाते हुए लगातार ट्रेनिंग देते रहे. इसी का परिणाम है की आज ये लड़कियां राष्ट्रीय स्तर की टीम चयन होने के राह पर हैं.



नक्सल प्रभावित इलाके में तैनात भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की 41वीं बटालियन की लगातार मेहनत के साथ-साथ स्थानीय जनजातीय बालिकाओं की मेहनत और दृढ़ इच्छा शक्ति ने बस्तर क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण को एक नया आयाम देते हुए विशेष उपलब्धि हासिल की है. जिले के मर्दापाल के कन्या आश्रम में पढ़ रहीं 9 बालिकाओं का चयन जल्द ही आयोजित होने वाले राष्ट्रीय सब जूनियर और जूनियर हॉकी चयन शिविर के लिए हुआ है जो इनके लिए सपने के सच होने जैसा है.
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