तरबूज नहीं बिका तो मुफ्त में दे रहा था किसान, सेना ने बड़ा दिल दिखाकर बाजार भाव पर खरीद लिया सारा माल

सांकेतिक तस्वीर

कमांडेंट ब्रिगेडियर एम श्रीकुमार ने बताया कि उन्हें किसान रंजन कुमार महतो के बारे पता चला कि लॉकडाउन के कारण वह तरबूज की पैदावार उचित दाम पर नहीं बेच पा रहे हैं. फिर वह अपने अन्य अधिकारियों के साथ महतो के खेत पर पहुंचे और वहां से सेना के ट्रकों में तरबूज रेजिमेंटल सेंटर ले आये.

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    रामगढ़. लॉकडाउन के चलते किसानों को इन दिनों भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. रांची विश्वविद्यालय से स्नातक 25 वर्षीय रंजन कुमार महतो कोरोना वायरस संक्रमण पर रोक के लिए झारखंड में लॉकडाउन लागू होने के चलते अपने खेत के तरबूज (watermelon) जब नहीं बेच पाये तो उन्होंने सेना (Army) को पांच टन मुफ्त देने की पेशकश कर दी. लेकिन रामगढ़ छावनी के सिख रेजिमेंटल सेंटर के सैनिकों ने बड़ा दिल दिखाते हुए तरबूज को बाजार की कीमत पर खरीद लिया.

    रामगढ़ स्थित सिख रेजिमेंटल सेंटर के कमांडेंट ब्रिगेडियर एम श्रीकुमार सहित एसआरसी के अधिकारी किसान रंजन कुमार महतो से इतने प्रभावित हुए कि बोकारो जिले के पास स्थित उनके खेत पर पहुंचे और तरबूज की उनकी उपज खरीद ली. कमांडेंट ब्रिगेडियर एम श्रीकुमार ने बताया कि उन्हें युवा किसान रंजन कुमार महतो की तरबूज की खेती के बारे में जानकारी मिली और पता चला कि कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार पर रोक के लिए राज्य में लागू लॉकडाउन के कारण वह तरबूज की पैदावार को उचित दाम पर नहीं बेच पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें पता चला कि महतो ने इस कारण से लगभग सवा सौ टन की तरबूज की पैदावार में से पांच टन तरबूज मुफ्त में सेना को देने का प्रस्ताव किया है.

    मार्केट रेट पर खरीदा
    कुमार ने बताया कि पूरे मामले की जानकारी होने पर वह सपरिवार और अपने अन्य अधिकारियों के साथ महतो के खेत पर पहुंचे और वहां से सेना के ट्रकों में तरबूज रेजिमेंटल सेंटर ले आये. उन्होंने बताया कि महतो ने सेना को तरबूज मुफ्त देने का प्रस्ताव दिया था लेकिन ‘हमने उन्हें बाजार भाव पर मूल्य चुकाया और उनका भरसक उत्साहवर्धन भी किया.’

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    लॉकडाउन के चलते नहीं मिले खरीददार
    वहीं युवा किसान महतो ने बताया कि उन्होंने रांची विश्वविद्यालय से कुछ वर्षों पूर्व स्नातक करने के बाद व्यावसायिक खेती करने का फैसला किया था और 25 एकड़ भूमि लीज पर ली थी. महतो ने बताया कि उन्होंने इस वर्ष उसमें से पांच एकड़ भूमि पर लगभग 15 लाख रुपये की लागत से तरबूज की खेती की लेकिन लॉकडाउन के चलते तरबूज के खरीददार ही नहीं मिल रहे थे.

    किसान को हो रहा नुकसान
    महतो ने बताया कि उन्होंने अपने खेतों में कई अन्य प्रकार की सब्जियां भी उगायी हैं लेकिन राज्य में लागू लॉकडाउन के चलते उन्हें इस वर्ष भारी नुकसान उठाना पड़ा है. उन्होंने कहा, ‘रामगढ़ से सेना के सिख रेजिमेंटल सेंटर के अधिकारी उनके बुलावे पर आज उनके खेतों पर पहुंचे और पांच टन तरबूज खरीद कर ले गये. अधिकारियों ने विशेषकर कमांडेंट ब्रिगेडियर श्रीकुमार ने उनका और उनके कामगारों का बहुत उत्साहवर्धन किया.’

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