अनुच्छेद-370 पर ऐतिहासिक फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर में खुलेगी विकास की राहें

अनुच्छेद-370 एक अस्थायी व्यवस्था थी. लद्दाख के लोग मना रहे हैं जश्न. आने वाला कुछ समय पुलिस और प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण होगा.

Rajesh Raina | News18Hindi
Updated: August 6, 2019, 11:42 AM IST
अनुच्छेद-370 पर ऐतिहासिक फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर में खुलेगी विकास की राहें
अनुच्छेद 370 पर ऐतिहासिक फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर में खुलेंगी विकास की राहें
Rajesh Raina
Rajesh Raina | News18Hindi
Updated: August 6, 2019, 11:42 AM IST
जम्मू-कश्मीर को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रही अटकलबाज़ियों का अंत हो गया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज सुबह राज्यसभा में अनुच्छेद-370 समाप्त करने की घोषणा की. आज़ादी के बाद सरकार के इस निर्णय को ऐतिहासिक फैसले के रूप में देखा जा रहा है. अनुच्छेद-370 को समाप्त किए जाने के बाद अब जम्मू-कश्मीर भारत संघ का पूर्ण हिस्सा बन गया है.

अनुच्छेद-370 एक अस्थायी प्रावधान था, जिसे भारत के संविधान में जोड़ा गया था. यह प्रावधान इस राज्य के भारत संघ में पूर्ण एकीकरण के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा था. कुछ क़ानूनी जानकार और कुछ कश्मीरी नेता यह प्रचारित कर रहे थे कि अनुच्छेद-370 की वजह से ही जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा है. इसके समाप्त हो जाने पर यह भारत का हिस्सा नहीं रह पाएगा.  इस तरह की बातों का कोई आधार नहीं है. जम्मू-कश्मीर 26 अक्टूबर, 1947 को भारत में शामिल होने के करार पर हस्ताक्षर के बाद भारत का अभिन्न हिस्सा बन गया न कि अनुच्छेद-370 की वजह से. अनुच्छेद-370 एक अस्थायी प्रावधान है और यह काफ़ी बाद में आया.

एक देश, एक संविधान,एक झंडा का मंत्र चलेगा
शेष भारत के साथ जम्मू-कश्मीर का एकीकरण लंबी अवधि में राज्य के लोगों के लिए फायदेमंद साबित होगा. इसके बाद अब राज्य में ज़्यादा निवेश हो पाएगा. राज्य में लोगों के लिए रोजगार के ज्यादा अवसर पैदा होंगे. इन बातों के अलावा कश्मीरियों का देश के अन्य राज्यों के लोगों के साथ संवाद बढ़ेगा. इससे आइडिया ऑफ इंडिया मजबूत होगा. अनुच्छेद-370 को समाप्त किए जाने के बाद ‘एक देश, एक संविधान और एक झंडा’ इस देश का मंत्र होगा, जिसको मज़बूत करने में जम्मू-कश्मीर के लोगों की अहम व सकारात्मक भूमिका होगी.

सरकार के इस निर्णय का कश्मीर घाटी के वर्तमान हालात पर भी असर होगा


इस निर्णय का कश्मीर घाटी के वर्तमान हालात पर भी असर होगा. यहां के युवाओं को अब नए कश्मीर में ज्यादा से ज्यादा रोजगार के अवसर मिलेंगे. इससे वे मुख्यधारा का हिस्सा होंगे और अपने परिवार के लिए खुद रोजी-रोटी कमाएंगे न कि बंदूक थामेंगे. इसके बाद राज्य में भ्रष्टाचार भी कम हो जाएगा, क्योंकि राज्य के अधिकारियों का उत्तरदायित्व कई गुना बढ़ेगा जो वर्तमान में काफी कम है.

 लद्दाख में जश्न
Loading...

आने वाले दिनों में राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि तरजीही दर्जा के साथ राज्य के लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं. कश्मीर के लोग महसूस करते हैं कि यह उनकी पहचान पर प्रत्यक्ष हमला है. जम्मू और लद्दाख के लोग हमेशा से अनुच्छेद-370 को खत्‍म किए जाने के पक्ष में थे. लद्दाख को अलग केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा दिए जाने के बाद क्षेत्र के लोग जश्न मना रहे हैं. वे इसकी काफी अरसे से मांग कर रहे थे. इस मुद्दे पर क्षेत्रीय विभाजन भी था. जम्मू क्षेत्र के लोग भी अलग राज्य की मांग कर रहे थे. अब जम्मू-कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश बनाने के बाद वे लोग भी खुश होंगे.

पुलिस-प्रशासन के लिए चुनौती
अभी कश्मीरी लोगों में इसको लेकर नाराजगी है. इस स्थिति के समाप्त होने में वक्त लगेगा. अगले कुछ सप्ताह प्रशासन और पुलिस के लिए चुनौतियों भरे होंगे, लेकिन जब हिंसा की आशंका सबसे ज्यादा थी उस शुरुआती समय में सरकार ने स्थिति को काफी अच्छी तरह संभाला है.

कश्मीर के लोगों ने 30 साल के आतंकवाद के दौर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं. उन्होंने इन परिस्थितियों का बहादुरी से सामना किया है. उम्मीद है कि इस बार भी उनमें से अधिसंख्य कश्मीर में शांति चाहते हैं. इसलिए वे इस स्थिति का बहादुरी से सामान करेंगे और उन्हें करारा जवाब देंगे जो घाटी में अशांति फैलाना चाहते हैं.

ये भी पढ़ें- राज्यसभा में पीडीपी सांसदों ने फाड़े कपड़े, धरने पर बैठे गुलाम नबी आजाद

संविधान की प्रति फाड़ने वाले पीडीपी नेताओं की छीनी जा सकती है नागरिकता

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: August 5, 2019, 6:06 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...