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PDP में बढ़ते अंतर्कलह के बीच जम्मू-कश्मीर के भविष्य पर एक नजर

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और महबूबा मुफ्ती की फाइल फोटो

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और महबूबा मुफ्ती की फाइल फोटो

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 87 सदस्य हैं यानी सरकार बनाने के लिए कम से कम 44 सदस्यों का समर्थन जरूरी है. फिलहाल यहां गठबंधन की ही सरकार बन सकती है, क्योंकि किसी भी पार्टी के पास पूर्ण बहुमत नहीं है.

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    सुहास मुंशी

    पीडीपी के भीतर प्रत्यक्ष विरोध और पार्टी प्रमुख के तौर पर महबूबा को हटाने की धमकी के बीच राज्य की विधानसभा की स्थिति को लेकर कयास लगने शुरू हो गए हैं. 'न्यूज18' विधानसभा में सदस्यों की संख्या, संभावनाओं और राज्य के दल बदल निरोधक कानून पर चर्चा कर रहा है.

    जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 87 सदस्य हैं यानी सरकार बनाने के लिए कम से कम 44 सदस्यों का समर्थन जरूरी है. फिलहाल यहां गठबंधन की ही सरकार बन सकती है, क्योंकि किसी भी पार्टी के पास पूर्ण बहुमत नहीं है.

    यहां 28 विधायकों के साथ पीडीपी सबसे बड़ी पार्टी है, इसके बाद 25 विधायकों के साथ बीजेपी दूसरी बड़ी पार्टी है. नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास 15 और कांग्रेस के पास 12 विधायक हैं. यहां सज्जाद लोनी की पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के दो, सीपीएम का एक, पीडीएफ का एक और तीन निर्दलीय विधायक हैं.

    यहां 2014 में हुए चुनाव के बाद दो सबसे बड़ी पार्टियों यानी बीजेपी और पीडीपी ने गठबंधन की सरकार खड़ी की थी. इस साल 19 जून को बीजेपी ने खुद को इस गठबंधन से अलग कर लिया. पीडीपी के संस्थापक मुफ्ती मोहम्मद सईद ने इस गठबंधन को उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों का मेल बताया था.

    पहले नंबरों पर बात करते हैं
    बीजेपी जम्मू-कश्मीर में एक मात्र पार्टी है, जिसने सरकार बनाने की इच्छा जाहिर की थी. वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस जैसी पार्टियों ने गठबंधन में शामिल होने से इनकार कर दिया था. दोनों ही पार्टियों ने राज्यपाल एनएन वोहरा से सदन को भंग कर चुनाव आयोजित करवाने की मांग की थी.

    गठबंधन से बीजेपी के अलग होने के 10 दिन बाद ही जम्मू-कश्मीर के पूर्व डिप्टी सीएम कविंदर गुप्ता ने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि अभी कोई सरकार बनने वाली है. संशय की स्थिति बनी हुई है, लेकिन हम रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं और लोगों को इस बारे में बता चल जाएगा.' उनके इस बयान के बाद विपक्ष के नेता उमर अब्दुल्ला ने बीजेपी पर हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप लगाए हैं.


    'न्यूज 18' से बातचीत में गुप्ता ने कहा, 'आने वाले दिनों में मुझे लगता है कि पीडीपी ही नहीं कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के असंतुष्ट विधायक एक हो जाएंगे और नया फ्रंट बना लेंगे.'

    बीजेपी के महासचिव राम माधव ने हाल ही में सज्जाद लोनी की घर पर अपनी और अन्य बीजेपी नेताओं की फोटो ट्वीट की थी. इसके बाद से ही अन्य पार्टियों के नाराज विधायकों के नए मोर्चे को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं.

    अब बात करतें हैं संभावनाओं पर
    तो यदि बीजेपी जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने के लिए गंभीर है तो उसे कितने और विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी?

    पार्टी को बहुमत का आंकड़ा छूने के लिए 19 और विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है. लेकिन पीपुल्स कॉन्फ्रेंस की तरफ से मिल रहे लगातार समर्थन को देखते हुए लगता है कि पार्टी के दो विधायक बीजेपी के साथ खड़े होंगे. ऐसे में बीजेपी को 17 और विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी.

    बीजेपी को किसी और पार्टी से समर्थन मिलने की संभावना बेहद कम है. ऐसे में बीजेपी के पास सत्ता में आने के लिए एकमात्र रास्ता यह बचता है कि वह पीडीपी के नाराज विधायकों को जोड़कर यह नंबर जुटाए.


    'न्यूज 18' से बातचीत में पीडीपी के बागी विधायक आबिद अंसारी ने दावा किया है कि पार्टी में कई और विधायक बागी हो रहे हैं. नाम न छापने की शर्त पर बीजेपी के एक विधायक ने बताया, 'इस विधानसभा का टर्म पूरा करने के लिए अभी भी ढाई साल का वक्त बचा है. कोई भी इतने लंबे समय तक सत्ता से दूर नहीं रहना चाहेगा. हम इसी पर फोकस कर रहे हैं.'

    हालांकि, किसी को भी यह नहीं पता है कि पीडीपी के कितने विधायक बागी हो रहे हैं. बीजेपी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अगस्त में अमरनाथ यात्री पूरी होने के बाद पार्टी बड़ी घोषणा करने की उम्मीद कर रही है.

    एंटी डिफेक्शन लॉ (दल बदल निरोधक कानून)
    देश के अन्य राज्यों में लागू एंटी डिफेक्शन लॉ के तहत यदि किसी पार्टी की निर्वाचित प्रतिनिधियों में से एक तिहाई या उससे कम पार्टी व्हिप के खिलाफ जाते हैं तो वे अयोग्य घोषित कर दिए जाते हैं यानी उनकी विधायकी चली जाती है.

    हालांकि, जम्मू-कश्मीर में यह कानून अधिक सख्त है. राज्य के एंटी डिफेक्शन लॉ के तहत यदि सभी विधायक भी पार्टी व्हिप के खिलाफ जाते हैं तो वे सभी अयोग्य घोषित कर दिए जाएंगे. प्रतिनिधि के डिफेक्ट होने पर (सदन में पार्टी के खिलाफ जाने पर) पार्टी व्हिप विधानसभा अध्यक्ष के पास उस प्रतिनिधि को अयोग्य घोषित करने की याचिका लगाती है.


    संवैधानिक एक्सपर्ट सुभाष कश्यप कहते हैं, "मुझे नहीं लगता कि सरकार बनाने में कोई समस्या आएगी. यदि किसी भी पार्टी के बागी विधायक बीजेपी को समर्थन देने का फैसला करते हैं तो वे ऐसा कर सकते हैं. इसके बाद यह मामला विधानसभा अध्यक्ष के पास जाएगा और बागी विधायक के खिलाफ अर्ध न्यायिक प्रक्रिया शुरू होगी. जैसा कि अब तक हुआ है विधानसभा अध्यक्ष ऐसे विधायकों के खिलाफ कार्रवाई में कई महीने और साल लगा सकते हैं. इसके चलते अंतरिम सरकार अपना कार्यकाल आसानी से पूरा कर लेगी."

    सदन के वर्तमान स्पीकर बीजेपी विधायक और पूर्व डिप्टी सीएम निर्मल सिंह हैं.

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