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चश्मदीद ने बताई रोहतक में लूट, बर्बादी और दहशत की कहानी

चश्मदीद ने बताई रोहतक में लूट, बर्बादी और दहशत की कहानी

एक चश्मदीद दीपक ने बताया कि किस तरह रोहतक में आंदोलनकारी उपद्रवी में तब्दील हो चुके हैं और लूटपाट को अंजाम दे रहे हैं। पढ़ें उन्हीं की जुबानी रोहतक की कहानी-

    रोहतक। जाट आरक्षण को लेकर हरियाणा जल रहा है। प्रदर्शनकारियों के चलते तमाम शहर ठहर गए हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है रोहतक। एक चश्मदीद दीपक ने बताया कि किस तरह रोहतक में आंदोलनकारी उपद्रवी में तब्दील हो चुके हैं और लूटपाट को अंजाम दे रहे हैं। पढ़ें दीपक की जुबानी रोहतक की कहानी-

    मेरा जन्म रोहतक में हुआ और मैं यहीं पला बढ़ा। मैंने कभी भी इस खूबसूरत शहर को छोड़कर जॉब के लिए दिल्ली जाने की नहीं सोची जो महज 1 घंटे की दूरी पर है। यहां की जिंदगी बहुत शानदार रही है। कभी कभार कुछ दिक्कतें हो जाती हैं लेकिन मोटे तौर पर रोहतक और इसके आसपास का इलाका शांतिपूर्ण रहता है।

    जाट आरक्षण के नाम पर यहां जो हो रहा है वो डरावना है। इससे पहले मैंने कभी ऐसा नहीं देखा, रोहतक शहर बर्बाद हो चुका है। पुराना मार्केट बर्बाद कर दिया गया है। नए शॉपिंग मॉल, भवन, होटल, शिक्षण संस्थान जो भूपेंद्र हुड्डा के कार्यकाल में बनाए गए थे, भीड़ ने नष्ट कर दिए। कुछ मॉल में तो सब कुछ लूट लिया गया है।

    नेताविहीन प्रदर्शनकारियों में अपराधी शामिल हो गए हैं और आरक्षण के नाम पर दहशत फैला रहे हैं। बेरोजगार नौजवान और छोटे-मोटे अपराधी प्रदर्शन में शामिल हैं और लूटपाट, दहशत को अंजाम दे रहे हैं। लगता है जैसे राज्य प्रशासन है ही नहीं। कानून व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। पुलिस अपनी जान बचाकर भाग रही है।थानों में ताले लगे हुए हैं।

    मैं और मेरे कई पड़ोसी अपने घरों में फंसे हुए हैं। हमारे बच्चे और महिलाएं दहशत में हैं। पानी, राशन, दवाओं की कमी होती जा रही है। पिछले 5 दिन में मैंने कुछ खरीदने के लिए घर से बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन गंभीर हालात देख लौटना पड़ा।

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    सेना अभी तक रोहतक के अंदरुनी हिस्सों तक नहीं पहुंच पाई है। सेना को स्थानीय भौगोलिक स्थिति की जानकारी नहीं है जिससे हालात सुधर नहीं रहे हैं।

    अपने घर से मैं शहर में कई जगहों पर धुआं उठता देख सकता हूं। वाकई डराने वाले दृश्य हैं। मेरे एक व्यापारी मित्र ने कहा कि भीड़ करोड़ों का कैश लूट चुकी है। प्रदर्शन के नाम पर डकैती चल रही है। जाट समुदाय के नेताओं को जाट जाति की छवि को बचाने के लिए सामने आना चाहिए। लुटेरों को आरक्षण से कोई लेना देना नहीं है।



    स्थानीय प्रशासन न हमारे फोन का जवाब दे रहा है और न हीं भीड़ को दंडित कर रहा है। मौजूदा स्थिति के लिए साफ तौर पर प्रशासन जिम्मेदार है। मैं गंभीरता से कुछ दिनों के लिए दिल्ली जाकर रहने की सोच रहा हूं। अगर हिंसा रुक भी जाती है तो रोहतक में सामान्य स्थिति बहाल होने में कई महीने लगेंगे।

    रोहतक और इसके आसपास के इलाकों ने ऐसा दृश्य कभी नहीं देखा होगा। प्रशासन कहां है? क्या वह अपनी नाकामी की जिम्मेदारी लेगा? मुझे उम्मीद नहीं।

    (दीपक अपना पूरा नाम नहीं देना चाहते क्योंकि वह रोहतक में अपने घर में फंसे हुए हैं।)

     

    Tags: Jat agitation, Jat reservation, Rohtak

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