जम्मू-कश्मीर: BJP नहीं चाहती 2011 की जनगणना के आधार पर हो परिसीमन, आयोग से कही ये बात

बीजेपी प्रमुख रविंद्र रैना की अगुवाई में एक अलग टीम ने पैनल से कहा था कि इससे पहले हुए परिसीमन में 'एकतरफा' फैसला किया गया था. (BJP4JnK Twitter/28 June 2021)

Jammu-Kashmir Delimitation: सरकार की तरफ से साल 2019 में संसद में पेश किए गए डेटा के मुताबिक, दोनों प्रांतों में मतदाताओं में काफी कम अंतर है. जम्मू में वोटर्स की संख्या 37.33 लाख है. वहीं, कश्मीर में 40.10 लाख मतदाता हैं. जम्मू-कश्मीर में आखिरी बार परिसीमन 1995 में हुआ था.

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    श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर में परिसीमन (Delimitation) को लेकर आयोग (Delimitation Commission) पार्टियों से बात कर रहा है. इस बीच प्रजेंटेशन देने पहुंची जम्मू प्रांत की भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने निर्वाचन क्षेत्रों को दोबारा बनाए जाने के लिए 2011 की जनगणना (2011 Census) के आंकड़ों के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई है. आयोग के सामने प्रेजेंटेशन देने पहुंचे बीजेपी के प्रतिनिधिमंडल ने परिसीमन में मतदाता सूची को ध्यान में रखे जाने की बात कही है.

    इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व मंत्री सुनील शर्मा ने कहा, 'उन्होंने 2011 की जनगणना के इस्तेमाल का विरोध किया था, क्योंकि इसके आंकड़ों में काफी हेराफेरी की गई थी.' उन्होंने कहा, 'चूंकि मतदाता सूची हर साल अपडेट होती है, तो उसके आधार पर जनसंख्या अनुपात का पता लगाया जाना चाहिए.' शर्मा के नेतृत्व में किश्तवार, डोडा और रामबन जिले के बीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने पैनल के सामने अपनी मांग रखी थी.

    केंद्र शासित प्रदेश के पार्टी प्रमुख रविंद्र रैना की अगुवाई में एक अलग टीम ने पैनल से मुलाकात की थी. उनका कहना था कि इससे पहले हुए परिसीमन में एक क्षेत्र के पक्ष में 'एकतरफा' फैसला किया गया था. प्रतिनिधिमंडल ने बढ़ी हुई आबादी के डेटा की जांच के लिए आधार डाटा का उपयोग करने की सलाह दी है. सरकार की तरफ से तैयार किए गए जम्मू एंड कश्मीर रीऑर्गेनाइजेशन एक्ट 2019 में 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन किया जाना तय हुआ है.



    इसके अलावा जम्मू प्रांत में अन्य पार्टियां भी पहले ही परिसीमन के लिए 2011 की जनगणना का विरोध कर चुकी हैं. जनगणना के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर की कुल आबादी 1.22 करोड़ है. इनमें से 68.88 लाख कश्मीर प्रांत और 53.78 लाख जम्मू में हैं. जम्मू के दलों का कहना है कि ये आंकड़े कश्मीर के पक्ष में बदले गए हैं. 2001 और 2011 के बीच कश्मीर में जनसंख्या 26 फीसदी बढ़ी है. जबकि, जम्मू में यह आंकड़ा 21 प्रतिशत है.

    सरकार की तरफ से साल 2019 में संसद में पेश किए गए डेटा के मुताबिक, दोनों प्रांतों में मतदाताओं में काफी कम अंतर है. जम्मू में वोटर्स की संख्या 37.33 लाख है. वहीं, कश्मीर में 40.10 लाख मतदाता हैं. जम्मू-कश्मीर में आखिरी बार परिसीमन 1995 में हुआ था.

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    एकजुट जम्मू के अध्यक्ष एडवोकेट अंकुर शर्मा सवाल उठाते हैं कि 1990 में आतंकवाद के बढ़ने के बाद घाटी से बड़े स्तर पर पंडितों और सिखों के पलायन करने के बावजूद 2001 की जनसंख्या से जम्मू की आबादी कश्मीर की तुलना में धीमे कैसे बढ़ी. खास बात यह है कि जम्मू-कश्मीर देश का एकमात्र ऐसा राज्य या केंद्र शासित प्रदेश होगा, जिसका परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर किया जा रहा है. आखिरी बार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का परिसीमन 2001 सेंसस के आधार पर किया गया था.

    नेशनल कॉन्फ्रेंस ने उठाया सवाल
    श्रीनगर में परिसीमन आयोग के सामने पहुंचे नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कहा कि आदर्श रूप से परिसीमन राज्य का दर्जा बहाल करने के बाद किया जाना चाहिए. इस दौरान पार्टी ने सवाल उठाए कि साल 2026 में क्या होगा, जब पूरा देश 2021 के जनगणना के आधार पर परिसीमन के दौर से गुजरेगा. वहीं, पीडीपी ने इस पैनल का विरोध किया है और सीपीएम ने कहा है कि मौजूदा परिसीमन के लिए 2011 की जनगणना का इस्तेमाल किया जाना चाहिए.

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