जम्मू कश्मीर में 2020 में पथराव की घटनाओं में 87.13 प्रतिशत गिरावट आई: DGP

जम्‍मू कश्‍मीर में पथराव की घटनाओं में गिरावट आई है.

Jammu and Kashmir: इससे पहले 2018 और 2017 में पथराव की क्रमश: 1,458 और 1,412 घटनाएं दर्ज की गयीं. अधिकारियों के अनुसार 2016 की पथराव की घटनाओं से तुलना करें तो 2020 में इस तरह की घटनाओं में 90 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी है.

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    जम्मू. जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में पिछले साल पथराव की घटनाओं में 2019 की तुलना में 87.13 प्रतिशत की कमी आई. पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने यह जानकारी दी. राज्य में 2019 में पथराव की 1,999 घटनाएं सामने आईं, जिनमें से 1,193 घटनाएं केंद्र द्वारा उस साल अगस्त में पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर राज्य के विशेष दर्जे को समाप्त किये जाने की घोषणा के बाद घटीं. डीजीपी ने कहा, '2019 की तुलना में 2020 में पथराव की 255 घटनाएं घटीं और इनमें 87.31 प्रतिशत की गिरावट आई है. इससे पहले 2018 और 2017 में पथराव की क्रमश: 1,458 और 1,412 घटनाएं दर्ज की गयीं. अधिकारियों के अनुसार 2016 की पथराव की घटनाओं से तुलना करें तो 2020 में इस तरह की घटनाओं में 90 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी है.

    पाकिस्तानी सेना ने शनिवार को जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास अग्रिम चौकियों पर भारी गोलीबारी की और मोर्टार दागे, जिसका भारतीय सेना ने भी करारा जवाब दिया. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. एक रक्षा प्रवक्ता ने बताया, 'आज शाम करीब 04:45 बजे पाकिस्तान की सेना ने राजौरी जिले के नौशेरा सेक्टर में नियंत्रण रेखा के पास छोटे हथियारों से गोलीबारी कर और भारी संख्या में मोर्टार दागकर संघर्ष विराम समझौते का उल्लंघन किया.' उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई की. प्रवक्ता ने बताया कि शुक्रवार को जेसीओ नायब सूबेदार रविंदर नौशेरा सेक्टर में पाकिस्तान द्वारा की गई गोलाबारी में घायल होने के बाद शहीद हो गए.

    आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि 2020 में जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर पाकिस्तान द्वारा संघर्ष विराम उल्लंघन के 5,100 मामले दर्ज किए गए. यह 18 वर्षों में सबसे अधिक है, जिसमें हर दिन औसतन 14 मामले दर्ज किए गए. इन गोलीबारी और गोलाबारी में 36 लोगों की मौत हो गई और 130 से अधिक घायल हुए. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तानी सैनिकों ने एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) के पास रह रहे लोगों के बीच भय का माहौल पैदा करने और सीमा रेखा पर शांति को अस्थिर करने के लिए बार-बार चौकियों और गांवों को निशाना बनाया.