अखिलेश-मायावती के साथ आने से बीजेपी की धड़कन बढ़ जाती है: तेजस्वी यादव

तेजस्वी ने कहा कि बिहार में मुजफ्फरपुर जैसी घटनाएं हो रहीं हैं और सरकार ठीक से जांच करे इसके लिए सुप्रीम कोर्ट को डांट लगानी पड़ रही है.

Ankit Francis | News18Hindi
Updated: December 8, 2018, 4:26 PM IST
अखिलेश-मायावती के साथ आने से बीजेपी की धड़कन बढ़ जाती है: तेजस्वी यादव
तेजस्वी यादव (File Photo)
Ankit Francis | News18Hindi
Updated: December 8, 2018, 4:26 PM IST
जागरण फोरम के दूसरे दिन आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि जैसे ही सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव और बसपा प्रमुख मायावती एक होने से बीजेपी की धड़कने बढ़ जाती हैं. तेजस्वी ने कहा कि बिहार में मुजफ्फरपुर जैसी घटनाएं हो रहीं हैं और सरकार ठीक से जांच करे इसके लिए सुप्रीम कोर्ट को डांट लगानी पड़ रही है. सृजन घोटाला हो रहा और बीजेपी-जेडीयू जांच कराने के लिए तैयार नहीं है.

तेजस्वी ने आरोप लगाया कि सीबीआई-सीबीआई से लड़ रही है और जज-जज से लड़ रहा है, ये ही अच्छे दिन हैं. उन्होंने कहा कि हमारी पीएम नरेंद्र मोदी से दुश्मनी नहीं है लेकिन उन्हें अपने वादों का हिसाब देना चाहिए. मोदी डिग्री वाले युवाओं से पकौड़ा तलने के लिए कह रहे हैं, उन्होंने 15 लाख का वादा किया था उसी में से 1-2 लाख दे दें तो युवा कम से कम पकौड़ा तलने के लिए दुकान ही खोल लें. लेकिन आप ये सोचिए अगर 2 करोड़ युवा पकौड़े बनाएंगे तो खाएगा कौन ?

तेजस्वी ने कहा कि बीजेपी की खासियत है कि खासियत है कि ये झूठ काफी मजबूती से बोलती है. बिहार में बीजेपी ने स्वार्थ की राजनीति का सबसे अच्छा उदाहरण है. एनडीए के सारे दल क्यों बीजेपी से खफा हैं ? मोदी ने बिहार को डेढ़ लाख करोड़ रुपए के स्पेशल पैकेज देने का वादा किया था और अब खुद भी सरकार में हैं लेकिन कब ये वादा पूरा होगा.

बीजेपी नेते भूपेंद्र यादव ने कहा कि इन सभी पार्टियों ने हर तरह की कोशिश की लेकिन ये साथ आ ही नहीं पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि ईज ऑफ डूइंग में कैसे भारत 77वें नंबर पर आ गया है इससे इनकार कैसे किया जा सकता है. दुनिया में भारत छठे नंबर की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है इससे मुंह नहीं मोड़ा जा सकता. हम जब सरकार में आए थे तो 89 योजनाएं अटकी थीं इनमें से 48 योजनाएं हम पूरी कर चुके हैं.

कार्यक्रम में कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने कहा कि किसी भी अर्थव्यवस्था को छठे नंबर तक पहुंचने में सिर्फ साढ़े चार साल नहीं लगते. बीजेपी वाले तो अटल बिहारी वाजपेयी के छह साल को भी नकार देते हैं. अब तो हार के डर से इन्होने तो भगवान की जाति बताकर राजनीति करना शुरू कर दिया है.
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