गुजरात में कांग्रेस को मजबूत होता देख ‘स्पेशल 26’ प्लान पर काम कर रही है BJP

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Updated: March 13, 2019, 12:48 PM IST
गुजरात में कांग्रेस को मजबूत होता देख ‘स्पेशल 26’ प्लान पर काम कर रही है BJP
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह

पार्टी की योजना 2014 की तरह सभी सीटों को जीतने की है. लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी की कमजोर स्थिति उसे 2019 के चुनाव में भी नुकसान पहुंचा सकती है.

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(विजयसिंह परमार)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का गृह राज्य गुजरात, 2017 के विधानसभा चुनावों के बाद से राज्य में नए राजनीतिक परिदृश्य का गवाह बन रहा है. गुजरात में बीजेपी अब भी शहरों में मजबूत बनी हुई है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस की पकड़ मजबूत हुई है, जो आगामी लोकसभा चुनाव में पार्टी के उत्साह को बढ़ा रहा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मस्थान वडनगर जो कि ऊंझा विधानसभा सीट के अंतर्गत आता है, विधानसभा चुनाव में यहां से कांग्रेस प्रत्याशी की जीत हुई थी. बीजेपी ने कांग्रेस के हाथों मनसा विधानसभा सीट भी गंवा दी जो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का गृहनगर है.

2014 के आम चुनावों में मोदी लहर के चलते बीजेपी ने गुजरात की सभी 26 सीटों पर जीत दर्ज की थी, लेकिन पिछले पांच सालों में स्थिति बदल चुकी हैं. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार बीजेपी ने शहरी क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत की है, लेकिन भगवा पार्टी की स्थिति राज्य के ग्रामीण हिस्सों में 'कमजोर' बनी हुई है.

मोदी के नेतृत्व वाली पार्टी इन रुझानों को बदलने के लिए हर प्रयास कर रही है. हाल ही में घटे राजनीतिक घटनाक्रमों से यह और भी स्पष्ट होता है. पिछले एक महीने में कांग्रेस के चार विधायक, विशेषकर सौराष्ट्र के ग्रामीण क्षेत्रों से, बीजेपी में शामिल हो गए.

3 फरवरी के बाद से कांग्रेस के चार विधायक जवाहर चावडा (माणवदर), परषोत्तम सपारिया (धरंगधरा), वल्लभ धाराविया (जामनगर ग्रामीण) और अशाबेन पटेल (ऊंझा) पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो चुके हैं.

गुजरात में बीजेपी ‘मिशन 26’ प्लान पर काम कर रही है. पार्टी की योजना 2014 की तरह सभी सीटों को जीतने की है. लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी की कमजोर स्थिति उसे 2019 के चुनाव में भी नुकसान पहुंचा सकती है.
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शुरुआत माणवदर से कांग्रेस विधायक जवाहर चावडा के साथ करते हैं. जवाहर चावडा अहीर नेता हैं, कांग्रेस छोड़ने के कुछ ही घंटों में वे विजय रुपाणी सरकार में मंत्री बन गए. चावडा माणवदर विधानसभा सीट से चौथी बार विधायक बने थे. प्रशासनिक रूप से माणवदर, जूनागढ़ जिले के अंतर्गत आता है, जबकि चुनावी तौर पर यह पोरबंदर सीट के अंतर्गत आता है.

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2017 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी जूनागढ़ लोकसभा के तहत आने वाली सभी सात विधानसभा सीटों पर हार गई. पोरबंदर लोकसभा सीट की सात विधानसभा सीटों में से, बीजेपी ने चार सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस ने दो और एनसीपी ने एक सीट पर जीत दर्ज की.

जूनागढ़ और पोरबंदर लोकसभा सीटों के ग्रामीण क्षेत्रों में इस परिदृश्य को देखते हुए, कांग्रेस विधायक और ओबीसी नेता जवाहर चावडा का बीजेपी में आना महत्वपूर्ण है.

अगर अमरेली लोकसभा सीट की बात की जाए तो 2017 के विधानसभा चुनाव में इसके तहत आने वाली सात सीटों में से बीजेपी ने मात्र दो सीटें जीती जबकि अन्य सभी सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशियों की जीत हुई. इसके अलावा, महुआ से बीजेपी के तीन बार के पूर्व विधायक अहीर नेता कनुभाई कलसरिया हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए हैं.

बीजेपी ने दिग्गज कांग्रेसी नेता और जसदान से विधायक कुंवरजी बावलिया को पिछले साल जुलाई में पार्टी में शामिल किया था. उन्होंने बीजेपी के टिकट पर जसदान उप-चुनाव जीता और अब वे रूपानी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं. जसदान सीट राजकोट लोकसभा क्षेत्र के तहत आती है.

2017 के विधानसभा चुनाव में राजकोट के तहत आने वाली सात सीटों में से कांग्रेस ने तीन सीटों (सभी ग्रामीण) पर विजय प्राप्त की जबकि बीजेपी ने शहरी क्षेत्रों में आने वाली चार सीटों पर जीत दर्ज की.

कुंवरजी बावलिया सौराष्ट्र क्षेत्र में संख्यात्मक रूप से शक्तिशाली कोली (ओबीसी) समुदाय से आते है. बीजेपी में उनकी एंट्री से पार्टी को 2019 के लोकसभा चुनावों में मजबूती मिलेगी. सौराष्ट्र क्षेत्र की सात लोकसभा सीटों में से तीन लोकसभा सीटों का प्रतिनिधित्व कोली समुदाय से आने वाले नेता करते हैं.

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सोमवार को बीजेपी में शामिल होने वाले कांग्रेस नेता परषोत्तम सपारिया भी कोली समुदाय से ही आते हैं. वह धरंगधरा सीट से विधायक हैं जो सुरेंद्रनगर लोकसभा सीट के अंतर्गत आती है. बीजेपी में उनकी एंट्री इस बात को लेकर महत्वपूर्ण है कि सुरेंद्रनगर लोकसभा सीट के तहत आने वाली सात विधानसभा सीटों में से कांग्रेस ने छह सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि बीजेपी ने केवल एक सीट जीती थी, वह भी शहरी क्षेत्र में.

फरवरी के पहले सप्ताह में मेहसाणा जिले के ऊंझा से कांग्रेस विधायक आशा पटेल ने भी इस्तीफा दे दिया और वे बीजेपी में शामिल हो गई. उनके निर्वाचन क्षेत्र ऊंझा के अंतर्गत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृहनगर वडनगर भी आता है. अमित शाह के मनसा विधानसभा क्षेत्र में भी कांग्रेस की जीत हुई थी.

ये दोनों सीटें मेहसाणा जिले में आती हैं, जिसे बीजेपी का गढ़ समझा जाता है. लेकिन 2017 में यहां की 7 में से तीन सीटों पर कांग्रेस की विजय हुई. यह सीट फिर एक बार महत्वपूर्ण हो चली है क्योंकि कभी यहां हार्दिक पटेल के आंदोलन की हलचल रही थी.

2012 के बाद से करीब 34 कांग्रेसी नेता, जिनमें अधिकतर विधायक और सांसद है, अपनी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो चुके हैं, इनमें से अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी को ग्रामीण क्षेत्रों में खुद को मजबूत करना मुश्किल लग रहा है और कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने का एकमात्र तरीका है उसके नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल करना.

बीजेपी के एक सूत्र ने कहा, "उत्तर प्रदेश में एसपी-बीएसपी ने हाथ मिलाया है और कांग्रेस ने छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में सरकार बनाई है, बीजेपी अपने पारंपरिक गढ़ गुजरात में कोई चांस नहीं देना चाहती. इसने सभी 26 लोकसभा सीटों को बनाए रखने की योजना तैयार कर ली है, इसलिए पार्टी ने कांग्रेस को पटखनी देने के लिए अपने मंझे हुए रणनीतिककारों को लगाया है.”

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First published: March 13, 2019, 11:46 AM IST
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