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कश्मीर में आतंकियों के निशाने पर वर्कर्स, घाटी में पलायन से मजदूरों की 'कमी'

रॉयटर्स
Updated: November 1, 2019, 6:29 PM IST
कश्मीर में आतंकियों के निशाने पर वर्कर्स, घाटी में पलायन से मजदूरों की 'कमी'
कश्मीर में आतंकियों के बढ़ते हमले के कारण बाहरी लोगों ने वहां से पलायन शुरू कर दिया है. प्रतीकात्मक फोटो

आतंकियों (Terrorists) ने पिछले मंगलवार को दक्षिणी कश्मीर (South Kashmir) में सेबों के बागान और खेतों में काम करने वाले छह मजदूरों को लाइन में खड़ा कर गोली मारकर हत्या कर दी. कुछ दिनों में कश्मीर में 11 मजदूरों की हत्या कर दी गई. इस कारण यहां से मजदूरों का बड़ी संख्या में पलायन शुरू हो गया है.

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श्रीनगर. पिछले कुछ दिनों में कश्मीर (Kashmir) में आतंकियों ने गैर कश्मीरी मजदूरों (Non Kashmir Workers) को जिस तरह अपनी गोली का निशाना बनाया है, उसके बाद घाटी में अब मजदूर की कमी हो गई है. घाटी में रोड संबंधी काम करने वाले, सेबों के बागान में काम करने वाले मजदूरों के अलावा होटलों और बिल्डिंग में काम करने वालों की अचानक कमी हो गई है. बाहरी लोगों ने कश्मीर से पलायन करना शुरू कर दिया है. पिछले मंगलवार को आतंकियों ने दक्षिणी कश्मीर में सेबों के बागान और खेतों में काम करने वाले छह मजदूरों को लाइन में खड़ा कर गोली मारकर हत्या कर दी.

बड़े हमले को करने में नाकाम रहे आतंकियों खिसियाकर अब बेकसूर मजदूरों और वर्करों को अपना निशाना बनाया है. दो सप्ताह में आतंकियों ने 11 लोगों की हत्या कर दी है. यूपी के रहने वाले विकास कुमार भारती उन लोगों में से हैं, जो डर और खौफ के साए में रह रहे हैं. वह इस समय श्रीनगर (Srinagar) की एक मल्टी स्टोरी कार पार्किंग में तैनात हैं. कॉन्टेक्ट के कारण विकास के अभी 20 दिन और बाकी हैं. वह कहते हैं कि वह इसके बाद यहां से चले जाएंगे. पिछले तीन दशक से कश्मीर इसी अशांति की आग में झुलस रहा है. 5 अगस्त के बाद एक बार फिर से कश्मीर में अशांति बढ़ रही है. हालांकि जब सरकार ने यहां पर कुछ प्रतिबंध लगाए उसके बाद से कोई आतंकी वारदात नहीं हुई. जैसे ही प्रशासन ने ढील देनी शुरू की, आतंकियों ने अपनी नापाक हरकतें शुरू कर दीं.

5 अगस्त को सरकार ने अनुच्छेद 370 के प्रावधान बदले
सरकार ने 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 के प्रावधानों में बदलाव कर जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म कर दिया. इसके साथ ही कश्मीर में पूरी तरह से शेष भारत की तरह नियम लागू हो गए. अब यहां पर कोई भी भारतीय जाकर बस सकता है और काम कर सकता है. सरकार ने इस अनुच्छेद को हटाते हुए कहा, इसके बाद कश्मीर भी विकास की धारा में शामिल हो सकेगा. लेकिन आतंकियों के इस तरह के हमले के बाद अब यहां पर बाहरी लोगों के अंदर भय का माहौल है. दिल्ली में एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया, कश्मीर में सामान्य हालात में सबसे बड़ी बाधा आतंकी और पाकिस्तान में बैठे उनके आका हैं. गरीब मजदूरों को जिस तरह कश्मीर में निशाना बनाया गया, वह कायराना हरकत है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कश्मीर में पिछले तीन दशक में हिंसा में 40 हजार लोग अपनी जान गंवा चुके हैं.

दूसरे राज्यों के मजदूरों पर टिकी है कश्मीर की अर्थव्यवस्था
कश्मीर की इकोनॉमी पूरी तरह से बाहर से आए मजूदरों और वर्करों पर टिकी है. ये वर्कर यहां पर खेती और कंस्ट्रक्शन का काम करते हैं. अगस्त में सरकार के आंकड़ों के अनुसार, कश्मीर में बाहरी मजदूरों की संख्या 5 लाख से घटकर 2 लाख हो चुकी है. गुरुवार 31 अक्टूबर से जम्मू कश्मीर और लद्दाख दो केंद्र शासित प्रदेश बन चुके हैं.

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First published: November 1, 2019, 5:54 PM IST
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