जैश-ए-मोहम्मद ने 'नार्को आतंक' में भी पसारे पांव, ऐसे भारत पहुंचा 300 करोड़ का ड्रग्स

जैश-ए-मोहम्मद ने 'नार्को आतंक' में भी पसारे पांव, ऐसे भारत पहुंचा 300 करोड़ का ड्रग्स
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जैश-ए-मोहम्मद हाल ही में करीब 300 करोड़ की कीमत का 100 किलो हेरोइन को भारतीय बाजार में घुसाने में कामयाब रहा है.

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  • Last Updated: August 13, 2018, 11:41 PM IST
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आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद अब ड्रग्‍स के जरिए पांव पसार रहा है. हाल ही में गुजरात एटीएस ने 15 करोड़ की ड्रग्स पकड़ी है जिसके तार पाकिस्तान से जुड़ रहे हैं. पाकिस्तान से पंजाब वाया गुजरात का यह नया रूट अंतरराष्ट्रीय ड्रग माफियाओं को रास आने लगा है. जैश-ए-मोहम्मद हाल ही में करीब 300 करोड़ की कीमत की 100 किलो हेरोइन को भारतीय बाजार में घुसाने में कामयाब रहा है. इस मामले में गुजरात एटीएस ने फिलहाल दो ड्रग माफियाओं की गिरफ्तारी है और एक से पूछताछ चल रही है. जबकि पाकिस्तान से पंजाब वाया गुजरात की और भी कड़ियां जोड़ी जा रही हैं.

बता दें कि मुंबई की होटल ताज पर हुए 26/11 हमले के आतंकी गुजरात के समुद्री किनारे का इस्तेमाल करते हुए मुंबई पहुंचे थे. उसके बाद देश की एजंसियों ने सुरक्षा के कितने भी दावे किए हों लेकिन अब इसी समुद्री सीमा का इस्तेमाल नार्को टेरर के लिए होने लगा. समय-समय पर ड्रग्स के बड़े-बड़े जखीरे पकड़े जाते हैं इसके बावजूद ड्रग माफिया एजेंसियों को चकमा देकर ड्रग्स को देश के बाजारों पहुंचाने में कामयाब होते हैं.

300 करोड़ के ड्रग्स की पूरी कहानी
देवभूमि द्वारका के सलाया बंदरगाह के पास रहने वाला अजीज अब्दुल आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की ड्रग यूनिट के संपर्क में आया. अजीज के पास नाव थी, भारतीय बाजार में ड्रग्स लाने के लिए भारतीय फ्लैग वाली नाव चाहिए जिससे एजेंसियों के संदेह और नजर से दूर रहा जा सके.
अफगानिस्तान में अफीम तैयार होने के बाद उसे पाकिस्तान के बहावलपुर में ले जाकर हेरोइन बनाया गया. जैश-ए-मोहम्मद की अगुवाई में उसे ग्वादर पोर्ट ले जाया गया जहां से अजीज की नाव में डालकर इसे भारत पहुंचाना था. अजीज़ को बताया गया कि भारतीय सीमा में घुसते वक्त रफीक नाम का एक शख्स फिशिंग ट्रोलर लेकर आयेगा. यहां ड्रग्स को नाव से फिशिंग ट्रोलर में शिफ्ट करना था. यह भी सोची समझी रणनीति ही थी. भारतीय फ्लैग वाली फिशिंग बोट बाकी फीशिंग बोट्स में शामिल हो जायेगी तो किसी को अंदाजा भी नहीं लगेगा.



जब अज़ीज़ की नाव भारतीय समुद्री सीमा के पास पहुंची तो रफीक फिशिंग बोट लेकर तैयार था. तय योजना के मुताबिक ड्रग्स के 100 पैकेट रफीक ने उतारे जबकि 5 पैकेट अज़ीज़ ने छुपाकर अपने पास रख लिए. रफीक फिशिंग बोट के साथ कच्छ के मांडवी की और निकल गया जबकि अजीज़ जामनगर के सलाया की और निकल गया.

रफीक ने मांडवी पहुचकर ड्रग्स को छुपाया. आगे के आदेश के मुतबिक जिन लोगों को रफीक से हेरोइन लेनी थी वो उसके पास अब तक नहीं पहुंचे थे. न ही उसके पास कोई संदेश आया था. हालांकि पाकिस्तान से पैक होकर आई हेरोइन को अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग व्यक्तियों तक पहुंचाने का आदेश रफीक को मिल चुका था. लिहाजा हेरोइन की री-सैम्पलिंग उत्तर गुजरात के एक जिले में हुई. वहां से ट्रक के जरिये अलग-अलग हिस्सों में पंजाब पहुंचाई गई.

दरअसल हेरोइन का जखीरा इस साल अप्रैल महीने में लाया गया था लेकिन अज़ीज़ अबतक अपने पास रखे 5 किलो हेरोइन को बेच नहीं पाया था. उसे आदेश मिल चुका था कि उसके पास रखे ड्रग्स का क्या करना है, लेकिन वह कुछ करता उससे पहले ही वह गुजरात एटीएस के हत्थे चढ़ गया और अजीज की निशानदेही पर मांडवी से रफीक सुमरा को भी पकड़ लिया गया है.

भारत तक हेरोइन पहुंचाने के मिले 50 लाख रुपये
अजीज ने पूछताछ में बताया कि उसे ग्वादर पोर्ट से भारतीय सीमा तक हेरोइन पहुंचाने के लिए 50 लाख रुपये मिले थे. जबकि अब तक यह साफ़ नहीं हो पाया है कि रफीक को आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की नार्को यूनिट ने कितने पैसे दिए. गुजरात एटीएस के हाथ एक कड़ी लगी है जो आगे की और कई कड़ियों को जोड़ती है. न्यूज18 इण्डिया के पास इसकी पूरी जानकारी है लेकिन जांच प्रभावित न हो इसके चलते इसे सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं.

गुजरात एटीएस ने अपनी जांच का दायरा काफी फैलाया है जिसमें कई बड़ी मछलियों के पकड़े जाने की संभावना है.
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