जितिन प्रसाद के BJP में शामिल होने पर बोले पूर्व कांग्रेसी नेता-इसके लिए भाजपा को दोष नहीं दे सकते, यही राजनीति है

भाजपा में शामिल होने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलते जितिन प्रसाद.

भाजपा में शामिल होने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलते जितिन प्रसाद.

Jitin Prasad Join BJP: जितिन प्रसाद के पिछले लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भी भाजपा में जाने की अटकलें थीं. कहा जाता है कि तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के मनाने पर प्रसाद ने उस वक्त भाजपा में जाने का फैसला त्याग दिया था.

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नई दिल्ली. पूर्व केंद्रीय मंत्री और युवा नेता जितिन प्रसाद ने बुधवार को भाजपा का दामन थाम लिया. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और भाजपा सांसद अनिल बलूनी की मौजूदगी में प्रसाद ने नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान भाजपा की सदस्यता ग्रहण की. प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह और जेपी नड्डा को धन्यवाद देते हुए प्रसाद ने कहा कि उन्होंने बहुत विचार-मंथन के बाद यह फैसला लिया है. उन्होंने कहा, 'आज से मेरे राजनीतिक जीवन का एक नया अध्याय शुरू हो रहा है.'


जितिन प्रसाद के भाजपा में शामिल होने पर विभिन्न दलों के नेताओं ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है. असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने जहां इशारों में कांग्रेस को डूबता 'टाइटैनिक' बताया, तो वहीं कांग्रेस नेता और पार्टी के प्रवक्ता रहे संजय झा ने इसे भाजपा के लिए फायदेमंद, जबकि कांग्रेस के लिए बड़ी हानि बताया है.


असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने लिखा, 'बर्बाद और बिना पतवार के 'टाइटैनिक' का डूबना जारी है. भाजपा परिवार में जितिन प्रसाद का स्वागत है.'


कांग्रेस नेता रहे संजय झा ने ट्वीट किया, 'जितिन प्रसाद भाजपा के लिए फायदा और कांग्रेस का नुकसान. मैंने अभी हाल ही में उनसे बात की थी; जितिन एक सज्जन, मिलनसार और उदार हृदय वाले इंसान हैं. आप कांग्रेस से असंतुष्ट नेताओं को चुनने के लिए भाजपा को दोष नहीं दे सकते. अगर मैं अमित शाह होता, तो मैं भी यही करता. यही राजनीति है.'


उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, 'कांग्रेस छोड़कर भाजपा के वृहद परिवार में शामिल होने पर जितिन प्रसाद जी का स्वागत है. जितिन प्रसाद जी के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने से उत्तर प्रदेश में पार्टी को अवश्य मजबूती मिलेगी.'


जितिन प्रसाद ने बताई भाजपा में शामिल होने की वजह

भगवा दल में शामिल होने की वजह बताते हुए जितिन प्रसाद कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने अनुभव किया कि अगर देश में असली मायने में कोई राजनीतिक दल है तो वह भाजपा ही है. उन्होंने कहा, ‘बाकी दल तो व्यक्ति विशेष और क्षेत्र विशेष के होकर रह गए हैं. आज देश हित के लिए कोई दल और नेता सबसे उपयुक्त है और वह मजबूती के साथ खड़ा है तो वह भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं.’ प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी नि:स्वार्थ भाव से भारत की सेवा कर रहे हैं और सभी चुनौतियों का डट कर मुकाबला कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘वह जिस नए भारत का निर्माण कर रहे हैं उसमें मुझे भी छोटा सा योगदान आगे आने वाली पीढ़ियों के लिए करने को मिलेगा. यह विचार करके मैं आज इस निर्णय (भाजपा में शामिल होने के) पर पहुंचा हूं.’





प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस में रह कर वह जनता के हितों की रक्षा नहीं कर पा रहे थे इसलिए वहां बने रहने का कोई औचित्य नहीं था. उन्होंने कहा, ‘अब भाजपा वह माध्यम बनेगी. एक सशक्त संगठन और मजबूत नेतृत्व है यहां, जिसकी आज देश को जरूरत है. मैं इस वक्त ज्यादा बोलना नहीं चाहता, मेरा काम बोलेगा. अब मैं एक समर्पित कार्यकर्ता के रूप में काम करूंगा. जो उद्देश्य ‘सबका साथ, सबका विकास’ और ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ का है उसको लेकर भाजपा के एक कार्यकर्ता के रूप में काम करूंगा.’


2004 में पहली बार लोकसभा चुनाव में हासिल की जीत

जितिन प्रसाद ने 2004 में शाहजहांपुर से पहली बार लोकसभा का चुनाव जीता था और उन्हें प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार में इस्पात राज्यमंत्री बनाया गया था. इसके बाद उन्होंने 2009 में धौरहरा सीट से जीत दर्ज की. इसके बाद उन्होंने संप्रग सरकार में पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस, सड़क परिवहन और राजमार्ग और मानव, संसाधन विकास राज्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाली.


2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में मिली हार

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के बड़े ब्राह्मण चेहरे के रूप में अपनी पहचान स्थापित करने वाले जितिन प्रसाद को 2014 के लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में तिलहर सीट से हाथ आजमाया, लेकिन इसमें भी उन्हें निराशा ही मिली. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भी धौरहरा से वह हार गये थे. उन्हें कुछ महीने पहले पश्चिम बंगाल के लिए कांग्रेस प्रभारी बनाया गया था. वहां राज्य विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और वाम दलों के गठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा. कांग्रेस एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हुई.


जितिन प्रसाद के पिछले लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भी भाजपा में जाने की अटकलें थीं. कहा जाता है कि तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के मनाने पर प्रसाद ने उस वक्त भाजपा में जाने का फैसला त्याग दिया था. ज्ञात हो कि जितिन प्रसाद उन 23 नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने पिछले साल कांग्रेस में सक्रिय नेतृत्व और संगठनात्मक चुनाव की मांग को लेकर पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखी थी. पत्र से जुड़े विवाद को लेकर उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले की कांग्रेस कमेटी ने प्रस्ताव पारित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी, जिसे लेकर विवाद भी हुआ था. हालांकि बाद में प्रसाद ने कहा था कि उन्हें कांग्रेस के मौजूदा नेतृत्व में पूरा विश्वास है. जितिन प्रसाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे जितेंद्र प्रसाद के पुत्र हैं जिन्होंने पार्टी में कई अहम पदों पर अपनी सेवाएं दी थीं. उन्होंने सोनिया गांधी के खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव भी लड़ा था.


(इनपुट भाषा से भी)

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