जम्मू-कश्मीर: श्रीनगर में महसूस किये गये भूकंप के झटके

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में मध्यम तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किये गये (सांकेतिक फोटो)
जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में मध्यम तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किये गये (सांकेतिक फोटो)

भूकंप की तीव्रता रेक्टर स्केल पर 3.6 थी. और रात 9 बजकर 40 मिनट पर आए इस भूकंप का प्रभाव श्रीनगर तक ही रहा. इस बात की जानकारी यूरोपियन मेडिटेरेनियन सेस्मोलॉजिकल सेंटर ने दी.

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  • Last Updated: September 22, 2020, 11:03 PM IST
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नई दिल्ली. केंद्रशासित प्रदेश (Union Territory) जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) की राजधानी श्रीनगर (Srinagar) में मंगलवार की रात भूकंप (Earthquake) के झटके महसूस किये गये. हालांकि महसूस किये गये भूकंप के झटके मध्यम तीव्रता (moderate intensity) के ही थे. मिली जानकारी के मुताबिक भूकंप की तीव्रता रेक्टर स्केल (Richter Scale) पैमाने पर 3.6 थी. और रात 9 बजकर 40 मिनट पर आए इस भूकंप का प्रभाव श्रीनगर तक ही रहा. इस बात की जानकारी यूरोपियन मेडिटेरेनियन सेस्मोलॉजिकल सेंटर ने दी.

बता दें कि पूरा ही जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) एक हाई रिस्क भूकंप जोन (High Risk Earthquake Zone) में आता है. ऐसे में यहां तीव्र भूकंप का डर बना रहता है. इतना ही नहीं जम्मू-कश्मीर के कुछ केंद्रीय भाग (central parts) तो वेरी हाई रिस्क भूकंप जोन में भी आते हैं. जहां पर बहुत अधिक तीव्रता के भूकंप आने का डर होता है. जम्मू-कश्मीर ऐसी भौगोलिक स्थिति (Geographical Condition) पर भी है, जहां अक्सर ही भूकंप आते रहते हैं.


वैज्ञानिकों ने हिंद महासागर के गर्म होने की दर का पता भूकंप के आंकड़ों से लगाया था
हाल ही में भूकंप से जुड़े एक रोचक शोध ने तब सुर्खियां बटोरी थीं, जब वैज्ञानिकों ने समुद्र की सहत पर भूकंप से होने वाली आवाज का विश्लेषण कर यह पता करने का अनूठा तरीका विकसित किया कि हिंद महासागर कितनी तेजी से गर्म हो रहा है. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस तरीके को और अधिक परिष्कृत करने से अपेक्षाकृत कम लागत पर सभी महासागरों के तापमान की निगरानी करने में मदद मिलेगी.



अमेरिका स्थित कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (कालटेक) सहित विभिन्न संस्थानों के अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक पृथ्वी पर मौजूद अतिरिक्त ऊष्मा का 95 प्रतिशत हिस्सा कार्बन-डाई-ऑक्साइड जैसी हरित गैसों के रूप में समुद्रों में मौजूद है. इसलिए समुद्र के पानी के तापमान की निगरानी करना महत्वपूर्ण है.

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साइंस नामक जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने मौजूदा भूकंप निगरानी उपकरणों के साथ-साथ भूकंप के ऐतिहासिक आंकड़ों का इस्तेमाल यह पता लगाने में किया कि महासागर के तापमान में कितना बदलाव आया है और यह कैसे बदल रहा है. यहां तक गहराई में मौजूद स्थानों के तापमान की जानकारी प्राप्त की गई जो पारंपरिक उपकरणों से संभव नहीं थी.
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