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मुस्लिम ब्रदरहुड से मिलकर कश्‍मीरियों के दिलोदिमाग को बदल रहा जमात-ए इस्‍लामी

मुस्लिम ब्रदरहुड से मिलकर कश्‍मीरियों के दिलोदिमाग को बदल रहा जमात-ए इस्‍लामी

कश्‍मीर के लोगों के दिलोदिमाग को बदल रहा है जमात ए इस्‍लामी. (File pic)

कश्‍मीर के लोगों के दिलोदिमाग को बदल रहा है जमात ए इस्‍लामी. (File pic)

Jammu Kashmir: मुस्लिम ब्रदरहुड तुर्की आधारित संगठन है. जमात-ए-इस्‍लामी के विशेषज्ञ लगातार इसके प्रमुख सदस्‍यों के संपर्क में रहते हैं. खुफिया सूत्रों ने CNN-News18 को बताया कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन संगठनों का उद्देश्य कश्मीर के लोगों की मानसिकता को जीवन के प्रति कठोर और कट्टरपंथी दृष्टिकोण की ओर ले जाना है.

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    श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में जमात-ए-इस्लामी (Jamat-e-Islami) तुर्की के मुस्लिम ब्रदरहुड (Muslim Brotherhood) संगठन के साथ मिलकर कश्‍मीरी लोगों (Jammu Kashmir People) के दिलोदिमाग को बदलने प्रयास कर रहा है. जमात-ए-इस्‍लामी का प्रभाव आतंकी साजिशों (Terrorism) को आगे बढ़ाने में एक प्रमुख कारक रहा है. वहीं समाज और जीवन की अवधारणा के साथ-साथ जमात-ए-इस्‍लामी की ओर से अपनाया गया सरकार चलाने का तरीका कश्मीर के लोगों से जुड़े सूफी महत्‍व के उलट है. जमात का म‍कसद शरीयत की तर्ज पर समाज और राजनीति में मानदंडों को सुनिश्चित करना रहा है. इस संबंध में वो इस्लामी संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड की प्रथाओं का पालन करता है और इससे प्रत्यक्ष रूप से प्रेरणा लेता है.

    मुस्लिम ब्रदरहुड तुर्की आधारित संगठन है. जमात-ए-इस्‍लामी के विशेषज्ञ लगातार इसके प्रमुख सदस्‍यों के संपर्क में रहते हैं. वे सभी हर दिन के हिसाब से विभिन्न मुद्दों पर उनकी सलाह और मार्गदर्शन लेते हैं. खुफिया सूत्रों ने CNN-News18 को बताया कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन संगठनों का उद्देश्य कश्मीर के लोगों की मानसिकता को जीवन के प्रति कठोर और कट्टरपंथी दृष्टिकोण की ओर ले जाना है.

    उदाहरण के लिए मुस्लिम ब्रदरहुड जमात ए इस्‍लामी के माध्यम से धर्मस्थलों की पूजा की प्रथा को पूरी तरह से खारिज करने की जरूरत का प्रचार कर रहा है. यह सूफी प्रथा के उलट है, जो अधिक खुली है और रहस्यमय तीर्थ आधारित पूजा पर निर्भर करती है. इस प्रकार जमात ए इस्‍लामी कश्मीरी समाज के अंदर मुस्लिम ब्रदरहुड की अवधारणाओं और सिद्धांतों को व्यवस्थित रूप से पेश कर रहा है.

    जमात-ए-इस्लामी हिज़्ब-उल-मुजाहिदीन (HM) से मिलकर भी काम करता है. यह इसकी ऑपरेशनल विंग है. जमात ए इस्‍लामी एचएम की गतिविधियों को बुनियादी ढांचा और सहायता प्रदान करता है. दिलचस्प बात यह है कि जमात ए इस्‍लामी मुस्लिम ब्रदरहुड के समर्थन के आधार पर अपने इस्लामी ज्ञान को बढ़ाता है. इसके बाद जमात ए इस्‍लामी इस ज्ञान का इस्‍तेमाल समाज के शिक्षित वर्गों को बहलाने-फुसलाने में करता है. इनमें कश्‍मीर की नौकरीशाही के मध्‍यम स्‍तर के लोग भी शामिल रहते हैं.

    पहले के समय में यह पाया गया है कि मुस्लिम ब्रदरहुड ने व्यवस्थित रूप से कश्मीर में जमात ए इस्‍लामी के गुर्गों की ओर से दी गई ब्रीफिंग की तर्ज पर एक स्वतंत्र कश्मीर के पक्ष में मकसद को बढ़ाया है. सुन्नी इस्लामवादी संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड की भारत में गंभीर रुचि पहले भी स्‍पष्‍ट हुई है. उसकी यह रुचि विशेष रूप से कश्मीर में और भारत में मुसलमानों से संबंधित गतिविधियों में है.

    मुस्लिम ब्रदरहुड ने हाल ही में ‘भारतीय उत्पादों का बहिष्कार’ अभियान शुरू किया था. जिसे फेक न्‍यूज और भारत में मुसलमानों के उत्पीड़न को दिखाने वाले फर्जी ग्राफिक्स के आधार पर बनाया गया था. उसने पहले भी कश्मीर के संबंध में इस चाल का इस्तेमाल किया है. भारतीय उत्पादों के बहिष्कार का आह्वान करते हुए इसने भारत पर अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न में शामिल होने का आरोप लगाते हुए ट्विटर हैंडल की एक सीरीज चलाई थी.

    मुस्लिम ब्रदरहुड कई अन्य समान विचारधारा वाले संगठनों के साथ कश्मीर पर अपना मकसद साझा कर रहा है. जैसे कि अमेरिका में मौजूद इस्लामिक सोसाइटी ऑफ नॉर्थ अमेरिका, मुस्लिम स्टूडेंट्स एसोसिएशन, काउंसिल ऑन अमेरिकन इस्लामिक रिलेशंस (सीएआईआर), इस्लामिक सर्कल ऑफ नॉर्थ अमेरिका (आईसीएनए) व अन्‍य संगठनों से.

    Tags: Islamic Terrorism, Jammu and kashmir, Terrorism

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