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जम्मू कश्मीर दो केंद्र शासित प्रदेशों में तब्दील हुआ, देश में राज्यों की संख्या घट कर 28 हुई

भाषा
Updated: October 31, 2019, 5:44 PM IST
जम्मू कश्मीर दो केंद्र शासित प्रदेशों में तब्दील हुआ, देश में राज्यों की संख्या घट कर 28 हुई
केंद्र शासित प्रदेशों की संख्या बढ़ कर 9 हुई और राज्यों की संख्या घटकर 28

देश के इतिहास में पहली बार हुआ है कि किसी राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों (Union Territory) में तब्दील कर दिया गया. इस तरह, केंद्र शासित प्रदेशों (UT) की संख्या बढ़ कर 9 हो गई और राज्यों की संख्या घटकर 28 रह गई है.

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श्रीनगर. जम्मू कश्मीर (Jammu and Kashmir) 31 अक्टूबर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में तब्दील हो गया, जबकि कश्मीर घाटी पिछले 88 दिनों की तरह गुरुवार को भी बंद रहा. वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने कहा है कि नयी व्यवस्था का लक्ष्य विश्वास की मजबूत कड़ी बनाना है.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राज्य में लगे राष्ट्रपति शासन को समाप्त कर दिया है और राज्य को विभाजित कर गठित किये गये दो नये केंद्रशासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख का नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया. देश के इतिहास में पहली बार हुआ है कि किसी राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों (संघ राज्य क्षेत्रों) में तब्दील कर दिया गया. इस तरह, केंद्र शासित प्रदेशों (UT) की संख्या बढ़ कर 9 हो गई और राज्यों की संख्या घटकर 28 रह गई है.

यह कदम 5 अगस्त को केंद्र सरकार द्वारा की गई घोषणा के अनुरूप उठाया गया है. केंद्र ने जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को रद्द करने और राज्यों को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने की घोषणा की थी. केंद्र शासित प्रदेश के रूप में अस्तित्व में आए जम्मू कश्मीर का उप-राज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू को और लद्दाख का उप-राज्यपाल राधा कृष्ण माथुर को बनाया गया है.

जम्मू-कश्मीर की मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल (Gita Mittal) ने पहले लेह में माथुर को और बाद में श्रीनगर स्थित राजभवन में आयोजित एक सादे समारोह में मुर्मू को उपराज्यपाल पद की शपथ दिलाई. गुजरात कैडर के, 1985 बैच के आईएएस अधिकारी मुर्मू की नियुक्ति का वारंट मुख्य सचिव बी वी आर सुब्रह्मण्यम ने पढ़ा.

इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार वल्लभ भाई पटेल की 144वीं जयंती पर गुजरात के केवडिया में ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ पर श्रद्धा सुमन अर्पित किये और लोगों को ‘राष्ट्रीय एकता संकल्प’ दिलाया. प्रधानमंत्री ने अनुच्छेद 370 हटाए जाने के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने के प्रावधानों से राज्य में सिर्फ और सिर्फ आतंकवाद ही फैला.

उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख में नई व्यवस्था का मतलब जमीन पर लकीर खींचना नहीं, बल्कि विश्वास की एक मजबूत कड़ी बनाना है. मोदी ने देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू पर परोक्ष निशाना साधते हुए कहा कि पटेल ने एक बार कहा था कि यदि उनके (पटेल के) हाथों में कश्मीर मुद्दा होता, तो इसका हल करने में इतना लंबा समय नहीं लगता.

जम्मू कश्मीर का विभाजन लागू होने के बाद कश्मीर घाटी में एक और दिन बंद रहा और तनावपूर्ण स्थिति रही. बाजार बंद रहे, सड़कें सुनसान रहीं और बच्चे स्कूल नहीं गये. श्रीनगर सिविल लाइंस इलाके के एक बाशिंदे मुजम्मिल मोहम्मद ने कहा कि यह फैसला हमारे हितों के खिलाफ है. उन्होंने हमारा विशेष दर्जा और हमारी पहचान छीन ली.
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उमेर जरगर नाम के एक अन्य स्थानीय निवासी ने कश्मीर को विवादित क्षेत्र बताया. उन्होंने कहा कि भारत का फैसला ‘अवैध, अनैतिक और असंवैधानिक’ है. भारत अनुच्छेद 370 खत्म नहीं कर सकता. यह मुद्दा संयुक्त राष्ट्र में है. श्रीनगर के बीचों बीच स्थित पोलो ग्राउंड के पास बाजार में कोई दुकानदार नहीं था. सड़क किनारे रेहड़ी लगाने वाले विक्रेता भी मंगलवार से अपनी दुकानें नहीं लगा रहे हैं जबकि वे दो महीनों से नियमित रूप से दुकानें लगा रहे थे.

मंगलवार को ही यूरोपीय संघ (European Union) की संसद के सदस्यों का एक शिष्टमंडल कश्मीर में स्थिति का जायजा लेने के लिये राज्य के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचा था. घाटी में लैंडलाइन एवं पोस्टपेड मोबाइल फोन सेवाएं बहाल कर दी गई हैं लेकिन इंटरनेट सेवाएं चार अगस्त की रात से अब तक निलंबित हैं. अलगावादी नेता एहतियाती हिरासत में हैं जबकि पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती जैसे मुख्यधारा की राजनीति के नेता या तो हिरासत में हैं या नजरबंद हैं.

श्रीनगर से लोकसभा सदस्य फारूक अब्दुल्ला को जन सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार कर लिया गया था. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय राजधानी में कहा कि अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35 ए जम्मू कश्मीर में आतंकवाद के प्रवेश द्वार थे. मोदी ने इन्हें रद्द कर इस प्रवेश द्वार को बंद कर दिया. घाटी के नेताओं ने भी इस घटनाक्रम पर अपने विचार व्यक्त किये हैं.

भाजपा की जम्मू कश्मीर इकाई के प्रवक्ता खालिद जहांगीर ने कहा कि यह कदम जम्मू कश्मीर और लद्दाख में शांति एवं विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा. हालांकि, नेशनल कांफ्रेंस ने केंद्र के फैसले को असंवैधानिक करार दिया और कहा कि यह देश के लोगों के हित में नहीं है. नेशनल कांफ्रेंस नेता न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) हसनैन मसूदी ने कहा कि संसद के पास किसी राज्य को गुम (खत्म) करने की शक्ति नहीं है.

राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के फैसले के लागू होने के साथ जम्मू कश्मीर का संविधान और रणबीर दंड संहिता अस्तित्व में नहीं रह गये हैं. गृह मंत्रालय ने बुधवार को देर रात जारी एक अधिसूचना के जरिये जम्मू कश्मीर राज्य की जगह ‘जम्मू कश्मीर संघ राज्य प्रदेश’ शब्दावली का उल्लेख किया. जम्मू कश्मीर में विधानसभा होगी, जबकि लद्दाख बगैर विधानसभा वाला केंद्र शासित क्षेत्र होगा.

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First published: October 31, 2019, 5:44 PM IST
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