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हमारे आंदोलन में कुछ असामाजिक तत्‍व हावी हो गए हैंः सांगवान

हमारे आंदोलन में कुछ असामाजिक तत्‍व हावी हो गए हैंः सांगवान

हरियाणा में जाटों की आरक्षण की मांग ने हिंसात्‍मक रूप ले लिया है। आंदोलन को लेकर आईबीएनखबर.कॉम ने अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष चौधरी हवा सिंह सांगवान से बात की।

हरियाणा में जाटों की आरक्षण की मांग ने हिंसात्‍मक रूप ले लिया है। आंदोलन को लेकर आईबीएनखबर.कॉम ने अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष चौधरी हवा सिंह सांगवान से बात की।

हरियाणा में जाटों की आरक्षण की मांग ने हिंसात्‍मक रूप ले लिया है। आंदोलन को लेकर आईबीएनखबर.कॉम ने अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष चौधरी हवा सिंह सांगवान से बात की।

नई दिल्‍ली। गुजरात में पटेलों के हिंसात्‍मक आरक्षण आंदोलन के बाद अब हरियाणा में जाटों की ओबीसी कैटिगरी में आरक्षण की मांग ने हिंसात्‍मक रूप ले लिया है। 200 करोड़ की सरकारी संपत्‍ति स्‍वाहा हो चुकी है, कई लोग घायल हो चुके हैं, हिंसक भीड़ ने रेलमार्ग, सड़क मार्ग बाधित कर दिए हैं। हालात ये हैं कि खट्टर सरकार ने भिवानी और रोहतक जिलों में देखते ही गोली मारने के आदेश दिए हैं। आंदोलन को लेकर आईबीएनखबर.कॉम ने जाट नेता और अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष चौधरी हवा सिंह सांगवान से बात की।

सवालः आरक्षण की मांग पर इतनी हिंसा क्‍यों?

सांगवानः मैं खुद भी हिंसा में यकीन नहीं करता हूं। मेरा मानना है कि हिंसा से आंदोलन का उद्देश्‍य भटक जाता है और यही हो रहा है।

सवालः तो फिर इस हिंसा के लिए कौन जिम्‍मेदार है?

सांगवानः हम इस हिंसा के लिए जिम्‍मेदार नहीं हैं बल्‍कि इस आंदोलन में कुछ असामाजिक तत्‍व हावी हो गए हैं। मैं आईबीएनखबर के माध्‍यम से अपील करता हूं कि इस हिंसा को रोका जाना चाहिए। सच कहूं तो मेरे पास खबर है कि हमारे आंदोलन के 5 से 6 लड़कों की हिंसा में मौत हो गई है। इससे हमारी ही कौम बदनाम हो रही है।

सवालः आपसे केंद्र और राज्‍य सरकार दोनों बातचीत करना चाहती हैं और आप आंदोलन कर रहे हैं?

सांगवानः हां बातचीत समाधान है, लेकिन सरकार बातों को गोल-गोल घुमा रही है। सरकार आश्‍वासन नहीं दे बल्‍कि सीधी बात करे तो बातचीत का मतलब है, वरना एक बार तो पीएम से भी बात हो चुकी है।



सवालः सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि जाटों की आर्थिक स्‍थिति दूसरों की तुलना में बेहतर है, लिहाजा उन्हें आरक्षण नहीं दिया जा सकता।

सांगवानः हमारी मांग सुप्रीम कोर्ट से नहीं बल्कि सरकार से है।  अब तो सरकार को चाहिए कि आने वाले बजट सत्र में इस आरक्षण को लेकर बिल पास करे।

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सवालः आंदोलन हिंसक हो चुका है और जैसा कि आपने कहा है आपके हाथों से निकल चुका है, तो इसे फिर स्‍थगित करने की अपील करेंगे? कम से कम हिंसा रोकने की अपील तो कर ही सकते हैं?

सांगवानः आंदोलन स्‍थगित की बात ही नहीं है, हां लेकिन हिंसा रोकने और शांति बनाए रखने की अपील मैं करता हूं। हिंसा से आंदोलन का उद्देश्‍य भटक जाता है।

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