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केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया, पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत हिरासत में हैं फारूक अब्दुल्ला

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला को पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत हिरासत में रखा गया है

केंद्र ने बताया कि जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला (Farooque Abdullah) को पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत हिरासत में रखा है. बता दें कि इस एक्ट के तहत बिना सुनवाई के दो साल तक हिरासत में रखा जा सकता है.

  • News18Hindi
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    नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में अनुच्छेद 370 (Article 370) हटाए जाने के बाद लगाई गई पाबंदियों के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सोमवार को अहम सुनवाई हो रही है. इस दौरान केंद्र सरकार की तरफ से बताया कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) को हिरासत में रखा गया है. केंद्र ने बताया कि अब्दुल्ला को पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) के तहत हिरासत में रखा है. बता दें कि इस एक्ट के तहत बिना सुनवाई के दो साल तक किसी को भी हिरासत में रखा जा सकता है. बता दें कि पब्लिक सेफ्टी एक्ट पहली बार फारूक अब्दुल्ला के पिता शेख अब्दुल्ला के कार्यकाल में लगाया गया था.

    एमडीएमके के नेता वाइको की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या अब्दुल्ला किसी प्रकार की हिरासत में हैं? इस पर वाइको के वकील ने कोर्ट को बताया, 'केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा है कि फारूक अब्दुल्ला किसी प्रकार की हिरासत में नहीं है, लेकिन हमें उनका पता ठिकाना मालूम नहीं है.' इस पर अदालत ने केंद्र और जम्मू-कश्मीर को नोटिस जारी करते हुए 30 सितंबर तक जवाब मांगा है.

    अब्दुल्ला के घर को घोषित किया सब्सिडियरी जेल
    एमडीएमके के नेता वाइको की तरफ से वकील ने कोर्ट को बताया कि अब्दुल्ला के घर को सब्सिडियरी जेल घोषित कर दिया गया है. उन्हें अभी घर पर ही रहना होगा. हालांकि, इस दौरान दोस्त और रिश्तेदार उनसे मिल सकते हैं. हाल ही में कोर्ट ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसदों को फारूक अब्दुल्ला और उनके बेटे उमर अब्दुल्ला से मिलने की इजाजत दी थी. हालांकि, प्रतिबंधों के कारण वो मीडिया से बात नहीं कर पाए थे.

    राज्यसभा सदस्य वाइको फारूक अब्दुल्ला को करीबी दोस्त बताते हैं. वाइको ने अब्दुल्ला को पिछले चार दशक पुराना दोस्त बताते हुए कहा कि उन्हें अवैध तरीके से हिरासत में लेकर संवैधानिक अधिकारों से वंचित किया गया है. याचिका में कहा गया है कि उत्तरदाताओं (केंद्र और जम्मू-कश्मीर) की कार्रवाई पूरी तरह से अवैध और मनमानी है. यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के खिलाफ है जो लोकतांत्रिक देश की आधारशिला है.


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    अब्दुल्ला की हिरासत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन

    वाइको की याचिका में कहा गया है. 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का लोकतंत्र में सर्वोपरि महत्व है, क्योंकि यह अपने नागरिकों को प्रभावी ढंग से देश के शासन में भाग लेने की अनुमति देता है.' वाइको ने कहा कि उन्होंने 29 अगस्त को अधिकारियों को इस आशय का पत्र लिखा है कि वह अब्दुल्ला को चेन्नई जा कर सम्मेलन में हिस्सा लेने की अनुमति दें, लेकिन इसका उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया. उन्होंने बताया कि उन्होंने चार अगस्त को फोन पर अब्दुल्ला से बातचीत की थी और जम्मू- कश्मीर के इस पूर्व मुख्यमंत्री को 15 सितंबर को आयोजित होने वाले कार्यक्रम में शामिल होने का न्यौता दिया था.

    5 अगस्त से हैं नज़रबंद
    बता दें कि फारूक अब्दुल्ला बीते 5 अगस्त से नज़रबंद हैं. इसी दिन सरकार ने जम्मू-कश्मीर से संविधान के आर्टिकल 370 को रद्द किया था. साथ ही लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग कर दो केंद्रशासित प्रदेश में बांट दिया था.

    आर्टिकल 370 हटाने का किया था विरोध
    जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार के इस फैसले को असंवैधानिक करार दिया था. उन्होंने घाटी में नेताओं को नजरबंद किए जाने पर भी सरकार के खिलाफ हल्लाबोला था. उन्होंने कहा था, 'हम कोर्ट जाएंगे, यह पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है. हम पत्थरबाज और ग्रेनेडबाज नहीं हैं. वो हमें मारना चाहते हैं. मेरा बेटा जेल में है. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि जब मेरा राज्य जलाया जा रहा और लोगों को जेल में डाला जा रहा है, तब मैं क्यों अपने घर में रहूंगा.'

     

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