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झारखंड ने किया कमाल, सीमा पर सड़क बनाने के लिए भेजेगा करीब 12 हजार मजदूर, मिलेंगे कई फायदे

मध्य प्रदेश सरकार ने वापस लौटे प्रवासी मजदूरों का काम-काज के आधार पर करवाया सर्वे (प्रतीकात्मक तस्वीर)

मध्य प्रदेश सरकार ने वापस लौटे प्रवासी मजदूरों का काम-काज के आधार पर करवाया सर्वे (प्रतीकात्मक तस्वीर)

बीआरओ (BRO) की तरफ से कहा गया कि सीमा पर सड़क बनाने के काम में पारंपरिक रूप से दुमका और देवघर जिलों के मजदूर शामिल रहे हैं. वे ईमानदार, मेहनती, कठिन और बीहड़ पहाड़ों में काम करने के लिए उपयुक्त हैं.'

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रांची. झारखंड (Jharkhand) अपने 11,815 मजदूरों को हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन यानी BRO में काम करने के लिए भेजने की तैयारी में है. इन मजदूरों को दी जाने वाली सुविधाओं को लेकर राज्य सरकार और BRO के बीच कई दौर की बातचीत हुई. इन मजदूरों को अन्य लाभों के साथ-साथ राशन भत्ता, चिकित्सा बीमा भी मुहैया कराई गई है. साथ ही बीआरओ को 1979 के अंतरराज्यीय प्रवासी निर्माण अधिनियम के तहत एक नियोक्ता के रूप में पंजीकरण करना होगा और झारखंड के सभी श्रमिकों की सीधी भर्ती करनी होगी.

एक हफ्ते पहले लद्दाख के बटालिक सेक्टर से अपने 60 प्रवासी श्रमिकों को एयरलिफ्ट करने वाला झारखंड पहला राज्य बन गया. अब, राज्य के श्रम विभाग ने सीमा सड़क संगठन के साथ एक समझौता किया है, जो रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आता है. BRO अरुणांचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, सिक्किम, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में बिखरी चीन के साथ देश की उत्तरी सीमा के सटी सामरिक महत्व की सड़कों और बुनियादी ढांचे के निर्माण का कार्य करता है.

 सभी श्रेणियों के श्रमिकों के लिए नई दरें भी लागू की गई
बीआरओ और झारखंड के प्रमुख सचिव के बीच कई दौर की बातचीत के बाद सभी श्रेणियों के श्रमिकों के लिए नई दरें भी लागू की गई हैं. जो अनस्किल्ड, सेमिस्किल्ड और स्किल्ड के तहत बांटा गया है. बीआरओ ने 10 से 20% की मजदूरी बढ़ाने पर सहमति जताई है. 10 जून से यह लागू हो जाएगा. अब इनकी नियुक्ति सीधे बीआरओ के अंतर्गत होगी.
सीएम के प्रधान सचिव राजीव एक्का ने 31 मई को बॉर्डर रोड्स के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह को एक पत्र लिखा था, जिसमें कई सवाल पूछे गए, जैसे 'झारखंड के आदिवासी जिलों के श्रमिकों को क्यों चुना जा रहा है? भत्ते, काम के घंटे, आवास आदि क्या होंगे?'



बीआरओ से इस पर तत्काल जवाब मिला, जिसमें कहा गया कि पारंपरिक रूप से दुमका और देवघर जिलों के मजदूर इस काम में शामिल रहे हैं. वे ईमानदार, मेहनती, कठिन और बीहड़ पहाड़ों में काम करने के लिए उपयुक्त हैं.'

जब श्रमिकों का पहला जत्था घर लौटा तो राज्य सरकार ने उनके वेतन के बारे में जानकारी ली. News18 को मिले दस्तावेज़ से पता चलता है कि उनमें से कई को महीनों तक ठेकेदारों ने पैसे नहीं दिये थे. इसके साथ ही यह शिकायत भी की गई कि BRO ने जो राज्य सरकार को बताया था उससे कम मजदूरों को पैसे दिये जा रहे थे.

सीएम हेमंत सोरेन के करीबी सूत्रों ने News18 को बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने खुद पिछले रविवार को सोरेन के हस्तक्षेप का अनुरोध किया था. माना जा रहा है कि सोरेन ने श्रमिकों की चिंताओं और प्रवासियों के मूवमेंट को सुव्यवस्थित करने की जरूरत के बारे में जानकारी दी.

झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने News18 से कहा, 'राष्ट्रीय सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है और साथ ही हमने प्राथमिकता दी है कि राष्ट्र की सेवा करते हुए हमारे मजदूरों के सम्मान और अधिकारों की गारंटी हो.'
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