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कश्मीर में धमकी भरे पोस्टर्स से लोगों में डर का माहौल, नहीं खोल रहे दुकानें

भाषा
Updated: November 21, 2019, 6:09 PM IST
कश्मीर में धमकी भरे पोस्टर्स से लोगों में डर का माहौल, नहीं खोल रहे दुकानें
जम्मू कश्मीर में लगे धमकी भरे पोस्टर्स के चलते लोग दुकानें नहीं खोल रहे हैं.

अधिकारियों की मानें तो पिछले कुछ हफ्ते से दुकानदार सुबह के वक्त अपनी दुकानें खोल रहे थे लेकिन चेतावनी के बाद उन्होंने सुबह दुकानें नहीं खोलीं.

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श्रीनगर. कश्मीर (Kashmir) के कुछ इलाकों में पोस्टर लगाकर दुकानदारों को दी गई चेतावनी बाद घाटी के अधिकतर हिस्सों में लगातार दूसरे दिन गुरुवार को भी दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे. सार्वजनिक परिवहन के वाहन भी सड़कों से नदारद दिखे. अधिकारियों ने कहा कि मध्य कश्मीर में श्रीनगर (Srinagar) एवं गंदेरबल (Ganderbal) जिलों, दक्षिण कश्मीर (South Kashmir) में अनंतनाग (Anantnag), कुलगाम (Kulgam), पुलवामा (Pulwama) और शोपियां (Shopian) जिलों तथा उत्तर में कुछ जिलों में बंद का आह्वान किया गया.

अधिकारियों की मानें तो पिछले कुछ हफ्ते से दुकानदार सुबह के वक्त अपनी दुकानें खोल रहे थे लेकिन चेतावनी के बाद उन्होंने सुबह दुकानें नहीं खोलीं. उन्होंने बताया कि घाटी में शहर और अन्य जगहों पर सार्वजनिक परिवहन के वाहन सड़कों से दूर रहे. हालांकि कुछ ऑटोरिक्शा और अंतर जिला कैब को सड़कों पर चलते देखा गया.

केंद्र ने कहा- कश्मीर में पूर्ण बंद के आरोप लगाने वाली याचिकाएं गलत
केंद्र ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद वहां लगाए गए प्रतिबंधों में ढील दी जा रही है और वहां पूर्ण बंद के आरोप लगाने वाली याचिकाएं गलत तथा अप्रासंगिक हैं.

केंद्र तथा केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की ओर से पेश सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति एनवी रमन की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष अपनी दलीलें रखना शुरू किया और जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद क्षेत्र में लागू कुछ पाबंदियों को सही ठहराया.

पांच अगस्त से बंद हैं प्रीपेड मोबाइल और इंटरनेट
पांच अगस्त को केंद्र द्वारा संविधान के अनुच्छेद 370 (Article 370) के अधिकतर प्रावधानों को निरस्त किये जाने और जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) को दो केंद्रशासित क्षेत्रों में विभाजित करने के फैसले के बाद से प्रीपेड मोबाइल फोन और सभी इंटरनेट सेवाएं बंद हैं.
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शीर्ष स्तर एवं दूसरी पंक्ति के अलगाववादी नेताओं को एहतियातन हिरासत में रखा गया है जबकि दो पूर्व मुख्यमंत्रियों उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) एवं महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) समेत मुख्यधारा के नेताओं को या तो हिरासत में रखा गया है या नजरबंद किया गया है.

सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री एवं श्रीनगर से मौजूदा लोकसभा सांसद फारुक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) को विवादित लोक सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में रखा है. इस कानून को 1978 में अब्दुल्ला के पिता एवं नेशनल कांफ्रेंस के संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला ने मुख्यमंत्री रहते हुए लागू किया था.

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First published: November 21, 2019, 6:09 PM IST
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