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कश्मीर के 3 जिले अब आतंकवाद से मुक्त, घाटी में लश्कर और जैश अपने अंत की ओर: ADGP

जम्मू में पाबंदियों के दौरान पहरा देते सेना के जवान. (पीटीआई फाइल फोटो)

जम्मू में पाबंदियों के दौरान पहरा देते सेना के जवान. (पीटीआई फाइल फोटो)

Jammu Kashmir Terrorist News: एडीजीपी ने कहा कि कश्मीर में इस समय 81 आतंकवादी हैं जिनमें से 29 स्थानीय हैं, जबकि 52 विद ...अधिक पढ़ें

श्रीनगर. कश्मीर के तीन जिले अब आतंकवाद मुक्त हो गए हैं. इतना ही नहीं, सुरक्षा बलों द्वारा लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और जैश-ए-मोहम्मद के गुर्गों व कमांडरों को खत्म करने के बाद दोनों आतंकी संगठन फिलहाल अपने पतन की ओर बढ़ रहे हैं. कश्मीर जोन के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) विजय कुमार के हवाले से डेली एक्सेलसियर अखबार ने बताया कि कश्मीर के तीन जिले बांदीपोरा, कुपवाड़ा और गांदरबल अब आतंकवाद से मुक्त हैं क्योंकि इन जिलों में कोई सक्रिय आतंकवादी नहीं है.

एडीजीपी ने कहा कि कश्मीर में इस समय 81 आतंकवादी हैं जिनमें से 29 स्थानीय हैं, जबकि 52 विदेशी मूल (पाकिस्तानी) के हैं. उन्होंने कहा कि जब आतंकवाद पर काबू पाने की बात आती है तो अब सुरक्षा बलों का पलड़ा भारी है. अधिकारी ने कहा, ‘हम निकट भविष्य में सक्रिय, विदेशी और हाइब्रिड उग्रवाद के आंकड़े को 50 से कम करने के लिए तेजी से काम कर रहे हैं.’

उन्होंने कहा कि अगले दो साल में सुरक्षा बल कश्मीर से आतंकवाद का सफाया कर देंगे. कुमार ने कहा कि सुरक्षा बलों द्वारा कई मुठभेड़ों और अभियानों में लश्कर और जैश के कई शीर्ष कमांडरों को खत्म करने के बाद अब दोनों आतंकी समूह नेतृत्वविहीन हो गए हैं. एडीजीपी ने कहा कि कश्मीर में लगभग 15 से 18 सक्रिय हाइब्रिड आतंकवादी थे. उन्होंने कहा कि इनमें से ज्यादातर दक्षिण कश्मीर के पुलवामा, शोपियां, कुलगाम और अनंतनाग जिलों के इलाकों में हैं. एडीजीपी कुमार ने कहा, ‘हमने इस साल 119 आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है.’

एक अधिकारी के हवाले से डेली एक्सेलसियर न्यूजपेपर ने बताया कि 2015 के बाद से हिजबुल मुजाहिदीन का शीर्ष ऑपरेटिव फारूक नल्ली एकमात्र सक्रिय कमांडर है और वह सुरक्षा बलों के रडार पर है. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि करीब दो साल पहले कश्मीर में 80 शीर्ष कमांडर सक्रिय थे, अब केवल तीन रह गए हैं. नल्ली के अलावा दो अन्य निष्क्रिय हैं.

पुलिस ने कहा कि सुरक्षा बलों के लिए कश्मीर में उनकी चिंता का मुख्य कारण यह है कि आतंकवादी हताशा में गैर-स्थानीय मजदूरों और कश्मीरी पंडितों जैसे आसान लक्ष्यों को निशाना बना रहे हैं. पुलिस ने कहा, ‘हालांकि, हमने यह सुनिश्चित किया है कि मजदूरों और पंडित समुदाय के सदस्यों को निशाना बनाने वालों को तुरंत बेअसर कर दिया जाए और यह भी कि उन्हें यथासंभव सुरक्षित नहीं रखा जाए.’

Tags: Jammu kashmir, Kashmir, Terrorist

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