सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- जम्मू-कश्मीर में आंतक फैलाने के लिए होता है इंटरनेट का इस्तेमाल, ये सुविधा मौलिक अधिकार नहीं

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- जम्मू-कश्मीर में आंतक फैलाने के लिए होता है इंटरनेट का इस्तेमाल, ये सुविधा मौलिक अधिकार नहीं
सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट में दलील- अगर इंटरनेट की स्पीड को 2G तक सीमित नहीं रखा गया तो फिर इसके इस्तेमाल फेक न्यूज़ (Fake News) और अफवाह फैलना के लिए किया जाएगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 30, 2020, 9:20 AM IST
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नई दिल्ली. केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir)  ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि उनके यहां आंतक फैलना के लिए इटंरनेट का इस्तेमाल किया जाता है. उनकी दलील है कि पाकिस्तान (Pakistan) के आंतकी संगठन आतंक को बढ़ावा देने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं. जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने साथ ही ये भी कहा है कि इंटरनेट का इस्तेमाल करना मौलिक अधिकार (Fundamental Rights) नहीं है इसलिए घाटी में 4G की सुविधा नहीं दे सकते हैं. बता दें कि घाटी में 2G इंटरनेट सेवा दिए जाने पर जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामा में ये दलीलें रखी है.

सरकार की दलील
प्रशासन ने ये भी कहा कि 'संविधान के तहत अभिव्यक्ति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के तहत व्यापार या व्यवसाय की हर किसी को छूट है. लेकिन राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के हित में इंटरनेट पर अंकुश लगाया जा सकता है. प्रशासन ने कोर्ट में ये भी कहा कि जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद से इंटरनेट पर पाबंदी लगा दी गई थी. लेकिन 10 जनवरी के बाद सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर छूट दी गई थी. लेकिन अगर इंटरनेट की स्पीड को 2G तक सीमित नहीं रखा गया तो फिर इसके इस्तेमाल फेक न्यूज़ और अफवाह फैलना के लिए किया जाएगा.

गलत इस्तेमाल होगा इंटरनेट का
जम्मू-कश्मीर के प्रमुख सचिव, शालीन काबरा द्वारा दायर हलफनामे में कहा गया है, 'पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन युवाओं को आतंकवाद में शामिल होने के लिए उकसाने की कोशिश कर रहा है. ये संगठन अलग-अलग मेसेजिंग एप का इस्तेमाल कर रहा है. लेकिन 2G इंटरनेट के चलते ये मैसेज नहीं भेज पा रहे हैं. इतना ही नहीं डेटा के इस्तेमाल से यहां के युवा फेसबुक और व्हाट्सएप का इस्तेमाल कर भीड़ इकट्ठा करने की कोशिश करते हैं. जिससे कई बार हिंसा भड़कने की आशंका रहती है.'



इंटरनेट नहीं है मौलिक अधिकार
बता दें कि इसी साल फरवरी में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले की व्याख्या कर, इंटरनेट के उपयोग को मौलिक अधिकार का दर्जा दिए जाने के बारे में स्थिति स्पष्ट करते हुए संसद में कहा था कि इंटरनेट का उपयोग संविधान के अंतर्गत मौलिक अधिकार नहीं है, बल्कि विचार अभिव्यक्ति का एक माध्यम मात्र है. कानून और संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राज्यसभा में प्रश्नकाल में एक सवाल के जवाब में कहा ‘यह भ्रम दूर करने की जरूरत है कि इंटरनेट के उपयोग को सुप्रीम कोर्ट ने मौलिक अधिकार घोषित किया है.’

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