अमित शाह ने कहा-संवैधानिक है आर्टिकल 370 हटाना, कश्मीर और PoK के लिए दे सकते हैं जान

कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने संकल्प पेश किए जाने का विरोध करते हुए पूछा कि 1948 से संयुक्त राष्ट्र राज्य संबंधी निगरानी कर रहा है, यह बुनियादी सवाल है और सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए.

News18Hindi
Updated: August 6, 2019, 1:48 PM IST
अमित शाह ने कहा-संवैधानिक है आर्टिकल 370 हटाना, कश्मीर और PoK के लिए दे सकते हैं जान
गृहमंत्री अमित शाह
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Updated: August 6, 2019, 1:48 PM IST
मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर को स्पेशल स्टेटस देने वाले संविधान के आर्टिकल 370 को खत्म कर दिया है. गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार को लोकसभा में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल 2019 पेश किया. इसे लेकर सदन में विपक्ष का घमासान शुरू हो गया. अमित शाह और कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी के बीच तीखी नोक-झोंक हुई. चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार ने रातों-रात नियम कायदों को ताक पर रखकर जम्मू-कश्मीर के टुकड़े कर दिए. इसे केंद्र शासित प्रदेश बना दिया. उन्होंने कहा कि आर्टिकल 370 हटाना संवैधानिक नहीं है, क्योंकि इसपर संयुक्त राष्ट्र मॉनिटर कर रही है. जिसके बाद अमित शाह ने विपक्ष को जोरदार जवाब दिया.

अमित शाह ने कहा- कश्मीर और पीओके भारत का अभिन्न अंग
गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि क्या कांग्रेस PoK (पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर) को भारत का हिस्सा नहीं मानती है, हम इसके लिए जान देने को तैयार हैं. उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर का मतलब Pok और अक्साई चिन से भी है, क्योंकि इसमें दोनों समाहित हैं. गृहमंत्री ने कहा कि आज के प्रस्ताव और बिल भारत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखे जाएंगे. यह महान सदन इस पर विचार करने जा रहा है.

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विपक्ष न दे जनरल स्टेटमेंट
अधीर रंजन चौधरी के बयान पर अमित शाह भड़क गए. उन्होंने कहा कि सरकार ने कौन सा नियम तोड़ा है अधीर रंजन ये बताएं, सरकार उसका जवाब देगी. अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस नेता को जनरल स्टेटमेंट नहीं देना चाहिए. इसके जवाब में अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि आपने अभी कहा कि कश्मीर अंदरूनी मामला है, लेकिन यहां अभी भी संयुक्त राष्ट्र 1948 से मॉनिटरिंग करता आ रहा है. इसपर शाह ने पूछा कि क्या कांग्रेस यही चाहती है कि कश्मीर पर यूएन मॉनिटरिंग करे?



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जम्मू-कश्मीर को लेकर राष्ट्रपति का ऑर्डर


विपक्ष को जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा- 'यह पॉलिटिकल चीज नहीं है. यह कानूनी विषय है. जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, इस बारे में कोई कानूनी विवाद नहीं है. भारत और जम्मू-कश्मीर के संविधान में बहुत साफ है कि वह भारत का अभिन्न अंग है. जम्मू-कश्मीर में संविधान के आर्टिकल 1 के सारे आर्टिकल लागू हैं. इसमें साफ लिखा है कि भारत एक सभी राज्यों का संघ है.'

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राष्ट्रपति का आदेश संवैधानिक
अमित शाह ने कहा कि राष्ट्रपति ने कल एक संवैधानिक आदेश जारी किया है, जिसके तहत भारत के संविधान के सारे अनुबंध जम्मू कश्मीर में लागू होंगे. साथ ही जम्मू कश्मीर को मिलने वाले विशेष अधिकार भी नहीं रहेंगे और पुनर्गठन का बिल भी लेकर आया हूं.

लद्दाख में समाहित होगा अक्साई चिन
अमित शाह ने कहा कि बहुत लंबे समय से लद्दाख क्षेत्र की मांग थी कि वहां केंद्रशासित राज्य बनाया जाए, जिसमें अक्साई चिन भी समाहित होगा. इसमें पर्वतीय परिषदों के प्रमुख को मंत्री का दर्जा होगा. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर भी केंद्रशासित प्रदेश होगा, जहां मुख्यमंत्री होगा और विधानसभा होगी.



AMIT SHAH
लोकसभा में बोलते अमित शाह


विपक्ष ने उठाए ये सवाल
कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने संकल्प पेश किए जाने का विरोध करते हुए पूछा कि 1948 से संयुक्त राष्ट्र राज्य संबंधी निगरानी कर रहा है, यह बुनियादी सवाल है और सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए. उन्होंने शिमला समझौते, लाहौर समझौते को लेकर भी सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में तीन पूर्व मुख्यमंत्री नजरबंद हैं. अमरनाथ यात्रा को क्यों बंद किया गया है? जम्मू-कश्मीर को जेलखाना बना दिया गया है.

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देश में अघोषित आपातकाल- डीएमके
वहीं, डीएमके के टीआर बालू ने कहा कि देश में अघोषित आपातकाल की स्थिति है. लोकसभा के सदस्य फारूक अब्दुल्ला कहां हैं, पता नहीं. वह नजरबंद हैं या गिरफ्तार किए गए हैं? हमें इस बारे में जानकारी क्यों नहीं दी जा रही है. अगर हम इस बिल पर वोटिंग का हिस्सा बनते हैं तो हम भी इसके लिए भागीदारी होंगे और इस वजह से हमने इसके खिलाफ वॉक आउट का फैसला किया है.

(PTI इनपुट के साथ)
First published: August 6, 2019, 12:55 PM IST
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