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UP सहित इन 5 राज्यों के धर्मांतरण कानून के खिलाफ याचिका, जमीयत उलेमा हिंद ने की रद्द करने की मांग

जमीयत उलेमा हिंद ने यूपी सहित 5 राज्यों के धर्मांतरण कानून के खिलाफ याचिका दायर की. (फाइल फोटो)

जमीयत उलेमा हिंद ने यूपी सहित 5 राज्यों के धर्मांतरण कानून के खिलाफ याचिका दायर की. (फाइल फोटो)

जमीयत उलेमा हिंद द्वारा दायर की गई याचिका में कहा गया कि अंतर्धार्मिक जोड़ों को परेशान करने और उन्हें फंसाने के लिए विव ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

यूपी सहित पांच राज्यों के धर्मांतरण कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है.
याचिका दायर करने वाले जमीयत उलेमा संगठन ने धर्मांतरण कानूनों को रद्द करने की मांग की है.

नई दिल्ली. जमीयत उलेमा हिन्द (Jamiat Ulema Hind) ने देश के तीन राज्यों में धर्मांतरण कानून (Conversion Law) लाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में गुरुवार को याचिका दाखिल किया. साथ ही याचिका में यह भी मांग की गई है कि पांच राज्यों के धर्मांतरण कानून को अंसवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है. धर्मांतरण कानून को लेकर याचिका में कहा गया है कि इन राज्यों के कानून अंतर-धर्म कपल को परेशान करने का साधन है. याचिका में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात में बनाए गए धर्मांतरण कानून को असंवैधनाकि घोषित करने की मांग की गई है.

याचिका में कहा गया कि अंतर्धार्मिक जोड़ों को परेशान करने और उन्हें फंसाने के लिए विवादित अधिनियमों का इस्तेमाल किया जा रहा है. याचिकाकर्ता ने मांग की है कि धर्म परिवर्तन अधिनियम, 2021 (“उत्तर प्रदेश अधिनियम”), उत्तराखंड की स्वतंत्रता, धर्म अधिनियम, 2018 (“उत्तराखंड अधिनियम”), हिमाचल प्रदेश धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम, 2019 (“हिमाचल प्रदेश अधिनियम”), मध्य प्रदेश धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 (“मध्य प्रदेश अधिनियम”) और गुजरात धर्म की स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम, 2021 (“गुजरात अधिनियम”) को रद्द करने को कहा गया है.

बता दें कि संगठन दावा करता आ रहा है कि इन कानूनों के तहत बड़ी संख्या में मुस्लिमों को परेशान किया जा रहा है. वहीं मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान कहते रहे हैं कि मैं किसी भी कीमत पर एमपी की धरती पर लव-जिहाद का खेल नहीं चलने दूंगा. जरूरत पड़ी तो लव जिहाद के खिलाफ कड़ा कानून भी बनाएंगे.एमपी में धर्मांतरण कानून के तहत अधिकतम 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है. अगर प्रलोभन, धमकी, कपट, षड़यंत्र से या धर्म छिपाकर विवाह करेगा तो वह विवाह भी शून्य माना जाएगा.

वहीं उत्तराखंड में धर्मांतरण कानून के तहत दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की कैद हो सकती है. इसके अलावा नए कानून में 50 हजार के जुर्माने का प्रावधान किया गया है. धर्मांतरण कराने का दोषी पाए जाने वाले को 5 लाख रुपये तक पीड़ित को देने होंगे. बता दें कि यूपी के धर्मांतरण कानून के मुकाबले उत्तराखंड धर्मांतरण कानून ज्यादा सख्त है.

Tags: Conversion, Love jihad, Supreme Court

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