जया बच्चन बोलीं- शर्म आती है, हम चांद-मंगल पर जाने की बात करते हैं लेकिन...

समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन ने राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान ये मुद्दा उठाया.

समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन ने राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान ये मुद्दा उठाया.

राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के अनुसार, हाथ से मैला ढोने वाले व्यक्तियों की सीवर की सफाई के दौरान होने वाली मौतों के मामले में महाराष्ट्र और गुजरात राज्य ने सबसे कम संख्या में मुआवज़ा दिया गया है. भारत में साल 1993 से 31 दिसंबर, 2019 तक हाथ से मैला ढोने वाले व्यक्तियों की सीवर की सफाई के दौरान होने वाली 926 मौतों में से 172 पीड़ितों के परिवारों को अभी तक मुआवज़ा नहीं मिला

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 23, 2021, 1:46 PM IST
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नई दिल्ली. संसद में मंगलवार को हाथ से मैला ढोने और कचरा साफ करने का मुद्दा उठाया गया. समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन ने राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान ये मुद्दा उठाया. जया बच्चन ने कहा, 'क्यों हम अभी तक उन्हें सुरक्षा नहीं दे पाए हैं? विकास के दावे होते हैं और चंद्रमा और मंगल पर पहुंचने की बात होती है, लेकिन यह प्रथा अभी तक यह समाप्त नहीं हो सकी है. शर्म आती है.' जया बच्चन ने कहा, 'मैला ढोने वालों या उनकी मौत पर सदन में चर्चा करनी पड़ रही है, यह पूरे देश के लिए शर्म की बात है.'

सांसद जया बच्चन ने कहा, 'सरकार को इस मामले में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए. सिर्फ नारेबाजी से काम नहीं चलेगा, काम करने से होगा.' बच्चन ने कहा कि रेलवे में इसी प्रकार की समस्या है. रेल मंत्रालय को इस पर ध्यान देना चाहिए. बीजू जनता दल के प्रसन्ना आचार्य ने संबलपुर रेलवे स्टेशन को बंद करने के रेल मंत्रालय के फैसले का विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग की.

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चर्चा में क्यों?
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के अनुसार, हाथ से मैला ढोने वाले व्यक्तियों की सीवर की सफाई के दौरान होने वाली मौतों के मामले में महाराष्ट्र और गुजरात राज्य में सबसे कम संख्या में मुआवज़ा दिया गया है. भारत में साल 1993 से 31 दिसंबर, 2019 तक हाथ से मैला ढोने वाले व्यक्तियों की सीवर की सफाई के दौरान होने वाली 926 मौतों में से 172 पीड़ितों के परिवारों को अभी तक मुआवज़ा नहीं मिला है. राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (National Commission for Safai Karamcharis- NCSK) के आंकड़ों के अनुसार, गुजरात में ऐसे सर्वाधिक मामले (48) पाए गए, जहां राशि का भुगतान या तो किया नहीं गया या अपुष्ट (Unconfirmed) था. जबकि महाराष्ट्र में ऐसे 32 मामले पाए गए.

गौरतलब है कि महात्मा गांधी और डॉ. आंबेडकर दोनों ने ही हाथ से मैला ढोने की प्रथा का पुरजोर विरोध किया था. यह प्रथा संविधान के अनुच्छेद 15, 21, 38 और 42 के प्रावधानों के भी खिलाफ है. आज़ादी के 7 दशकों बाद भी इस प्रथा का जारी रहना देश के लिए शर्मनाक है. जल्द से जल्द इसका अंत होना चाहिए.

महिलाओं को किसान की मान्यता देने की उठी मांग 



बीजू जनता दल के ही अमर पटनायक ने कृषि क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं का मुद्दा उठाया और किसान की मान्यता देने की मांग की. उन्होंने कहा कि किसानों की सरकारी परिभाषा में ऐसी महिलाओं को भी शामिल किया जाना चाहिए और किसानों को मिलने वाली सभी सुविधाएं भी उन्हें मुहैया कराई जानी चाहिए.

कांग्रेस ने न्यायालय का नाम बदलने की मांग की 

कांग्रेस के राजीव सातव ने बंबई उच्च न्यायालय का नाम मुंबई उच्च न्यायालय किए जाने की मांग उठाई. उन्होंने कहा कि यह मांग बहुत समय से लंबित है. सरकार के पास इस संबंध में एक प्रस्ताव भी लंबित है. इस मामले पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए.

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वहीं, कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी की ओर से लोकसभा में म्यांमार के नागरिकों को भारत में प्रवेश देने के मुद्दे पर लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया गया है. इसके अलावा आम आदमी पार्टी नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक 2021 को लेकर सदन में स्थगन नोटिस दिया. (एजेंसी इनपुट के साथ)
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