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Jharkhand Assembly Results: झारखंड में कुड़मी-महतो समुदाय से वादों की भरमार, आखिर किसका करेगी बेड़ा पार

News18Hindi
Updated: December 23, 2019, 10:34 AM IST
Jharkhand Assembly Results: झारखंड में कुड़मी-महतो समुदाय से वादों की भरमार, आखिर किसका करेगी बेड़ा पार
कांग्रेस नेता राहुल गांधी और जेएमएम नेता हेमंत सोरेन की फाइल फोटो

Jharkhand Assembly Results 2019: कुड़मी-महतो झारखंड की कुल आबादी का लगभग 25 प्रतिशत है. ऐसे में इस समुदाय से वोट हासिल करने के लिए अंतिम समय में सभी दलों ने कई बड़े वादे किए.

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  • Last Updated: December 23, 2019, 10:34 AM IST
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पटना/रांची. झारखंड (Jharkhand Assembly election 2019) में पांच चरणों में हुए चुनाव के परिणाम सोमवार को आने शुरू हो गए हैं. इससे पहले सभी बड़े राजनीतिक दलों और गठबंधनों ने विभिन्न पिछड़ी जातियों और खासतौर से कुड़मी-महतो समुदाय से वोट हासिल करने के लिए अंतिम समय में कई बड़े वादे किए थे. एक ओर कांग्रेस ने जहां अपने मैनिफेस्टो में ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण देना, हर घर से एक शख्स को सरकारी नौकरी देने और ट्राइबल आबादी के लिए एक अलग सरना कोड देने का ऐलान किया था. वहीं भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने अपनी एक रैली में पिछड़ी जाति के युवाओं को आरक्षण देने और उन्हें नौकरी देने के लिए एक आयोग बनाने की घोषणा की. शाह ने कहा कि भाजपा सरकार ओबीसी को एक अवसर प्रदान करेगी, जो देश में 70 वर्षों के कांग्रेस शासन के दौरान उपेक्षित रहे हैं.

झामुमो ने भी किये हैं वादे
इसके साथ ही शिबू सोरेन के नेतृत्व वाले मुख्य विपक्षी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने राज्य में सत्ता में आने पर स्थानीय लोगों को सरकारी नौकरियों के अलावा ओबीसी, अनुसूचित जनजातियों और अनुसूचित जातियों को 67% आरक्षण देने का वादा किया है. JMM ने स्थानीय युवाओं के लिए निजी क्षेत्र में 75% नौकरियों को आरक्षित करने के अलावा बेरोजगार ग्रेजुएट्स और पोस्ट-ग्रेजुएट्स को 5,000 रुपये और 7,000 रुपये प्रति माह भत्ता देने का भी वादा किया है.

ओबीसी के लिए आरक्षण में वृद्धि का वादा करने वाली कांग्रेस की रणनीति बीजेपी और उसके असंतुष्ट सहयोगी - ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन (आजसू) पार्टी से ओबीसी कोटा छीनने की कोशिश करती दिख रही है, जो कुड़मी-महतो जाति को अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल करने की मांग हमेशा से उठाती रही है. कुड़मी-महतो झारखंड की कुल आबादी का लगभग 25 प्रतिशत है.



वहीं माना जा रहा है कि ज्यादा ओबीसी कोटा राजनीति भी कुड़मी-महतो को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने की मांग को कमजोर करने का प्रयास है, क्योंकि इसे संसद से  संशोधित कराने की आवश्यकता होगी. वहीं इस कोशिश में झारखंड में पर्याप्त जनजातीय आबादी को अलग करने का जोखिम भी दिख रहा है. लेकिन यह प्रस्ताव निश्चित रूप से छोटानागपुर क्षेत्र में अपना असर डाल सकता है जहां जिसमें कुड़मी-महतो जाति की पर्याप्त आबादी है. राजनीतिक रूप से शक्तिशाली और आर्थिक रूप से संपन्न कुड़मी-महतो जाति के समर्थन में कांग्रेस और अन्य को उम्मीद है कि उन्हें इसका लाभ मिलेगा.

AJSU 27 सीटों पर लड़ रही चुनावसुदेश महतो के नेतृत्व में AJSU ने भाजपा के साथ लेकिन उसके नीचे काम किया, लेकिन इस बार वह 27 विधानसभा सीटों से भाजपा के खिलाफ अपने उम्मीदवार मैदान में उतार कर अपनी जड़ें मजबूत करने की कोशिश कर रही है और कुड़मी-महतो जाति के अपने मूल वोट बैंक से लाभांश पाने की उम्मीद कर रही है. 2014 के चुनावों में, भाजपा ने 81-सदस्यीय झारखंड विधानसभा में 37 सीटें जीती थीं और आजसू द्वारा जीती गई पांच सीटों की मदद से बहुमत हासिल कर किया था.

झारखंड की कुड़मी-महतो जाति जातीय और सांस्कृतिक रूप से बिहार की कुर्मी जाति से अलग है. वे मुंडा, हो, खारिया, उरांव और संथालों के कुलदेवता और उनमें मना की गई बातों का पालन करते हैं. साल 1913 की अधिसूचना और साल 1931 की तत्कालीन बिहार-उड़ीसा सरकार की अधिसूचना में कहा गया है कि कुड़मी अनुसूचित जनजातियों का हिस्सा थे. साल 1931 की जनगणना में, छोटानागपुर के कुड़मी को आदिम जनजातियों की सूची में शामिल किया गया था और यह 5 सितंबर, 1950 तक एसटी का हिस्सा था. हालांकि यह जाति इस सूची बाहर क्यों हुई इसकी कोई जानकारी नहीं है.

डॉ. राम दयाल मुंडा, डॉ. निर्मल मिंज, एन ई होरो, संजय बसु मल्लिक और संतोष राणा जैसे विद्वानों ने माना है कि झारखंड के कुडमी को एसटी का दर्जा दिया जाना चाहिए. 27 दिसंबर, 1988 को पुरुलिया में आयोजित आदिवासी कुडमी सम्मेलन में एन ई होरो ने एक लिखित संदेश में कहा कि कुडमी समुदाय को एसटी सूची में शामिल किया जाना चाहिए क्योंकि वे जातीय समूह से संबंधित थे और 1931 तक इसका हिस्सा रहे.

झामुमो के संरक्षक शिबू सोरेन ने कुड़मी-महतो को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने का समर्थन किया और कहा कि वे संथालों की उपजाति हैं और एक ही गोत्र से बाहर आए हैं. तत्कालीन कांग्रेस महासचिव राम रतन राम ने कहा था कि कुड़मी-महतो आदिवासी थे और तत्कालीन प्रधानमंत्री के साथ इस मुद्दे को उठाने का वादा किया था.



इन जगहों पर है कुड़मी जनजातियों का प्रभाव
कुड़मी जनजातियां रांची, हजारीबाग, संथाल परगना और झारखंड के छोटानागपुर पठार, मयूरभंज, सुंदरगढ़, कोनझार, ओरिस और पुरिलिया, बोनाई और बोनापुर, बरदान, मालदा, मुर्शिदाबाद और पश्चिम और पश्चिमीनापुर और पश्चिम में स्थित हैं. वे परंपरागत रूप से चार नदियों दामोदर, कंशाबती, सुवर्णरेखा और बैतरणी से बंधे क्षेत्र में बसे हैं, जो निचले झारखंड का हिस्सा रहा है.

भाजपा इस मुद्दे पर चतुराई से खेल रही है, हालांकि मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के नेतृत्व वाली तत्कालीन भाजपा सरकार ने केंद्र को 2004 में कुड़मी-महतो और घाटियों को जनजातीय दर्जा प्रदान करने की सिफारिश की थी. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) भी ओबीसी कोटे में मांग के समर्थन और एसटी सूची में कुड़मी-महतो को शामिल करने के समर्थन में है. (अशोक मिश्रा के इनपुट के साथ)

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First published: December 23, 2019, 8:17 AM IST
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