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Jharkhand Election Result 2019: सरयू की 'राय' न मानकर बीजेपी ने की बड़ी भूल!

Jharkhand Election Result 2019: सरयू की 'राय' न मानकर बीजेपी ने की बड़ी भूल!

सरयू रॉय को बीजेपी ने नजरअंदाज कर टिकट नहीं दिया था.

सरयू रॉय को बीजेपी ने नजरअंदाज कर टिकट नहीं दिया था.

झारखंड विधानसभा चुनाव (Jharkhand Election Result 2019) के रुझानों में महागठबंधन सत्ता हासिल करता दिख रहा है. यहां कांग्रेस ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (Jharkhand Mukti Morcha) और आरजेडी (RJD) के साथ मिलकर चुनाव लड़ा वहीं बीजेपी ने अकेले चुनाव लड़ा. सीएम रघुबर दास के खिलाफ बगावती सुर उठे. पार्टी के वरिष्ठ नेता और मंत्री सरयू राय ने ही उनके बिगुल फूंक दिया.

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    नई दिल्ली. झारखंड विधानसभा चुनाव (Jharkhand Election Result 2019) के रुझानों में महागठबंधन (जेएमएम, कांग्रेस और आरजेडी) सत्ता की रेस में बीजेपी (BJP) से आगे निकल गया है. महाराष्ट्र के बाद झारखंड (Jharkhand) दूसरा राज्य है, जहां कांग्रेस बीजेपी के हाथ से सत्ता छीनती दिख रही है. झारखंड में जहां कांग्रेस ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (Jharkhand Mukti Morcha) और आरजेडी (RJD) के साथ मिलकर चुनाव लड़ा, वहीं बीजेपी ने अकेले चुनाव लड़ा. यहां तक कि चुनाव के आखिरी समय में आजसू (AJSU) से उसका गठबंधन टूट गया. इतना ही नहीं पार्टी के अंदर ही मुख्यमंत्री रघुबर दास के खिलाफ बगावती सुर उठे, लेकिन बीजेपी ने सभी को नजरअंदाज कर दिया.

    सीएम रघुबर दास के खिलाफ पार्टी के वरिष्ठ नेता और मंत्री सरयू राय ने ही बिगुल फूंक दिया. वह खुद कहते हैं कि उनकी और रघुबरदास की अदावत 2005 से ही है, जब रघुबर दास मंत्री हुआ करते थे. इस बार वह अपने ही मुख्यमंत्री के खिलाफ क्यों लड़े, इस सवाल के जवाब में वह कहते हैं कि मैं पार्टी से बगावत नहीं करता, लेकिन पार्टी ने जिस तरह से मेरा अपमान किया, उसके बाद ही मैंने दूसरी पार्टी से चुनाव लड़ना उचित समझा.

    सीएम को दी थी चेतावनी
    सरयू राय को इस चुनाव में टिकट नहीं दिया गया था. जिसके बाद उन्होंने कहा था, "पार्टी नेतृत्व से सीट की भीख मांगना मेरे लिए उपयुक्त नहीं है. इसलिए मैंने उनसे मेरे नाम पर विचार नहीं करने को कहा है.'' इसी वजह से उन्होंने विधायक पद के साथ-साथ मंत्रीपद से भी त्यागपत्र दे दिया था. खुद सरयू राय ने एक इंटरव्यू में कहा था, 'मैंने रघुवर दास से कहा था कि आप जिस रास्ते पर हैं वो मधु कोड़ा तक ले जाता है, इसलिए संभल जाइए. मैंने अपनी बात राजनाथ सिंह और रविशंकर प्रसाद से भी कह दी थी, लेकिन इसका कोई फ़ायदा नहीं हुआ.'

    1962 में आरएसएस से जुड़े सरयू राय
    सरयू राय 1962 में आरएसएस से जुड़े. 1977 में राजनीति में भेजे गए. इसके बाद से लेकर वह एमएलसी, विधायक और फिर मंत्री बने, लेकिन इस बार जमशेदपुर में उन्होंने रघुबर दास के लिए ही मुश्किलें खड़ी कर दी हैं. 2014 में पिछला विधानसभा चुनाव रघुबर दास ने 70,000 से भी अधिक वोटों के अंतर से जीता था. तब यहां बीजेपी को 61.5 फीसदी वोट मिले थे. तब कांग्रेस 19.8 फीसदी वोट लेकर दूसरे स्थान पर रही थी. बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर दास को 1,03,427 वोट मिले थे.

    रघुबर दास 1995 से जमशेदपुर से चुनाव जीत रहे हैं
    रघुबर दास ने 1995 में जमशेदपुर पूर्वी सीट से पहला चुनाव लड़ा था. तब बीजेपी ने अपने विधायक दीनानाथ पांडेय का टिकट काटकर उन्हें मैदान में उतारा था. उस समय पांडेय के बागी होने से रघुबर दास मुश्किल से चुनाव में जीत हासिल कर पाए थे. तब रघुबर दास लगातार इस सीट पर जीतते आ रहे हैं. 2009 में वह पहली बार झारखंड के उपमुख्यमंत्री बने और साल 2014 में मुख्यमंत्री पद हासिल किया.

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    Tags: Jharkhand Assembly Election, Jharkhand Assembly Election 2019, Raghubar Das, Saryu Rai

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