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जम्मू-कश्मीर: घाटी का करीब 73 लाख वर्गफीट क्षेत्र अब ‘सामरिक इलाका’, सेना करेगी इसका इस्तेमाल

जम्मू-कश्मीर: घाटी का करीब 73 लाख वर्गफीट क्षेत्र अब ‘सामरिक इलाका’, सेना करेगी इसका इस्तेमाल

प्रतीकात्मक तस्वीर (ANI)

प्रतीकात्मक तस्वीर (ANI)

Jammu-Kashmir : प्रशासन ने जुलाई-2020 में 1971 का एक सर्कुलर भी वापस ले लिया था. उस सर्कुलर में सेना (Army) या अर्धसैनिक बलों के लिए किसी भी तरह के क्षेत्र का अधिग्रहण किए जाने से पहले जम्मू-कश्मीर गृह विभाग (Jammu-Kashmir’s Home Department) से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य किया गया था. जुलाई-2020 में ही प्रशासन ने जम्मू-कश्मीर के दो कानूनों में संशोधनों को भी मंजूरी दी थी. ये कानून हैं- जम्मू-कश्मीर विकास अधिनियम-1970 और कंट्रोल ऑफ बिल्डिंग ऑपरेशन एक्ट-1988. इन कानूनों की वजह से सेना सामरिक इलाकों (Strategic Areas) में कंस्ट्रक्शन आदि नहीं कर पाती थी.

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श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर प्रशासन (Jammu-Kashmir Administration) ने कश्मीर घाटी (Kashmir Valley) के करीब 73 लाख वर्गफीट क्षेत्र को ‘सामरिक इलाका’ (Strategic Area) घोषित कर दिया है. इस संबंध में बाकायदा अधिसूचना भी जारी की जा चुकी है. इस क्षेत्र का इस्तेमाल सेना अपने सामरिक अभियानों, तैयारी आदि के लिए करेगी.

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक जम्मू-कश्मीर प्रशासन (Jammu-Kashmir Administration) ने करीब 1,000 कनाल क्षेत्र को गुलमर्ग और 354 कनाल क्षेत्र को सोनमर्ग में ‘सामरिक इलाके’ के तौर पर अधिसूचित किया है. इसके साथ ही प्रशासन ने सेना से आग्रह किया है कि वह इस क्षेत्र को सामरिक आवश्यकताओं के मुताबिक इस्तेमाल कर सकती है.

इससे पहले प्रशासन ने जुलाई-2020 में 1971 का एक सर्कुलर भी वापस ले लिया था. उस सर्कुलर में सेना (Army) या अर्धसैनिक बलों के लिए किसी भी तरह के क्षेत्र का अधिग्रहण किए जाने से पहले जम्मू-कश्मीर गृह विभाग (Jammu-Kashmir’s Home Department) से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य किया गया था. जुलाई-2020 में ही प्रशासन ने जम्मू-कश्मीर के दो कानूनों में संशोधनों को भी मंजूरी दी थी. ये कानून हैं- जम्मू-कश्मीर विकास अधिनियम-1970 और कंट्रोल ऑफ बिल्डिंग ऑपरेशन एक्ट-1988. इन कानूनों की वजह से सेना सामरिक इलाकों (Strategic Areas) में कंस्ट्रक्शन आदि नहीं कर पाती थी. लेकिन इनमें संशोधन के बाद अब सेना को सामरिक इलाकों (Strategic Areas) में कंस्ट्रक्शन गतिविधियों की भी गुंजाइश दे दी गई है.

खबर के मुताबिक, इन संशोधनों के बाद सेना (Army) के लिए ‘सामरिक क्षेत्र’ (Strategic Area) अधिसूचित करने का यह कदम अपनी तरह का पहला है. हालांकि इसके साथ राज्य-प्रशासन ने सेना के लिए दो शर्तें भी लगाई हैं. पहली- वह अधिसूचित सामरिक क्षेत्र में ऐसा कोई काम नहीं करेगी, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचे. दूसरा- इन इलाकों में ऐसे कोई नियम-कायदे भी लागू नहीं करेगी, जो जम्मू-कश्मीर राज्य के कानूनों (Jammu-kashmir State’s Acts) का उल्लंघन करते हों.

राज्य प्रशासन के इस कदम की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) ने तीखी आलोचना की है. उन्होंने ट्विटर पर लिखा, ‘घाटी के प्रमुख पर्यटक स्थलों में हजारों कनाल का इलाका सेना को देने से साफ होता है कि भारत सरकार के इरादे ठीक नहीं है. वह घाटी को सैन्य छावनी में बदलना चाहती है. उसकी जमीन हड़पना चाहती है.’ कश्मीर घाटी (Kashmir Valley) के अन्य नेताओं ने भी इस कदम की आलोचना की है.

कनाल बनाम वर्गफीट

उत्तर भारत के कई इलाकों में जमीन की माप की एक इकाई कनाल भी होती है. इसका पैमाना हर राज्य में अलग-अलग होता है. और जम्मू-कश्मीर 1 कनाल करीब 5,445 वर्गफीट का बताया जाता है. इस हिसाब से 1,354 कनाल लगभग 73,72,530 वर्गफीट के बराबर होता है.

Tags: Army, Jammu and kashmir, Kashmir Valley

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