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Jind By Election Result: हरियाणा में 2014 से कांग्रेस की जिला कमेटियां हैं भंग, सुरजेवाला कैसे जीतते जींद की जंग?

रणदीप सुरजेवाला
रणदीप सुरजेवाला

हरियाणा में 2014 से कांग्रेस का न कोई जिलाध्यक्ष है और न ब्लॉक अध्यक्ष, बीजेपी का मुकाबला कैसे कर पाती गुटों में बंटी कांग्रेस?

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 31, 2019, 5:10 PM IST
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जींद उप चुनाव में कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला की हार के पीछे सबसे बड़ी वजह पार्टी की गुटबाजी और जमीन पर संगठन की गैर मौजूदगी बताई जा रही है. 2014 में विधानसभा चुनाव हारने के बाद से ही पार्टी बिखरी हुई है. सभी जिला और ब्लॉक कमेटियां भंग हैं. जिसकी वजह से किसी भी जिले में न पार्टी की मासिक बैठक हो रही है न तो सामूहिक रूप से मनोहरलाल सरकार के खिलाफ कोई धरना-प्रदर्शन हो पा रहा है. दूसरी ओर बीजेपी के प्रदेश भर के कार्यकर्ता जींद में काम कर रहे थे. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे में कांग्रेस तीसरे नंबर पर नहीं रहती तो कहां रहती?  (ये भी पढ़ें: ‘कांग्रेस मर नहीं सकती, उसके दोष बने रहेंगे और गुण लौट-लौट कर आएंगे...’)

इस समय हरियाणा में कांग्रेस कम से कम चार गुटों में बंटी हुई है. ये गुट हैं पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा,  प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर,  पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला के समर्थकों के. एक और गुट है कुलदीप बिश्नोई का. जिसमें से हुड्डा और तंवर गुट तो लंबे समय से प्रदेश में एक दूसरे के खिलाफ ही शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं. राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की जीत के बाद हरियाणा में भी कांग्रेसी यह सपना पाले हुए हैं कि 2019 में उनकी सरकार आएगी. लेकिन लोकसभा चुनाव से पहले जींद उप चुनाव में बुरी तरह हुई हार ने यह साबित कर दिया है कि कांग्रेस का संगठन ऐसे ही चला तो भविष्य में और बड़ा नुकसान हो सकता है. (ये भी पढ़ें: Jind By-Election Result: जनता ने राजकुमार सैनी की पार्टी को नकारा!)

bhupinder singh hooda         हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा (file photo)

कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद राहुल गांधी ने कई प्रदेशों में कांग्रेस को चुस्त-दुरुस्त करने का काम किया. फ्रंटल संगठनों में भी फेरबदल किया. लेकिन हरियाणा में कोई बदलाव नहीं किया. हालात ये हैं कि हुड्डा और तंवर गुट की जंग में उलझी पार्टी में 2014 के बाद से जिला अध्यक्षों की नियुक्ति तक नहीं हुई है. प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर ने कमेटियां भंग कर दी थीं. पिछले चार साल से पार्टी में ब्लॉक स्तर पर भी कोई अध्यक्ष नहीं है.



सूत्रों का कहना है कि एक-दो बार जिलाध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर कवायद शुरू हुई लेकिन वह पूरी नहीं हुई. पिछले चार साल में जितने भी स्थानीय निकाय चुनाव हुए हैं उनमें किसी में भी पार्टी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई. यहां तक कि मुस्लिम बहुल जिला मेवात में भी बीजेपी ने कांग्रेस को बैकफुट पर कर रखा है.

हरियाणा के वरिष्ठ पत्रकार नवीन धमीजा का कहना है कि इस वक्त कांग्रेस अपनी गुटबाजी की वजह से बैकफुट पर नजर आ रही है. जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिल रहा है. हाल ही में हुए पांच नगर निगमों के चुनाव में भी पार्टी ने सिंबल पर उम्मीदवार नहीं उतारे. अशोक तंवर चाह रहे थे कि सिंबल पर चुनाव लड़ा जाए लेकिन भूपेंद्र सिंह हुड्डा इसके विरोध में थे. पार्टी समर्थकों को समझ नहीं आया कि किसे वोट किया जाए. नतीजतन बीजेपी ने पांचों निगमों पर कब्जा कर लिया. अब जींद में भी कांग्रेस की गुटबाजी और चुनाव लड़ने के दावेदारों से उपजे असंतोष ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया है. (ये भी पढ़ें: क्यों 26 साल पहले बर्खास्त की गई थीं बीजेपी की चार राज्य सरकारें?)

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इसके बावजूद कांग्रेसी नेता मान रहे हैं कि हरियाणा में बीजेपी सरकार के खिलाफ लहर है. ऐसे में आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में वह अच्छा प्रदर्शन करेगी. कांग्रेस में भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कुमारी शैलजा, रणदीप सुरजेवाला, अशोक तंवर, किरण चौधरी, दीपेंद्र हुड्डा व कुलदीप विश्नोई जैसे चेहरे हैं लेकिन ये सब संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की जगह अपने-अपने गुट को मजबूत बनाने में जुटे हुए हैं. हरियाणा कांग्रेस का गढ़ रहा है. बीजेपी ने पहली बार यहां पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई है.

हालांकि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर का कहना है कि सभी जिलों में पार्टी के विभिन्न सेल काम कर रहे हैं. राज्य कार्यकारिणी काम कर रही है.  हम बीजेपी से बहुत मजबूत स्थिति में हैं.

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