जयललिता के पोएस गार्डन वाले घर को CM आवास और कार्यालय बनाया जा सकता है : मद्रास HC

दिवंगत नेता जे जयललिता की फाइल फोटो

मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) के जजों ने कहा है कि सार्वजनिक पैसे को पोएस गार्डन (Poes Garden) के जयललिता (Jayalalithaa) के घर को बदलने के लिए इस्तेमाल करना एक ऐसी प्रथा को जन्म देगा, जिसका कोई अंत नहीं है.

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    चेन्नई. मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने सुझाया है कि पूर्व मुख्यमंत्री और AIADMK की मुखिया रही जे जयललिता (J Jayalalithaa) के घर को मेमोरियल बनाने के बजाए तमिलनाडु (Tamil Nadu) के मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास सह कार्यालय में बदला जा सकता है. कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक पैसे का प्राइवेट प्रापर्टी का अधिग्रहण कर मेमोरियल (memorial) के लिए इस्तेमाल करना ऐसी प्रथा शुरू करना है, "जिसका कोई अंत नहीं है." जजों ने कहा, "जयललिता के पोएस गार्डन (Poes Garden) वाले घर के केवल एक हिस्से को मेमोरियल (memorial) के तौर पर बदला जा सकता है."

    'वेदा निलयम' बने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास सह कार्यालय
    ऑर्डर में कहा गया, 'राज्य सरकार को पोएस गार्डन प्रॉपर्टी 'वेदा निलयम' को प्राइवेट प्रॉपर्टी के अधिग्रहण के जरिये मेमोरियल में बदलने के विचार को नजरअंदाज करने के कोर्ट के सुझाव पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि यह सरकारी खजाने पर भारी दबाव डालेगा. राज्य सरकार को इसके दूसरे और तीसरे उत्तरदाताओं जे दीपा और जे दीपक को नोटिस जारे करने के बाद और उनका पक्ष सुनने के बाद प्रॉपर्टी का कानून के मुताबिक अधिग्रहण करना चाहिए. जिसके बाद पोएस गार्डन की प्रॉपर्टी 'वेदा निलयम' (VEDA NILAYAM) को राज्य के मुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास सह कार्यालय बना देना चाहिए.'

    इस केस की सुनवाई कर रही बेंच जिसमें जस्टिस एन किरुबाकरन और अब्दुल कुद्दौस शामिल थे, ने इस मुद्दे पर सुनवाई को 8 हफ्ते के लिये टाल दिया है और इस पर तमिलनाडु सरकार से जवाब मांगा है.

    कोर्ट ने दीपा जयकुमार और दीपक को माना जयललिता का कानूनी उत्तराधिकारी
    जजों ने सरकार को पूर्व मुख्यमंत्री की प्रॉपर्टी के अधिग्रहण और इसके लिए मुआवजा देने से पहले जयललिता के कानूनी उत्तराधिकारियों की बात सुनने का सुझाव भी दिया. कोर्ट ने माना कि दीपक और दीपा जयकुमार, जयललिता के क्लास II के कानूनी उत्तराधिकारी हैं और उन्हें प्रशासन के पत्र पाने का अधिकार है.

    तमिलनाडु सरकार (Tamil Nadu Government) ने पिछले हफ्ते जयललिता के पोएस गार्डन निवास पर अस्थायी रूप से कब्जा करने के लिए अध्यादेश लाने की बात कही थी. इसके बाद, जयललिता की भतीजी और भतीजे ने अपनी चाची की छोड़ी गई संपत्तियों के बारे में किसी फैसले पर प्रशासनिक पत्र पाने के लिए अदालत का रुख किया.

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