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संकेत: जम्मू IAF स्टेशन पर लश्कर ने PAK सेना की मदद से किया था ड्रोन हमला

जम्मू और कश्मीर में एयरबेस पर ड्रोन से हमला हुआ था.(फाइल फोटो)

जम्मू और कश्मीर में एयरबेस पर ड्रोन से हमला हुआ था.(फाइल फोटो)

Jammu IAF Drone Attack: जम्मू में उच्च सुरक्षा वाले हवाई अड्डा परिसर स्थित वायुसेना स्टेशन में 27 जून देर रात ड्रोन का इस्तेमाल करते हुए विस्फोटक गिराये गए थे, जिसमें दो जवान मामूली रूप से घायल हो गए थे.

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    नई दिल्ली. जम्मू स्थित भारतीय वायु सेना स्टेशन पर अपनी तरह के पहले ड्रोन हमले के माध्यम से गिराए गए बमों में इस्तेमाल किए गए 'प्रेशर फ्यूज' से इस बात का संकेत मिलता है कि पाकिस्तानी सेना या आईएसआई के कुछ तत्वों ने आईईडी को बनाने में आतंकी समूह लश्कर-ए-तैयबा की मदद की थी. सुरक्षा सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी. उन्होंने कहा, 'जम्मू हवाई अड्डे पर वायुसेना की एक इमारत की छत को नुकसान पहुंचाने वाले इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) में एक किलो से भी कम आरडीएक्स और अन्य रसायनों का एक कॉकटेल था, जबकि जो आईईडी जमीन पर गिराया गया था, उसमें कुछ बॉल बेयरिंग के साथ एक किलो से थोड़ा अधिक घातक विस्फोटक था.'


    सूत्रों ने कहा कि भारतीय वायुसेना स्टेशन पर 27 जून के हमले में इस्तेमाल किए गए आईईडी में निश्चित रूप से पाकिस्तानी सेना की तकनीकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया गया है. आईईडी हमले में जिस तरह का 'प्रेशर फ्यूज' इस्तेमाल हुआ है, वह ठीक पाकिस्तानी सेना द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले फ्यूज के समान ही है. दरअसल, एक 'प्रेशर फ्यूज' का इस्तेमाल आम तौर पर बारूदी सुरंगों, टैंक रोधी बमों और वायु सेना द्वारा तोपखाने के गोले या आईईडी के विस्फोटक एवं मुख्य डेटोनेटर के बीच विमान के मुख्‍य भाग में गिराए जाने के लिए किया जाता है. विस्फोटक उपकरण या तो ताकत के साथ जमीन पर गिरने या फिर उसके ऊपर से गुजरने वाले किसी व्यक्ति या वाहन के दबाव से सक्रिय होते हैं.


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    सूत्रों ने कहा, हालांकि इन खास किस्म के आईईडी में, 'प्रेशर फ्यूज' को बमों के शुरुआती बिंदू पर रखा गया था ताकि वे जमीन पर गिरने के बाद एक ताकत के साथ विस्फोट कर सके. उन्होंने समझाते हुए कहा कि अधिकांश तोपखाने के गोले और मोर्टार बमों में इस प्रकार का फ्यूज होता है और इसीलिए वे हवा में नहीं फटते हैं, लेकिन जैसे ही उनके ऊपर दबाव पड़ता है उनमें विस्फोट हो जाता है. जम्मू-कश्मीर पुलिस के महानिदेशक दिलबाग सिंह ने पहले कहा था कि ड्रोन के माध्यम से जम्मू में भारतीय वायुसेना स्टेशन पर बमबारी के पीछे पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों के होने का संदेह था, जो शायद सीमा पार से आए होंगे.




    गौरतलब है कि जम्मू में उच्च सुरक्षा वाले हवाई अड्डा परिसर स्थित वायुसेना स्टेशन में 27 जून देर रात ड्रोन का इस्तेमाल करते हुए विस्फोटक गिराये गए थे, जिसमें दो जवान मामूली रूप से घायल हो गए थे. पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों का देश के किसी महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान पर इस तरह का यह पहला ड्रोन हमला है. पहला विस्फोट शनिवार देर रात एक बजकर 40 मिनट के आसपास हुआ, जबकि दूसरा उसके छह मिनट बाद हुआ. उन्होंने बताया कि इस बम विस्फोट में दो वायुसेना कर्मी घायल हो गए. उन्होंने बताया कि पहले धमाके में शहर के बाहरी सतवारी इलाके में भारतीय वायुसेना द्वारा संचालित हवाई अड्डे के उच्च सुरक्षा वाले तकनीकी क्षेत्र में एक मंजिला इमारत की छत को नुकसान हुआ, जबकि दूसरा विस्फोट छह मिनट बाद जमीन पर हुआ.


    (इनपुट पीटीआई से भी)

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