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jk administration sacked 9 government employees allegations of corruption were proved

जम्मू कश्मीर प्रशासन ने 9 सरकारी कर्मचारियों को किया बर्खास्त, भ्रष्टाचार के आरोप हुए थे सिद्ध

जम्‍मू कश्‍मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा.  (फाइल फोटो)

जम्‍मू कश्‍मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा. (फाइल फोटो)

जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) प्रशासन ने भ्रष्टाचार के आरोप में पांच अधिकारियों समेत नौ सरकारी कर्मचारियों को शुक्रवार को बर्खास्त कर दिया.

जम्मू .  जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) प्रशासन ने भ्रष्टाचार के आरोप में पांच अधिकारियों समेत नौ सरकारी कर्मचारियों को शुक्रवार को बर्खास्त कर दिया. एक अधिकारी ने बताया कि सभी कर्मचारियों को जम्मू कश्मीर सिविल सेवा नियमन के 226 (2) अनुच्छेद के तहत बर्खास्त कर दिया गया है, जो प्रशासन को 22 साल की सेवा पूरी करने या 48 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद किसी भी समय सरकारी कर्मचारियों को सेवानिवृत्त करने की अनुमति देता है. ये सभी कर्मचारी आवास एवं शहरी विकास विभाग के हैं.

उन्होंने कहा कि बर्खास्त किये गये अधिकारियों के खिलाफ विभागीय समितियों द्वारा आरोपों की पुष्टि की गई है. उन्होंने कहा, ‘अनुच्छेद 226 (2) के तहत नामित समीक्षा समिति द्वारा उन आरोपों की पुष्टि की गई जिनमें धन का दुरुपयोग, अभिलेखों का मिथ्याकरण, फर्जी बिल बनाना, अवैध निर्माण की अनुमति देना और अवैध नियुक्तियां करना शामिल है.’ अधिकारी के अनुसार ज्यादातर अधिकारियों को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा जांच का सामना करना पड़ा है और सरकार ने उन्हें निलंबित भी कर दिया है.

पांच अधिकारी समेत 9 सरकारी कर्मचारी दोषी पाए गए

उन्होंने बताया कि बर्खास्त किए गए लोगों में श्रीनगर नगर निगम (एसएमसी) के वरिष्ठ अधिकारी मेहराज-उद्दीन-बुजा, नगर परिषद अनंतनाग के कार्यकारी अधिकारी गुलाम मोहिउद्दीन मलिक, नगर समिति शोपियां के सहायक स्वच्छता अधिकारी शब्बीर अहमद वानी, एमसी डोडा के स्वच्छता पर्यवेक्षक जाकिर अली, एमसी बनिहाल के प्रधान सहायक अब्दुल लतीफ, एमसी डोडा के वरिष्ठ सहायक सुकेश कुमार, शहरी स्थानीय निकाय कश्मीर के प्रभारी सचिव गौहर अली तुगू, शहरी स्थानीय निकाय कश्मीर के सचिव शगुफ्ता फाजिल और एमसी रियासी के बिजली मिस्त्री (इलेक्ट्रीशियन) ठाकुर दास शामिल हैं.

 भ्रष्टाचार, अवैध नियुक्तियों और गबन के मामलों में शामिल रहे

अधिकारी ने बताया कि इनमें से ज्यादातर भ्रष्टाचार, अवैध नियुक्तियों और गबन के मामलों में शामिल रहे हैं. उन्होंने कहा कि अनुच्छेद अनिवार्य रूप से सरकारी सेवाओं से अनावश्यक कर्मियों की छंटनी के लिए लागू किया गया है, जिसके तहत कर्मचारियों को तीन महीने का नोटिस या नोटिस के एवज में तीन महीने का वेतन और भत्ता दिए जाने के बाद सेवानिवृत्त किया जा सकता है.

Tags: Corruption, Government Employees, Jammu kashmir

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