कश्मीर में मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद, कभी भी लग सकता है कर्फ्यू!

जम्मू-कश्मीर सरकार के कई अधिकारियों और कर्मचारियों को कर्फ्यू के दौरान ऑफिस आने-जाने के लिए पास जारी किया जा चुका है.

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Updated: August 5, 2019, 12:07 AM IST
कश्मीर में मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद, कभी भी लग सकता है कर्फ्यू!
जम्मू-कश्मीर: स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को मिले कर्फ्यू पास. (फाइल फोटो)
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Updated: August 5, 2019, 12:07 AM IST
जम्‍मू-कश्‍मीर के हालात तनावपूर्ण हैं. इस बीच स्‍वास्‍थ्‍य विभाग ने श्रीनगर समेत कुछ जिलों के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए कर्फ्यू पास देने का अनुरोध किया है. सूत्रों के हवाले से खबर मिली है कि कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए कर्फ्यू पास जारी भी किए गए हैं. ऐसी हलचलों के बीच ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि कश्‍मीर घाटी में कभी भी कर्फ्यू लगाया जा सकता है. वहीं, कश्‍मीर घाटी में मोबाइल इंटरनेट सेवा भी बंद कर दी गई है.



जम्मू-कश्मीर सरकार के कई अधिकारियों और कर्मचारियों को कर्फ्यू के दौरान ऑफिस आने-जाने के लिए पास जारी किया जा चुका है. वहीं, कश्मीर घाटी में सुरक्षा बलों की तैनाती के बीच जम्मू क्षेत्र में भी सुरक्षा बढ़ाई दी गयी है और सीमावर्ती पुंछ और राजौरी जिलों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात किया जा रहा है.



घाटी के इन जगहों पर सशस्‍त्र बल तैनात
अधिकारियों का कहना है कि आतंकी हमलों की धमकी के मद्देनजर बीते दो दिनों में जम्मू जिले के अलग-अलग जिलों में आरएएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी और बीएसएफ समेत विभिन्न केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की कई कंपनियों को तैनात किया गया है. अधिकारियों ने कहा कि सीमावर्ती राजौरी और पुंछ जिलों में तैनात आरएएफ की टुकड़ियों ने सुरक्षा अभ्यास के तहत स्थानीय पुलिस और सीआरपीएफ के साथ एक इलाके में गश्त की.

एटीएम में नहीं है पैसा
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जम्मू क्षेत्र में हालात कमोबेश सामान्य रहे हैं, लेकिन राजौरी और पुंछ, डोडा, किश्तवाड़ समेत विभिन्न जिलों से यहां आ रहीं रिपोर्टों के मुताबिक भारी संख्या में बलों की तैनाती से लोगों में घबराहट है. रिपोर्ट में मुताबिक अधिकतर एटीएम में नकदी नहीं है क्योंकि लोगों ने हालात के मद्देनजर जरूरी सामान खरीदकर जमा करना शुरू कर दिया है.

इस बीच नेशनल पैंथर्स पार्टी के चेयरमैन और राज्य के पूर्व मंत्री हर्ष देव सिंह ने कहा कि जम्मू के शांतिपूर्ण और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से मुक्त होने के बावजूद यहां भी तनाव पैदा हो गया है. हर्ष ने कहा, 'कश्मीर की स्थिति से निपटने के लिए सेना की भारी तैनाती और पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को परामर्श जारी करने से जम्मू क्षेत्र के लोगों के सामाजिक-आर्थिक जीवन पर भी असर पड़ा है. जम्मू को न केवल अशांत और असुरक्षित क्षेत्र रूप में पेश किया जा रहा है बल्कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो रही है.'

गृहमंत्री ने की बैठक
कश्मीर घाटी में आतंकी खतरे, देश की सुरक्षा तैयारियों और रणनीति की समीक्षा करने के लिए गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार को उच्च स्तरीय बैठक की. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संसद भवन स्थित अपने कार्यालय में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और गृह सचिव राजीव गौबा के साथ करीब दो घंटे तक उच्च स्तरीय बैठक की.



अमित शाह की इस बैठक को रणनीतिक रूप से इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि सोमवार को कैबिनेट को भी बैठक बुलाई गई है. सामान्यत: केंद्रीय कैबिनेट की बैठक बुधवार को होती है, लेकिन इस बार कैबिनेट की बैठक सोमवार को बुलाए जाने को कश्मीर में आतंकी खतरे के बाद सरकार की ओर से की गई सुरक्षा तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है.

गृह मंत्रालय में कश्मीर के मामले देखते हैं ज्ञानेश कुमार
बैठक के बाद अतिरिक्त सचिव ज्ञानेश कुमार और गृहमंत्री अमित शाह ने अलग से बातचीत की. इन दोनों लोगों की अलग से बातचीत के बाद माना जा रहा है कि मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर को लेकर कोई भी बड़ा नीतिगत फैसला ले सकती है. ज्ञानेश कुमार, गृह मंत्रालय में कश्मीर के मामले देखते हैं. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अमित शाह ने बैठक में कश्मीर में सुरक्षा तैयारियों की स्थिति, आतंकी हमले से जुड़ी खुफिया रिपोर्ट, आतंकियों की घुसपैठ की कोशिश, 35ए और अनुच्छेद 370 पर जम्मू-कश्मीर के राजनेताओं की बयानबाजी पर विचार किया गया. गृहमंत्री ने आतंकी हमले के खतरे से जुड़े खुफिया इनपुट्स और सुरक्षा तैयारियों की भी जानकारी ली.

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First published: August 4, 2019, 9:49 PM IST
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