लाइव टीवी

जम्मू-कश्मीर में इन रास्तों पर चलकर लोगों का विश्वास हासिल करना चाहती है सरकार

News18Hindi
Updated: July 4, 2019, 4:35 PM IST
जम्मू-कश्मीर में इन रास्तों पर चलकर लोगों का विश्वास हासिल करना चाहती है सरकार
अधिकारियों का मानना है कि राज्य में चुनौतियां कम नहीं हैं. (PTI Photo)

एक अधिकारी ने कहा कि पांच से छः जिलों का दौरा करने के दौरान पता चला कि शासन व्यवस्था पूरी तरह से खराब हो गई है.

  • Share this:
जम्मू और कश्मीर में 6 महीने के लिए बढ़ाए गए राष्ट्रपति शासन को लोगों का विश्वास हासिल करने के लिए अच्छा अवसर मान रही है. गृह मंत्री अमित शाह का भी इस पर निगाह और हाल ही में उनके दो दिवसीय दौरे को भी इससे जोड़ कर देखा जा रहा है.

केंद्र की रणनीति है कि राज्य में हुए घोटालों में शामिल स्थानीय नेताओं को बेनकाब कर उन्हें जड़ से उखाड़ा जाए. इसके साथ ही राज्य में रोजगार के अवसर के लिए विकास परियोजनाओं की पहुंच हो.

स्थानीय अधिकारियों का मानना है कि पूरे राज्य में बदलाव की तड़प दिख रही है. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार स्थानीय अधिकीर ने कहा कि लोग बदलाव के साथ-साथ अच्छा प्रशासन चाहते हैं. बीते एक साल में हमारा ध्यान इसी ओर केंद्रित रहा है.

 बैक टू विलेज अभियान

इसी के तहत बैक टू विलेज अभियान शुरू किया गया. जिसमें गैजेटेड अधिकारियों ने राज्य के साभी 4,483 पंचायतों में दो दिन और रात रुके.

राज्य में आतंकियों का गढ़ माने जाने वाले दक्षिण कश्मीर में अधिकारियों को भारी सुरक्षा दी गई थी. जिसके चलते बैक टु विलेज अभियान सफल हो सका. इस कार्यक्रम को शांति की शुरुआत और आतंकियों को राज्य के बाहर करने की कोशिश के तौर पर देखा गया.

इस अभियान में बड़ी सफलता उस वक्त हासिल हुई जब मारे गए आतंकी बुरहान वानी के त्राल स्थित पैतृक गांव डडसरा के निवासी रहे आतंकी जाकिर मूसा के पिता भी शामिल हुए थे.यह भी पढ़ें:  शानदार जिंदगी गुजारते हैं कश्मीरी अलगाववादी और उनके परिवार

jammu and kashmir, development of jammu and kashmir, amit shah, home minister, jobs in jammu and kashmir, j and k, pdp, omar abdullah, ncf, mehbooba mufti, narendra modi, rahul gandhi,congress,
(AP Photo/Dar Yasin)


रोजगार के अवसर

इतना ही राज्य में रोजगार के अवसर पैदा हों इसके लिए भी कोशिश की जा रही है. युवाओं में भड़कने वाले विद्रोह की बड़ी वजह बेरोजगारी भी है.राज्य सरकार की योजना है कि इस साल अक्टूबर में एक निवेश शिखर सम्मेलन कराया जाए.

रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों ने कहा कि स्थानीय निकाय और पंचायतों के चुनाव में लोगों की बढ़ी सहभागिता भी उपलब्धि रही. इन चुनावों में 74 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ.

हालांकि अधिकारियों का मानना है कि राज्य में चुनौतियां कम नहीं हैं. एक अधिकारी ने कहा कि पांच से छः जिलों का दौरा करने के दौरान पता चला कि शासन व्यवस्था पूरी तरह से खराब हो गई है. इसे भी सही करने की चुनौतियां हैं.

यह भी पढ़ें:  पीएम मोदी बोले- जम्मू कश्मीर को समझना है तो सुनें ये भाषण

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए Jammu से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: July 4, 2019, 4:33 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर