जम्मू-कश्मीरः CBI ने जमीन कब्जा करने के तीन मामलों में शुरू की जांच

फाइल फोटोः केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI)
फाइल फोटोः केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI)

केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) ने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर (Jammu and Kashmir) में भूमि कब्जा करने के तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं. ये मामले जम्मू और सांबा (Samba) जिलों में कथित भूमि कब्जा के हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 16, 2020, 8:52 PM IST
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नई दिल्ली. सरकारी अधिकारियों के साथ साठगांठ कर जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) में कथित भूमि कब्जा करने के संबंध में सीबीआई (CBI) ने तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं. इसमें केंद्र में सचिव स्तर का एक अधिकारी भी जांच के घेरे में हैं. अधिकारियों ने सोमवार को इस बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि मामलों की जांच पहले राज्य सतर्कता संगठन कर रहा था और जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय (Jammu Kashmir High Court) के आदेश पर सीबीआई (CBI) ने जांच का जिम्मा अपने हाथों में लिया. मामले जम्मू और सांबा जिलों में कथित भूमि कब्जा के हैं.

सीबीआई प्रवक्ता आर के गौड़ ने एक मामले के बारे में बताया कि जम्मू जिला के राजस्व विभाग के अधिकारियों ने रोशनी कानून के तहत तय प्रावधानों और अन्य नियमों की अवहेलना करते हुए जानबूझकर निजी लोगों को फायदे पहुंचाए. इस तरह राज्य की जमीन के मालिकाना हक गलत तरीके से अयोग्य लोगों को दिए गए और इससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा.

एक अन्य मामला जम्मू का है और यह गांधी नगर के एक कारोबारी और राजस्व विभाग, जम्मू विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की साठगांठ के बारे में है. जम्मू जिला के राजस्व अधिकारियों ने कारोबारी के साथ आपराधिक साठगांठ कर दीली तहसील के गांव में जमीन का आवंटन किया.



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अधिकारियों ने बताया कि अब केंद्र में सचिव पद पर तैनात एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और केंद्रशासित प्रदेश में बिजली विभाग में तैनात अधिकारी भी एजेंसी की जांच के घेरे में है. तीसरा मामला सांबा जिले का है, जहां राजस्व अधिकारियों ने रोशनी कानून के प्रावधानों के विपरीत अवैध तरीके से लोगों को फायदे पहुंचाए.


गौड़ ने कहा, ‘‘कई मामलों में आरोप लगाया गया कि राज्य की जमीन के मालिकाना हक निजी लोगों को दिए गए जिनके नाम राजस्व रिकॉर्ड में नहीं थे. यह भी आरोप हैं कि कानून के प्रावधानों के तहत कीमत निर्धारण करने वाली समिति ने कीमत तय नहीं की थी और कई मामलों में रकम सरकारी खजाने में जमा नहीं की गयी, जिससे राजस्व का नुकसान हुआ.’’
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