महाभियोग का मामला सुप्रीम कोर्ट ले जाना कांग्रेस के लिए होगा 'आत्मघाती': जेटली

वित्त मंत्री ने कहा कि महाभियोग का कोई प्रस्ताव ऐसी बहुत असाधारण परिस्थितियों में ही लाया जाना चाहिये जहां किसी न्यायधीश ने अपने सेवाकाल में ‘कोई भारी गुनाह’ किया हो. ऐसे मामले में आरोप साबित करने के लिए ठोस सबूत होने चाहिए.

News18Hindi
Updated: April 24, 2018, 9:21 PM IST
महाभियोग का मामला सुप्रीम कोर्ट ले जाना कांग्रेस के लिए होगा 'आत्मघाती': जेटली
अरुण जेटली की फाइल फोटो
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Updated: April 24, 2018, 9:21 PM IST
देश के मुख्य न्यायधीश के खिलाफ महाभियोग के प्रस्ताव को राज्यसभा के सभापति एम. वैंकया नायडु की ओर खारिज किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की कांग्रेस पार्टी के इरादे को वित्त मंत्री जेटली ने 'संभावित आत्मघाती कदम' बताया है. जेटली ने यह भी कहा है कि संसद अपने अधिकार क्षेत्र में सर्वोच्च है और इसकी प्रक्रिया को अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती.

वेंकैया नायडू के फैसले के घंटे भर के अंदर ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और वकील कपिल सिब्बल ने सोमवार को कहा था कि पार्टी इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी. इसे लेकर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने फेसबुक पोस्ट लिख कर विरोध जताया है.

वित्त मंत्री ने कहा कि देश के मुख्य न्यायधीश के खिलाफ गलत सोच से लाया गया महाभियोग प्रस्ताव इस बात का उदाहरण है कि वकालत करने वाले सांसद कोर्ट के भीतर के झगड़े को खींच कर संसद तक ला रहे हैं. जेटली ने कहा, संसद अपने कार्य क्षेत्र में सर्वोच्च है, संसद की प्रक्रिया को समीक्षा के लिए कोर्ट में नहीं ले जाया जा सकता.

अपने फेसबुक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि 'कारोबारी और उद्योगपति कई बार संसद की कार्यवाही को प्रभावित करके नीतियों को अपने पक्ष में करवाने की कोशिश करते रहे हैं. किसी खास मकसद से सवाल उठाकर और संसद सदस्यों से पत्र लिखवाकर अपने व्यापारिक हित साधने की कोशिश भी की जाती रही है.


केंद्रीय वित्त मंत्री ने लिखा, 'अपने व्यापारिक हितों को साधने के लिए संसदीय कार्यवाही का इस्तेमाल करने का ये बहुत पुराना तरीका है. पिछले कई सालों में इस तरह की कई कोशिशों का खुलासा हुआ. सिस्टम के जरिये ऐसे लोगों की इच्छा और उनकी कुत्सित कोशिशों का भी पर्दाफाश होता रहा है. लेकिन जो परिदृश्य अब दिख रहा है, वह पहले से अलग है. बड़ी संख्या में नामी वकील अब संसद के सदस्य हैं. ज्यादातर राजनीतिक पार्टियां अब नामांकन इसी आधार पर दे रही हैं कि उनसे कोर्ट और संसदीय बहस दोनों जगह काम चलवाया जा सके. माननीय सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ लाया गया महाभियोग प्रस्ताव इसी का उदाहरण है.

वित्त मंत्री ने कहा कि महाभियोग का कोई प्रस्ताव ऐसी बहुत असाधारण परिस्थितियों में ही लाया जाना चाहिये जहां किसी न्यायधीश ने अपने सेवाकाल में ‘कोई भारी गुनाह’ किया हो. ऐसे मामले में आरोप साबित करने के लिए ठोस सबूत होने चाहिए. कानाफूसी और अफवाह को सबूत का दर्जा नहीं दिया जा सकता.


जेटली ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा है, 'यह महाभियोग प्रस्ताव अपुष्ट बातों के आधार पर पेश किया गया था और इसका परोक्ष उद्देश्य भारत के मुख्य न्यायाधीश और सबसे बड़ी अदालत के अन्य जजों में डर पैदा करना था.'
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उन्होंने कहा कि दुर्भावना से लाया गया यह प्रस्ताव विफल होना ही था. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी अगर किसी मामले में हित देखती हो और न्यायालय की राय उसके माफिक नहीं हो तो वह संबंधित न्यायाधीशों को विवाद में घसीटने और उन्हें विवादास्पद बनाने के काम में माहिर है.

जेटली ने लिखा है, 'किसी भी राजनीतिक विश्लेषक के लिए यह स्पष्ट था कि संसद में इस महाभियोग प्रस्ताव को दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलेगा. कांग्रेस पार्टी भी यह जानती थी. उसका मकसद प्रस्ताव को पारित कराना नहीं था बल्कि देश की न्यायपालिका को डराना था.'

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First published: April 24, 2018, 9:17 PM IST
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