जयशंकर: पीएम के भरोसेमंद राजनयिक अब 'मोदी कैबिनेट' में शामिल

Shailendra Wangu | News18Hindi
Updated: May 31, 2019, 3:15 PM IST
जयशंकर: पीएम के भरोसेमंद राजनयिक अब 'मोदी कैबिनेट' में शामिल
एस जयशंकर

64 साल के एस जयशंकर 28 जनवरी 2015 से 2018 तक भारत के विदेश सचिव रहे, मोदी सरकार ने ही उन्हें विदेश सचिव नियुक्त किया था. वो 1977 बैच के IFS अधिकारी हैं और विदेश मामलों पर उनकी अच्छी पकड़ है.

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भारत के पूर्व विदेश सचिव एस जयशंकर को मोदी 2.0 सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया है, हालांकि जयशंकर ने चुनाव नहीं लड़ा था. पीएम मोदी के भरोसेमंद डिप्लोमेट रहे हैं एस जयशंकर, यही वजह मानी जा रही है की उन्हें टीम मोदी में शामिल किया गया है. गुरुवार को शपथग्रहण से पहले, जयशंकर के प्रधानमंत्री निवास पहुंचते ही उन्हें मंत्री बनाने की चर्चा शुरू हो गई. कुछ घंटों बाद ही जयशंकर ने पीएम के साथ मंत्रिपद की शपथ ली.

कौन हैं एस जयशंकर?

64 साल के एस जयशंकर 28 जनवरी 2015 से 2018 तक भारत के विदेश सचिव रहे, मोदी सरकार ने ही उन्हें विदेश सचिव नियुक्त किया था. वो 1977 बैच के IFS अधिकारी हैं और विदेश मामलों पर उनकी अच्छी पकड़ है. भारत-चीन संबंधों को जयशंकर करीब से जानते हैं और कई बार केंद्र सरकार के लिए ट्रबल-शूटर की भूमिका में दिखे हैं. जयशंकर ने अमेरिका के साथ परमाणु डील का रास्ता साफ करने और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा को गणतंत्र दिवस पर मेहमान बनाने में अहम भूमिका निभाई थी. बतौर मुख्यमंत्री जब मोदी 2012 में चीन गए थे, उसी दौरान जयशंकर की मुलाकात उनसे हुई थी.

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दो बार भारत-चीन सीमा संकट सुलझाया

अप्रैल 2013 में चीनी फौज भारतीय सीमा में घुसपैठ कर लद्दाख के देपसांग क्षेत्र पर अपना नियंत्रण जतलाने के लिए टेंट लगा लिए थे. उस समय भारतीय सुरक्षाबल और चीनी फौज 21 दिनों तक आमने-सामने थे. तब एस जयशंकर ने चीन में भारतीय राजदूत के तौर पर इस विवाद को हल करने में मुख्य भूमिका निभाई. वहीं बतौर विदेश सचिव जयशंकर ने 2017 के डोकलाम विवाद सुलझाने में भी कामयाब रहे. यह विवाद 73 दिनों तक चला जब चीन को विवादित इलाके में सड़क बनाने से भारत ने रोका था.
वहीं चीन द्वारा जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को स्टेपल वीज़ा देने वाले मामले को भी जयशंकर ने ही 2010 में सुलझाया
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चीन से लौटे, विवाद सुलझाने अमेरिका भेजा गया

2013 में चीन में अपना कार्यालय खत्म कर जयशंकर भारत लौटे ही थे कि मनमोहन सरकार ने उन्हें अमेरिका का राजदूत बना वाशिंगटन भेज दिया. यह वो दौर था जब भारत और अमेरिका के संबंध बहुत ख़राब चल रहे थे. विवाद था भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागड़े के साथ हुई बदसलूकी को लेकर. माना जाता है कि जयशंकर ने न सिर्फ वो विवाद सुलझाया, बल्कि उनके कार्यालय में भारत-अमेरिका रिश्ते वापिस पटरी पर भी लौटे. सितंबर 2014 में पीएम मोदी के पहले अमेरिका दौरे की कामयाबी के पीछे भी जयशंकर ही थे. रिटायर होने के बाद जयशंकर टाटा संस के ग्लोबल कॉर्पोरेट अफेयर्स के प्रेसिडेंट बने, और इसी साल मोदी सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया.

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First published: May 31, 2019, 3:12 PM IST
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