कई राज्यों में जलीकट्टू सरीखी क्रूर परंपरा वाले खेल...

तस्वीर : AP

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तमिलनाडु में अगर जल्लीकट्टूर जैसा जानवरो के प्रति क्रूरता दिखाने का खेल फिर शुरू हो गया है तो ऐसे ही खेल देश के कई अन्य राज्यों में भी खेले जाते रहे हैं

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 16, 2018, 3:35 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट भी मानता है कि तमिलनाडु में बैलों की लड़ाई वाला खेल जल्लीकट्टू जानवरों के प्रति क्रूरता को दिखाता है. सर्वोच्च अदालत ने तो इस पर बैन ही लगा दिया था. नतीजा ये हुआ कि तमिलनाडु में इसका भारी विरोध हुआ. राज्य सरकार ने एक कानून बनाकर इस पारंपरिक खेल की इजाजत दी. इस बार पोंगल पर जल्लीकट्टू का धूमधाम से आयोजन हुआ. हालांकि तमिलानाडु अकेला राज्य नहीं है, जहां क्रूरता वाले ऐसे खेल हो रहे हैं. दूसरे राज्य भी पीछे नहीं.



जिस तरह तमिलनाडु में राज्य सरकार ने जल्लीकट्टू को हरी झंडी दी, उसके बाद दूसरे राज्यों में भी ऐसा खेल कराने वालों की बांछें खिल गई हैं. कई राज्य ऐसे हैं, जहां अलग अलग जानवरों को लेकर क्रूरता से भरे हिंसक खेल खेले जाते हैं.



कर्नाटक और असम में ऐसा ही हाल

कर्नाटक में कम्बाला का आयोजन होता है जिसमें भैंसों के जोड़े को चावल के खेत में दौड़ाया जाता है. कर्नाटक हाइकोर्ट ने 2016 में इस आयोजन पर प्रतिबंध लगाया था. बाद में राज्य सरकार ने अध्यादेश पारित करके इसे 2017 में अनुमति दे दी थी. विधानसभा में इस खेल को वैध करने के लिए एक बिल भी पास कर दिया गया जिसे अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. वैसे कर्नाटक में ही पुआल को आग लगाकर बैलों को उसके बीच से दौड़ाया जाता है. असम में भी बीहू के मौके पर होने वाली भैसों के बीच की लड़ाई पर सुप्रीम कोर्ट की रोक है. बावजूद इसके इस साल भी यह लड़ाई असम में कई जगहों पर देखी गई.
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पंजाब के ग्रामीण ओलम्पिक्स में बैलगाड़ी की रेस पर फिलहाल रोक है






मुर्गे के पैर में ब्लेड बांध लड़ाने वाला खेल

बात आंध्र प्रदेश की जहां कोड्डीपन्डम खेला जाता है जिसमें मुर्गे के पैर में ब्लेड बांधी जाती है. भीड़ के सामने मुर्गे अपनी जान के लिए लड़ते हैं. हाइकोर्ट के प्रतिबंध के बावजूद यह खेल जारी है. सिर्फ आंध्र में ही नहीं, बंगाल और यूपी में भी मुर्गे का खेला काफी लोकप्रिय है.



पंजाब में बैलगाड़ियों की रेस

पंजाब में होने वाले ग्रामीण ओलम्पिक्स यानि किला रायपुर खेल की जहां बैलगाड़ियों की रेस लगाई जाती है. फिलहाल इस पर सुप्रीम कोर्ट की रोक है. महाराष्ट्र में भी बैलगाड़ियों की रेस पर 2014 से बैन है बावजूद इसके यह जारी है. जानवरों के अधिकारों की बात करने वाली संस्थाओं ने गैरकानूनन ढंग से हो रहे इस खेल के खिलाफ आवाज़ भी उठाई है.



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असम और यूपी में बुलबुल के बीच लड़ाई का खेल भी होता है




असम में बुलबुल की लड़ाई

इसके अलावा असम में बुलबुल की लड़ाई पर भी रोक है. बुलबुल की लड़ाई असम का पारंपरिक आयोजन माना जाता है. गुवाहाटी हाइकोर्ट ने पहले इसे जारी रखने के लिए कहा लेकिन हाल ही में इस पर फिर से रोक लगा दी गई है. कानपुर में भी बुलबुल की लड़ाई करवाई जाती है. बुलबुल को पालने वाले उसे खाने के लिए भुना हुआ बेसन, किसमिस, छुआरा, खजूर, फल और दूध देते हैं ताकि वो ताकतवार हो सके. उन्हें पहलवानों की तरह ही वर्जिश भी कराई जाती है. ताकि अधिक समय तक लड़ने का स्टेमिना आए. इस साल जल्लीकट्टू के आयोजन के बाद इन खेलों की किस्मत को फिर चमकाने की कोशिश हो रही है.
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