आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू की विदाई, जगनमोहन का चला जादू, 30 को लेंगे शपथ

राज्य की 175 सीटों में से वाईएसआरसीपी को 149 सीटों पर बढ़त, महज 25 सीटों पर सिमटती दिख रही है टीडीपी, मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने स्वीकार की हार

News18Hindi
Updated: May 24, 2019, 1:07 PM IST
आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू की विदाई, जगनमोहन का चला जादू, 30 को लेंगे शपथ
राज्य की 175 सीटों में से वाईएसआरसीपी को 149 सीटों पर बढ़त, महज 25 सीटों पर सिमटती दिख रही है टीडीपी, मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने स्वीकार की हार
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Updated: May 24, 2019, 1:07 PM IST
आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजों में वाईएसआरसीपी प्रमुख जगन मोहन रेड्डी का जादू जमकर चला है. वाईएसआरसीपी ने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी पर भारी बढ़त बनाई हुई है. राज्य की 175 में से वाईएसआरसीपी 148 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि टीडीपी 26 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त बनाए हुए है. एक सीट पर जनसेना पार्टी आगे है. चंद्रबाबू नायडू ने हार स्वीकार कर ली है. वे जल्द इस्तीफा दे सकते हैं. वहीं, जगनमोहन 30 मई को प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे.

टीडीपी जिन सीटों पर आगे चल रही है, उनमें मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के बेटे नारा लोकेश की मंगलागिरी सीट भी  हैं. 2014 में हुए आंध्र प्रदेश के विधानसभा चुनाव में टीडीपी ने 115 और वाईएसआरसीपी ने 70 सीटों पर जीत हासिल की थी.



इसलिए जीते जगन

पार्टी को मिली सफलता जगनमोहन की लोकप्रियता का ही परिणाम है, जिन्होंने किसानों, छात्रों और ग्रामीणों की नब्ज को अच्छी तरह पकड़ा और उन्हें भरोसा दिलाया कि सत्ता का बदलाव प्रदेश के हित में है. उन्होंने पूरे राज्य की 3500 किलोमीटर की पदयात्रा की और अपने समर्थकों में नया जोश फूंका. उन्होंने जनता के लिए 'प्रजा दरबार' जैसी नई पहल की. वहीं, हाल ही में टीडीपी की स्थिति राज्य में कमजोर हुई थी. कई विकास योजनाएं फंड की कमी के कारण अटकी थीं, जिसके चलते चंद्रबाबू को लोगों की नाराजगी झेलनी पड़ी. आंध्र प्रदेश के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करने का आरोप लगाते हुए चंद्रबाबू नायडू एनडीए से अलग हो गए थे और यह बात भी कुछ हद तक जगन के पक्ष में गई.

इस बार आंध्र की सभी 175 विधानसभा सीटों पर लोकसभा चुनाव के पहले चरण यानी 11 अप्रैल को मतदान हुआ था.

पहले से था जीत का भरोसा
इस लोकसभा चुनाव में जगन मोहन को शायद पहले से ही अपनी जीत का भरोसा था, इसीलिए उन्होंने नतीजों से पहले अपने पत्ते नहीं खोले थे. यहां तक कि यूपीए की ओर से शरद पवार ने राजनीतिक समीकरण साधने के लिए उन्हें फोन भी किया था, मगर जगन ने उनका फोन नहीं उठाया. जगन ने पहले ही साफ कर दिया था कि वे चुनाव परिणाम से पहले किसी भी दल के साथ खड़े नजर नहीं आना चाहते.
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