आर्टिकल 370 पर SC का जल्द सुनवाई से इनकार, पूछा- क्या UN बदलाव रोक सकता है?

वकील एमएल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट से से अपील की कि उनकी याचिका को 12 या 13 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए. जिस पर पीठ ने शर्मा से कहा कि इस याचिका पर सुनवाई उचित समय पर होगी.

News18Hindi
Updated: August 8, 2019, 2:17 PM IST
आर्टिकल 370 पर SC का जल्द सुनवाई से इनकार, पूछा- क्या UN बदलाव रोक सकता है?
आर्टिकल 370 पर SC का जल्द सुनवाई से इनकार
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Updated: August 8, 2019, 2:17 PM IST
जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 (Article 370) के प्रावधानों को निरस्त किए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया है. जस्टिस एनवी रमन्ना की अगुवाई वाली बेंच के सामने मामले का उल्लेख करते हुए उसे तत्काल सूचीबद्ध करने के लिए किया गया है.

इस दौरान सर्वोच्च अदालत ने संयुक्त राष्ट्र से जुड़ा एक सवाल भी पूछा. कोर्ट ने पूछा कि क्या संयुक्त राष्ट्र (यूएन) हमारे संविधान में किए गए बदलाव पर रोक लगा सकता है. बता दें कि केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाया है. वहीं लद्दाख को भी अलग केंद्र शासित प्रदेश बना दिया है.

याचिका दायर करने वाले वकील एमएल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी कि उनकी याचिका को 12 या 13 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए. जिस पर पीठ ने शर्मा से कहा कि इस याचिका पर सुनवाई उचित समय पर होगी. फिलहाल इस मामले में सुनवाई की तारीख तय नहीं हुई है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई अगली तारीख तय करेंगे और बताएंगे की याचिका पर सुनवाई कब होगी.

कांग्रेस नेता पूनावाला ने न्यायिक आयोग गठित की मांग

दूसरी ओर पूनावाला के वकील ने कहा कि राज्य की जनता अपने परिवार के सदस्यों से संपर्क स्थापित करना चाहती है और उन्हें वहां की मौजूदा स्थिति में अपने परिजनों का हालचाल जानने का अधिकार है. याचिका में पूनावाला ने नजरबंद पूर्व मुख्यमंत्रियों उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को रिहा करने का निर्देश देने की गुजारिश की है. इसके साथ उन्होंने राज्य के ताजा हालात का पता लगाने के लिये न्यायिक आयोग गठित करने की भी अपील की है.

कांग्रेस कार्यकर्ता की याचिका में कहा गया है कि सरकार द्वारा लिये गये फैसले से संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 में प्रदत्त मौलिक अधिकारों का हनन होता है. याचिका में यह भी कहा गया है कि केन्द्र द्वारा संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को हटाने का फैसला लिये जाने के बाद से राज्य में राजनीतिक दलों के अनेक नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है और राज्य को दो केन्द्र शासित प्रदेशों में बांट दिया गया है.

भारी बहुत से पास हुआ आर्टिकल 370 बिल
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Article 370 और 35 ए के साथ-साथ राज्य के पुनर्गठन का बिल संसद के दोनों सदन में बहुमत से पास हुआ था. बुधवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को रद करने की अनुमति दी. एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, 'भारत के संविधान के अनुच्छेद 370 के खंड (1) के साथ पढ़े गए अनुच्छेद 370 के खंड (3) द्वारा प्रदत्त शक्तियों के तहत, राष्ट्रपति, संसद की सिफारिश पर, 6 अगस्त से, यह घोषित करते हैं कि  2019 में, अनुच्छेद 370 के सभी खंड रद्द हो जाएंगे.'

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First published: August 8, 2019, 1:00 PM IST
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