J&K: पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेता सज्जाद लोन रिहा, 370 हटने के बाद से थे नजरबंद

J&K: पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेता सज्जाद लोन रिहा, 370 हटने के बाद से थे नजरबंद
पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेता सज्जाद लोन रिहा

सरकार ने 5 अगस्‍त 2019 को जम्‍मू-कश्‍मीर (Jammu Kashmir) में अनुच्छेद 370 (Article-370) के प्रावधान खत्म किए थे. इस दौरान सरकार ने वहां के तमाम नेताओं को हिरासत में ले लिया था. उस समय सज्‍जाद लोन (Sajad Lone) के अलावा जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah), महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti), फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) और कई अन्य राजनेताओं को भी हिरासत में लिया गया था.

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श्रीनगर. जम्‍मू-कश्‍मीर (Jammu Kashmir) पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेता सज्‍जाद लोन (Sajad Lone) को शुक्रवार को हिरासत से रिहा कर दिया गया है. लोन ने खुद ही ट्वीट कर रिहा होने की जानकारी दी. पिछले साल अनुच्‍छेद 370 (Article-370) खत्‍म करने के साथ ही 5 अगस्त 2019 से सज्जाद लोन नजरबंद थे. सज्‍जाद लोन और अन्‍य लोगों को पहले एमएलए हॉस्‍टल में रखा गया फिर उन्‍हें फरवरी महीने में सरकारी आवास में शिफ्ट कर दिया गया. सज्‍जाद लोन ने ट्वीट किया, 'आखिरकार, एक वर्ष पूरे होने से 5 दिन पहले मुझे आधिकारिक रूप से बताया गया कि अब मैं आजाद हूं. काफी कुछ बदल गया है. मेरे लिए जेल नया अनुभव नहीं था. पहले की जेल में शारीरिक यातनाएं दी गई थीं, लेकिन इस बार मनोवैज्ञानिक रूप से परेशान किया गया. उम्‍मीद है कि जल्‍द ही काफी कुछ शेयर करूंगा.'

सरकार ने 5 अगस्‍त 2019 को जम्‍मू-कश्‍मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधान खत्म किए थे. इस दौरान सरकार ने वहां के तमाम नेताओं को हिरासत में ले लिया था. उस समय सज्‍जाद लोन के अलावा जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, फारूक अब्दुल्ला और कई अन्य राजनेताओं को भी हिरासत में लिया गया था. पिछले दिनों अन्‍य नेताओं को भी हिरासत से रिहा किया गया जिसमें फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्‍दुल्‍ला समेत कई नेता शामिल हैं. हालांकि महबूबा मुफ्ती समेत कई नेता अभी भी हिरासत में ही हैं. उन्‍होंने रिहाई के लिए कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है.

राज्य का दर्जा बहाल होने तक जम्मू-कश्मीर में विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ूंगा : उमर अब्दुल्ला
अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश में बदले जाने से नाराज पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वह राज्य का दर्जा बहाल होने तक विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे. अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्र में मंत्री रह चुके उमर ने हालांकि यह स्पष्ट कर दिया कि वह अपनी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस और जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए काम करते रहेंगे. उमर (50) ने कहा, 'मैं राज्य की विधानसभा का नेता रहा हूं. अपने समय में यह सबसे मजबूत विधानसभा थी. अब यह देश की सबसे शक्तिहीन विधानसभा बन चुकी है और मैं इसका सदस्य नहीं बनूंगा.'
उन्होंने कहा, 'यह कोई धमकी या ब्लैकमेल नहीं है, यह निराशा का इजहार नहीं है. यह एक सामान्य स्वीकारोक्ति है कि मैं इस तरह की कमजोर विधानसभा, केंद्रशासित प्रदेश की विधानसभा का नेतृत्व करने के लिए चुनाव नहीं लड़ूंगा.' संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को निरस्त किए जाने के मुखर आलोचक उमर ने कहा कि विशेष दर्जा खत्म करने के लिए कई कारण गिनाए गए थे, और दावा किया कि उनमें से किसी भी तर्क की कोई जांच नहीं की गयी. नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष ने पिछले साल पांच अगस्त को विशेष दर्जा देने वाले प्रावधानों को निरस्त किए जाने की आलोचना की थी और कहा था कि उनकी पार्टी उच्चतम न्यायालय में इसका विरोध करेगी.



उन्होंने कहा, 'हम लोकतंत्र में और शांतिपूर्ण विपक्ष में विश्वास रखते हैं.' विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने के अपने फैसले पर उन्होंने अपनी पार्टी के भीतर चर्चा की है क्या, इस बारे में पूछे जाने पर उमर ने कहा, 'यह मेरी निजी राय है और यह मेरा फैसला है. मेरी इच्छा के विरूद्ध कोई भी चुनाव लड़ने के लिए मुझ पर जोर नहीं डाल सकता.' जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा परिसीमन कवायद के बारे में पूछे जाने पर उमर ने कहा, 'नेशनल कॉन्फ्रेंस पिछले साल पांच अगस्त के बाद के घटनाक्रम और फैसलों को चुनौती देने के लिए सभी कानूनी विकल्पों को खंगाल रही है और आगे भी यही करेगी.' परिसीमन प्रक्रिया के बाद ही केंद्रशासित प्रदेश में चुनाव हो पाएंगे. पिछले साल जम्मू-कश्मीर को दो केंद्रशासित प्रदेश में बांट दिया गया था.
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