जगदीप धनखड़ ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में ली शपथ, CM ने ऐसे किया स्‍वागत

पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी ने शपथग्रहण समारोह के बाद नए राज्यपाल का स्वागत करते हुए उन्हें गुलदस्ता भेंट किया.

भाषा
Updated: July 30, 2019, 4:26 PM IST
जगदीप धनखड़ ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में ली शपथ, CM ने ऐसे किया स्‍वागत
पश्चिम बंगाल के 28वें गवर्नर बने धनखड़.
भाषा
Updated: July 30, 2019, 4:26 PM IST
राजस्थान के झुंझुनूं से सांसद रह चुके जगदीप धनखड़ ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल के 28वें राज्यपाल के रूप में राजभवन में शपथ ली. कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश टीबीएन राधाकृष्णन ने उन्हें शपथ दिलाई. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, उनके मंत्रिमंडल के कई सदस्य और अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित थे.

मुख्‍यमंत्री ने ऐसे किया स्‍वागत

पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी ने शपथग्रहण समारोह के बाद नए राज्यपाल का स्वागत करते हुए उन्हें गुलदस्ता भेंट किया.

आपको बता दें कि नए राज्यपाल, उच्चतम न्यायालय के प्रख्यात वकील भी रहे हैं. जबकि इस अवसर पर जगदीप धनखड़ ने कलकत्ता विश्वविद्यालय, यादवपुर विश्वविद्यालय, प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय और विश्व-भारती विश्वविद्यालय के कुलपतियों से भी मुलाकात की. वहीं, उन्‍होंने केशरीनाथ त्रिपाठी का स्थान लिया है.

सियासी दांवपेंच और कानून के जानकार हैं धनखड़
धनखड़ कानून, सियासत, सियासी दांवपेंच औऱ हर पार्टी के अंदर अपने संबंधों की महारत के लिए जाने जाते हैं. वे राजस्थान की जाट बिरादरी आते हैं और राजस्थान में जाटों को आरक्षण दिलवाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी. इस समुदाय में धनखड़ की अच्छी खासी साख है. धनखड़ की नियुक्ति का एक मकसद शायद इस बिरादरी के बीच संदेश भी हो.

बंगाल में मारवाड़ियों का खासा प्रभाव है
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पश्चिम बंगाल में मारवाड़ियों का अच्छा खास प्रभाव है. मारवाड़ी समुदाय का बिजनेस के साथ सियासत में भी दखल है. बीजेपी इस समुदाय को हमेशा से अपना वोट बैंक मानती है. बंगाल में राजस्थान मूल के समुदाय का एक बड़ा हिस्सा शेखावाटी यानी सीकर और झुंझुनूं से ताल्लुक रखता है. झुंझुनूं धनखड़ की जन्मभूमि के साथ कर्मभूमि भी रही.

जनता दल और कांग्रेस में भी रहे
धनखड़ केंद्रीय मंत्री भी रहे. झुंझुनूं से 1989 से 91 तक वे जनता दल से सांसद रहे. हालांकि बाद में उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया था. अजमेर से कांग्रेस टिकट पर वे लोकसभा चुनाव हार गए थे. फिर धनखड़ 2003 में बीजेपी में शामिल हो गए, अजमेर के किशनगढ़ से विधायक चुने गए. धनखड़ सिर्फ नेता ही नहीं माने हुए वकील भी हैं. वे सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं तथा राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के प्रेसिडेंट भी रह चुके हैं.

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First published: July 30, 2019, 4:22 PM IST
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