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जपजी साहब : गुरु नानकजी की जोत का 19 भाषाओं में अनुवाद

भाषा
Updated: October 13, 2019, 5:05 PM IST
जपजी साहब : गुरु नानकजी की जोत का 19 भाषाओं में अनुवाद
गुरूनानक देव जी की वाणी 'एक ओंकार सत नाम.....’ जपजी साहिब का दुनिया की 19 भाषाओं में अनुवाद

सिख धर्म इंटरनेशनल (SDI) ने दुनियाभर में बसे अपने सदस्यों के सहयोग से गुरु नानक देव जी की मूल वाणी ‘जपजी साहब’ (Japji Sahib) के अंग्रेजी और विश्व की अन्य 18 भाषाओं में अनुवाद की व्यवस्था की है.

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नई दिल्ली. दुनिया को एक सूत्र में पिरोने का संदेश देने वाली गुरु नानक देव जी की वाणी 'एक ओंकार सत नाम.....’ जपजी साहिब का दुनिया की 19 भाषाओं में अनुवाद किया गया है और गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के मौके पर अमृतसर में श्री हरमंदिर साहिब के संग्रहालय को सौंपा जाएगा. सिख धर्म इंटरनेशनल (एसडीआई) ने दुनियाभर में बसे अपने सदस्यों के सहयोग से गुरु नानक देव जी की मूल वाणी ‘जपजी साहब’ के अंग्रेजी और विश्व की अन्य 18 भाषाओं में अनुवाद की व्यवस्था की है.

जपजी साहिब - द लाइट आफ गुरु नानक फॉर द वर्ल्ड शीर्षक की इन किताबों के कलर प्रिंट पर गुरु नानक देव जी का चित्र है, जिसके चारों ओर एक ओंकार का पवित्र चिह्न है. चांदी के आवरण पर सुंदर बेल बूटे बनाए गए हैं और इसे मोती तथा कीमती नगों से सजाया गया है. प्रत्येक किताब के 400 पन्नों को बहुत कलात्मक अंदाज में तैयार किया गया है और इसके किनारों पर उस देश के फूलों के चित्र उकेरे गए हैं, जिस देश की भाषा में इसका अनुवाद किया गया है.

अमेरिका में 1973 में स्थापित एसडीआई से संबद्ध शांति कौर खालसा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के अवसर पर जपजी साहब की ये प्रतियां दुनियाभर में फैले सिख समुदाय के सदस्यों की तरफ से अमृतसर में श्रीहरमंदिर साहब स्थित संग्रहालय को सौंपी जाएंगी.

उन्होंने कहा कि इस प्रयास के जरिए हम चाहते हैं कि हमारी आने वाली पीढ़ियां ‘जपजी साहब’ के अर्थ की गहराई और इसकी शिक्षाओं को सही तरीके से समझकर अपने जीवन में आत्मसात कर सकें. उन्होंने बताया कि गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के मौके पर सिख धर्म द्वारा एक विशाल यात्रा का भी आयोजन किया जा रहा है जिसमें अन्य लोगों के अलावा अमेरिका, कनाडा, मेक्सिको, ब्राजील, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, ब्रिटेन, इटली और एस्तोनिया से करीब 100 लोगों के भाग लेने की संभावना है.

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा ने जपजी साहब की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह गुरु नानक देव जी की मूल वाणी है और गुरु ग्रंथ साहिब की शुरुआत भी जपजी साहब से ही होती है. यह वाणी सिख धर्म की मर्यादा के अनुसार रोजाना पढ़ी जाने वाली पांच वाणियों में भी प्रथम वाणी है.

उन्होंने जपजी साहब के दुनिया की 19 भाषाओं में अनुवाद को एक सराहनीय कदम करार देते हुए कहा कि गुरु नानक जी का संदेश या उपदेश किसी एक धर्म या संप्रदाय के लिए नहीं है. वह तो सारी दुनिया को एक सूत्र में पिरोने का संदेश देते हुए पूरी मानवता के कल्याण की कामना करते हैं.

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First published: October 13, 2019, 12:34 PM IST
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