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बर्खास्त किए गए 6 कश्मीरी सरकारी कर्मचारी कैसे करते थे आतंकियों की मदद, जानें

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है.. (फाइल फोटो)

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है.. (फाइल फोटो)

जम्मू-कश्मीर प्रशासन (Jammu-Kashmir Administration) सरकारी कर्मचारियों के आतंकी कनेक्शन पर बेहद सख्त कार्रवाई कर रहा है. जुलाई में 15 और अब 6 सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त कर सरकार ने अपनी मंशा साफ कर दी है. सूत्र बताते हैं कि ये गिनती सैकड़ों में जा सकती है.

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श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में आतंकियों के साथ तार जुड़े होने के आरोप में 6 सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है. सूत्र बता रहे हैं कि इन मामलों को देखने वाली प्रशासन की एक हाई पावर्ड कमेटी ने पूरे मामले की तहकीकात में आरोपों को सही पाया और संविधान की धारा 311(2)(C) के तहत उनकी बर्खास्तगी की अनुशंसा कर दी है. समिति ने इन 6 कर्मचारियों के आतंकियों से तार जुड़े होने और उनके ओवर ग्राउंड वर्कर होने का पर्याप्त साक्ष्य पाया था.

आपको बता दें कि जुलाई, 2021 में भी 15 सरकारी कर्मचारियों को आतंकियों से तार जुड़े होने के आरोप साबित हो जाने के बाद बर्खास्त किया गया था और सरकार की इसी हाई पावर्ड कमिटी ने इसकी अनुशंसा की थी. खास बात ये है कि इस समिति के फैसले को कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती. एक अलग संघ शासित प्रदेश बनने के बाद शासन ने साफ कर दिया है कि आतंक के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलते रहेंगे.

लेफ्टिनेट गवर्नर मनोज सिन्हा ने भी हीलिंग टच देने के साथ-साथ आतंकियों को कड़ा संदेश जरूर दिया है कि आतंकियों को पनाह देने को बख्शा नहीं जाएगा और साथ ही ऐसे लोगों को भी नहीं बख्शा जाएगा जो सरकारी नौकरी तो करते हैं लेकिन मदद आतंकियों की करते हैं. इसलिए जुलाई में 15 और अब 6 सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त कर सरकार ने अपनी मंशा साफ कर दी है. सूत्र बताते हैं कि ये गिनती सैकड़ों में जा सकती है.

ये हैं अभी बर्खास्त किए गए कर्मचारी…

1) अब्दुल हामिद वाणी, बीजबेहारा, अनंतनाग, (शिक्षक) : आतंकी संगठन अल्लाह टाइगर का जिला कमांडर था जिसने बिना किसी चयन प्रक्रिया के जमात ए इस्लामी का असर दिखाते हुए शिक्षक की नौकरी पायी थी. बुरहान वाणी के एनकाउंटर के बाद चले प्रोग्राम का आयोजक था. अलगाववाद की ही बात करता था.

2) जफर हुसैन बट्ट : किश्तवाड़ का रहने वाला बट्ट कांस्टेबल था. उसे पुलिस ने गिरफ्तार किया था और एनआईए ने चार्जशीट की थी. सितंबर 2019 से बेल पर है. जांच में पाया गया कि उसने हिज्बुल के आतंकियों को ऑल्टो कार दी थी और उनको सुरक्षित तरीके से एक जगह से दूसरी जगह ले जाता था.

3) मुहम्मद रफी बट्ट : किश्तवाड़ निवासी बट्ट रोड और बिल्डिंग विभाग में जूनियर असिस्टेंट था. हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकियों को लॉजिस्टिक सपोर्ट देता था और आतंकी प्लान बनाने में मदद भी करता था. एनएईए की एफआईआर में नाम है.

4) लियाकत अली काकरु :  बारामुला निवासी शिक्षक. 1983 में नियुक्ति हुई. 2001 में इसे गिरफ्तार किया गया तब पाया गया कि ये स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित आतंकी है और इसके पास से विस्फोटक भी बरामद किए गए थे. 2002 में उसके पास से बड़ी मात्रा में हथियार बरामद किए गए थे. उसकी 2002 में गिरफ्तारी भी हुई लेकिन कोर्ट से बरी हो गया. 2021 में उसके पास फिर से ग्रेनेड बरामद हुए.

5) तारिक मोहम्मद कोहली, पुंछ निवासी, रेंज ऑफिसर, वन विभाग :  पुलिस के रिकॉर्ड में ओवर ग्राउंड वर्कर है आतंकियों का. गैरकानूनी शस्त्र, ड्रग्स, पाकिस्तान से आने वाली फेक करेंसी की तस्करी में लिप्त था. 2010 में गिरफ्तार हुआ.

6) शौकत अहमद खान, बडगाम निवासी, कांस्टेबल : एक पूर्व विधान पार्षद का पीएसओ था लेकिन उनके ही घर से हथियार लूटने की घटना में शामिल था. 2019 को पीएसए के तहत गिरफ्तार.

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