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सीएम जगनमोहन रेड्डी ने आंध्र प्रदेश विधान परिषद भंग करने के दिए संकेत, 27 जनवरी को विधानसभा में होगी चर्चा

News18Hindi
Updated: January 24, 2020, 12:27 PM IST
सीएम जगनमोहन रेड्डी ने आंध्र प्रदेश विधान परिषद भंग करने के दिए संकेत, 27 जनवरी को विधानसभा में होगी चर्चा
आंध्र प्रदेश के सीएम जगन मोहन रेड्डी ने कहा, राज्‍य को विधान परिषद की कोई जरूरत नहीं है.

आंध्र प्रदेश विधान परिषद (Legislative Council) ने मुख्‍यमंत्री जगनमोहन रेड्डी (CM Jagan Mohan Reddy) को झटका देते हुए राज्‍य की तीन राजधानियां बनाने से जुड़े दो अहम विधेयकों को प्रवर समिति (Select Committee) को भेज दिया. इसके बाद जगनमोहन रेड्डी ने कहा कि राज्‍य को उच्‍च सदन (Upper House) की आवश्‍यकता ही नहीं है. दरअसल, विधान परिषद में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के सिर्फ 9 विधायक हैं.

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  • Last Updated: January 24, 2020, 12:27 PM IST
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अमरावती. आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) विधान परिषद ने मुख्‍यमंत्री जगनमोहन रेड्डी (CM Jagan Mohan Reddy) को झटका देते हुए राज्‍य की तीन राजधानियां बनाने से जुड़े दो अहम विधेयकों को प्रवर समिति (Select Committee) के पास भेज दिया. इसके बाद राज्य की जगनमोहन सरकार ने संकेत दिया कि वह उच्च सदन को खत्म कर सकती है. सीएम जगनमोहन ने विधानसभा में बृहस्‍पतिवार को कहा, 'हमें इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है कि क्या ऐसा सदन होना चाहिए, जो केवल राजनीतिक मंशा के साथ काम करता है.' उन्होंने कहा कि विधान परिषद (Legislative Council) होना अनिवार्य नहीं है. यह हमारा ही बनाया हुआ है और केवल हमारी सुविधा के लिए है. इसलिए हमें 27 जनवरी को चर्चा कर फैसला लेना चाहिए कि उच्‍च सदन को जारी रखा जाए या भंग कर देना चाहिए.

प्रस्‍ताव के पक्ष में 27 सदस्‍यों, जबकि 13 ने इसके खिलाफ मतदान किया
विधान परिषद के अध्यक्ष मोहम्मद अहमद शरीफ ने बुधवार को अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए राज्य के लिए तीन राजधानी बनाने से जुड़े दो विधेयकों को विस्तृत जांच के लिए प्रवर समिति के पास भेज दिया. इस दौरान मुख्य विपक्षी दल टीडीपी (TDP) के सदस्य सदन से गैरहाजिर रहे. इससे पहले मंगलवार रात विधान परिषद में टीडीपी की ओर से जगन सरकार की नीतियों को अस्वीकार करने का प्रस्ताव लाया गया था. यह वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) की सरकार के लिए एक झटका था. प्रस्ताव को नियम-71 के तहत लाया गया था. सदन में 27 सदस्यों ने इसके पक्ष में, जबकि 13 ने इसके खिलाफ मतदान किया. वहीं, 9 सदस्यों ने मतदान प्रक्रिया में हिस्‍सा ही नहीं लिया.

जगन ने कहा, आंध्र प्रदेश को अलग विधान परिषद की कोई जरूरत नहीं



मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के एक अधिकारी ने कहा कि कैबिनेट विधान परिषद को भंग करने का प्रस्ताव ला सकती है. प्रस्‍ताव को विधानसभा में पेश किया जाएगा. मुख्यमंत्री के मुताबिक, विधान परिषद से सरकार के अहम फैसलों पर सलाह की अपेक्षा होती है, लेकिन उच्‍च सदन राजनीतिक मंच में तब्‍दील हो गया है. सरकार की ओर से पेश किया गया हर विधेयक (Bill) विधान परिषद में रोक दिया जाता है. उन्‍होंने कहा कि विधानसभा में कई बुद्धिजीवी, डॉक्टर, इंजीनियर, वकील और संविधान विशेषज्ञ मौजूद हैं. ऐसे में राज्‍य में उच्‍च सदन की कोई प्रासंगिकता नहीं है. लिहाजा, राज्य को अलग विधान परिषद की जरूरत नहीं है.



सीएम का आरोप, शरीफ ने चंद्रबाबू नायडू के दबाव में किया काम
जगनमोहन ने यह भी कहा कि विधान परिषद राज्य सरकार पर आर्थिक रूप से भी बोझ (Financial Burden) बन गई है. उन्होंने पूछा कि हम विधान परिषद पर हर साल 60 करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं. इसकी क्या जरूरत है? उन्होंने विधान परिषद अध्‍यक्ष मोहम्मद अहमद शरीफ की ओर से विधेयकों को प्रवर समिति के पास भेजने के नियमों के उल्लंघन पर भी नाराजगी जताई. उन्‍होंने आरोप लगाया कि अध्यक्ष ने विपक्ष के नेता एन. चंद्रबाबू नायडू (Chandrababu Naidu) के दबाव में काम किया.

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First published: January 24, 2020, 12:07 PM IST
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