सुप्रीम कोर्ट से बोली पंजाब सरकार- सिद्धू को तीन साल के लिए जाना चाहिए जेल

नवजोत सिंह सिद्धू की फाइल फोटो

ये घटना 27 दिसंबर 1988 की है, जब पटियाला में कार पार्किंग को लेकर सिद्धू की गुरनाम सिंह नाम के बुजुर्ग के साथ सिद्धू की कहासुनी हो गई. सिद्धू पर आरोप है कि उन्होंने गुरनाम को एक मुक्का मार दिया था, जिसके बाद उनकी मौत हो गई.

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    पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि रोड रेज के मामले में राज्य के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की तरफ से दोषी ठहराया जाना सही फैसला था और सिद्धू को इस मामले में तीन साल के लिए जेल जाना चाहिए.

    ये घटना 27 दिसंबर 1988 की है, जब पटियाला में कार पार्किंग को लेकर सिद्धू की गुरनाम सिंह नाम के बुजुर्ग के साथ सिद्धू की कहासुनी शुरू हो गई, जो देखते ही देखते हाथापाई में बदल गई. गुरनाम सिंह के साथ उनका भांजा भी था. भांजे के मुताबिक, सिद्धू ने गुरनाम को मुक्का मारकर सड़क पर गिरा दिया. इसके तुरंत बाद ही गुरनाम को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इससे पहले ही वो दम तोड़ चुके थे.

    इस मामले में पंजाब सरकार की ओर से मौजूद वकील ने जस्टिस जे चेलामेश्वर और जस्टिस संजय किशन कौल की पीठ के सामने कहा कि पटियाला के रहने वाले गुरनाम सिंह की मौत सिद्धू द्वारा मुक्का मारने से हुई थी. उन्होंने कहा कि निचली अदालत का यह निष्कर्ष गलत था कि सिंह की मौत ब्रेन हैमरेज से नहीं, बल्कि हृदय गति रुकने से हुई थी.

    पंजाब सरकार के वकील ने कहा, 'इस बात का एक भी सबूत मौजूद नहीं है कि मौत की वजह दिल का दौरा पड़ना या ब्रेन हैमरेज थी. निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था. आरोपी A-1 (नवजोत सिंह सिद्धू) ने गुरनाम सिंह को मुक्का मारा था, जिससे ब्रेन हैमरेज हुआ और उनकी मौत हो गई.'

    अमृतसर से तीन बार सांसद रह चुके सिद्धू फिलहाल पंजाब सरकार में मंत्री हैं और इस मामले में कोर्ट का फैसला क्रिकेटर से राजनेता बने सिद्धू का राजनीतिक करियर की दिशा तय कर सकता है. अगर सिद्धू की सजा को बरकरार रखा रखा जाता है तो वो चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित हो जाएंगे. (भाषा इनपुट के साथ)

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