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दुमका केस: बेहतर इलाज के लिए तड़पती रही लड़की, अपनी सरकार को बचाने में जुटे रहे सोरेन

इस मामले से इलाके में सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया है.

इस मामले से इलाके में सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया है.

लड़की की मौत के एक दिन पहले 27 अगस्त को उनकी हालत बिगड़ रही थी. फिर भी सरकार की तरफ से कोई भी नुमाइंदा उसका हालचाल लेने ...अधिक पढ़ें

रांची. झारखंड (Jharkhand) में जारी सियासी घमासान के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार (Hemant Soren Government) ने यूपीए के विधायकों को रायपुर ‘एयरलिफ्ट’ किया है. राजधानी रांची से एक विशेष विमान से विधायकों को रायपुर भेजा गया है. इसमें कांग्रेस-जेएमएम और आरजेडी के 32 विधायक शामिल हैं. इसके साथ ही रिसॉर्ट की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. बड़ी संख्या में पुलिस के जवान और अधिकारी वहां मौजूद हैं. ये सब दुमका (Dumka Girl Died) की एक नाबालिग लड़की की रांची के रिम्स अस्पताल में मौत के दो दिन बाद हुआ. बीते दिनों एकतरफा प्यार की सनक में शाहरुख नाम के एक लड़के ने लड़की को घर में घुसकर जिंदा जला दिया था. रांची के रिम्स अस्पताल में उसका इलाज चल रहा था. गौर करने वाली बात ये है कि सोरेन सरकार ने ऐसी कोई पहल नहीं की, जिससे लड़की को झारखंड के बाहर अच्छा और बेहतर इलाज मिल पाता.

लड़की की मौत के एक दिन पहले 27 अगस्त को उनकी हालत बिगड़ रही थी. फिर भी सरकार की तरफ से कोई भी नुमाइंदा उसका हालचाल लेने अस्पताल नहीं पहुंचा. सत्तारूढ़ गठबंधन के विधायक लातरातूर बांध पर पिकनिक मनाने के लिए बस में थे. जबकि सीएम अपनी सरकार को गिराने के बीजेपी के प्रयासों के खिलाफ एकजुटता का संदेश भेजने की कोशिश कर रहे थे. इससे भी बदतर, पुलिस ने लड़की की उम्र 19 साल दर्ज की. बाद में किशोर कल्याण समिति ने आपत्ति जताई और साफ किया कि वह 16 साल की भी नहीं हुई थी. समिति ने इस मामले को एक साधारण हत्या के केस के बजाय पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) के तहत चलाने की मांग की है.

पॉक्सो एक्ट के तहत पुलिस को मामलों की जांच दो महीने में पूरी करनी है. छह महीने में ट्रायल पूरा होना है. इसमें नाबालिगों की हिंसक मौत के बेहद गंभीर मामलों में मौत की सजा का प्रावधान भी है. एक विधायक के रूप में अयोग्यता की तलवार सिर पर लटकाए हेमंत सोरेन के लिए राजनीतिक संकट के बीच इस मामले को गलत तरीके से संभालने से सरकार की छवि को ठेस पहुंची है.

लड़की पर 23 अगस्त की रात को हमला हुआ था. शाहरुख नाम के एक युवक ने एकतरफा प्यार में 12वीं कक्षा की छात्रा को जिंदा जला दिया था. इसके बाद रांची के रिम्स हॉस्पिटल में इलाज के दौरान रविवार तड़के ढाई बजे उसकी मौत हो गयी. पुलिस के अनुसार 23 अगस्त को अल्पसंख्यक समुदाय से ताल्लुक रखने वाले शाहरुख ने एकतरफा प्यार में असफल होने पर 10वीं की छात्रा अंकिता पर देर रात सोते समय खिड़की से पेट्रोल डालकर आग लगा दी थी. इस घटना में वह 90 प्रतिशत जल गयी थी. इससे साफ होता है कि लड़की को एक अच्छी जगह पर इलाज के लिए भेजा जाना चाहिए था. हाईकोर्ट ने एक विशेष जांच दल द्वारा अदालत की निगरानी में जांच कराने की बात कही. साथ ही कहा कि राज्य में अपराधियों को कानून का कोई डर नहीं है.

सोरेन सरकार ने पीड़ित परिवार के लिए 10 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की, लेकिन मुख्यमंत्री या उनके परिवार के सदस्यों ने लड़की के माता-पिता से मुलाकात तक नहीं की. इस मुद्दे को बीजेपी जोर-शोर से उठा रही है. बीजेपी ये दिखाने की कोशिश कर रही है कि मुख्यमंत्री की अलग प्राथमिकताएं हैं.

बीजेपी का एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को पीड़ित परिवार से मिलने दुमका पहुंचा. प्रतिनिधिमंडल ने जांच में पुलिस अधिकारी नूर मुस्तफा की भूमिका और पीड़िता को बालिग करार दिए जाने की आलोचना की. बाद में उन्हें जांच से हटा दिया गया था.

सोरेन सरकार पर अब इस मामले में दो आरोपियों को मौत की सजा की मांग को लेकर स्थानीय लोगों के साथ त्वरित जांच और मुकदमे की सुनवाई सुनिश्चित कर अपनी छवि को बचाने का दबाव है.

Tags: Bihar Jharkhand News, Dumka news, Pocso act

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