मलयालम के मशहूर कवि अक्कीतम को ज्ञानपीठ पुरस्कार दिया गया

राज्य के संस्कृति मंत्री ए के बालन ने अक्कीतम को यह पुरस्कार दिया (Photo- Twitter/
V Muraleedharan)
राज्य के संस्कृति मंत्री ए के बालन ने अक्कीतम को यह पुरस्कार दिया (Photo- Twitter/ V Muraleedharan)

Jnanpith Award: ज्ञानपीठ पुरस्कार भारतीय ज्ञानपीठ न्यास द्वारा भारतीय साहित्य के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार है. ज्ञानपीठ पुरस्कार की घोषणा पिछले साल नवंबर में की गई थी लेकिन कोविड-19 लॉकडाउन (Covid-19 Lockdown) के चलते पुरस्कार सौंपने के कार्यक्रम में देरी हुई.

  • भाषा
  • Last Updated: September 25, 2020, 12:13 AM IST
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पलक्कड़. मलयालम (Malyalam) के मशहूर कवि अक्कीतम अच्युतन नंबूदिरी (Akkitham Achuthan Namboothiri) को गुरुवार को उनके कुमारानाल्लूर (Kumalanalloor) स्थित आवास पर आयोजित किए गए एक विशेष कार्यक्रम में ज्ञानपीठ पुरस्कार (Jnanpith Award) से सम्मानित किया गया. यह देश का साहित्य का सर्वोच्च पुरस्कार है. राज्य के संस्कृति मंत्री ए के बालन ने अक्कीतम को यह पुरस्कार दिया.

मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन (CM Pinarayi Vijayan) ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से कार्यक्रम का उद्घाटन किया. विजयन ने कहा कि अक्कीतम का लेखन केरलवासियों के लिए मलयालम भाषा (Malayalam Language) की कहावत बन गया है. मलयालम साहित्य के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाले अक्कीतम छठे लेखक हैं. ज्ञानपीठ पुरस्कार की घोषणा पिछले साल नवंबर में की गई थी लेकिन कोविड-19 लॉकडाउन (Covid-19 Lockdown) के चलते पुरस्कार सौंपने के कार्यक्रम में देरी हुई.

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साहित्य का सर्वोच्च पुरस्कार है ज्ञानपीठ
ज्ञानपीठ पुरस्कार भारतीय ज्ञानपीठ न्यास द्वारा भारतीय साहित्य के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार है. भारत का कोई भी नागरिक जो आठवीं अनुसूची में बताई गई 22 भाषाओं में से किसी भाषा में लिखता हो इस पुरस्कार के योग्य है. पुरस्कार में ग्यारह लाख रुपये की धनराशि, प्रशस्तिपत्र और वाग्देवी की कांस्य प्रतिमा दी जाती है.

साल 1926 में जन्मे अक्कीतम ने कविताओं के अलावा नाटक, संस्मरण, अनुवार, आलोचनात्मक निबंध और बाल साहित्य समेत साहित्य की तमाम विधाओं में बेहतरीन काम किया है. उनकी रचनाए भारत के साथ-साथ विदेशों में भी पढ़ी जाती हैं.



साहित्य के क्षेत्र में इतना काम कर चुके हैं अक्कीतम
अक्कीतम को ये सम्मान देने का फैसला लेने वाले ज्ञानपीठ चयन बोर्ड की अध्यक्ष ज्ञानपीठ विजेता प्रतिभा राय ने कहा कि तेजी से बदल रहे सामाजिक परिवेश में उनकी रचनाएं मानवीय भावनाओं को बड़ी ही गहराई से उकेरती हैं. अक्कीतम अब तक 55 किताबें लिख चुके हैं. इनमें से 45 कविता संग्रह हैं. अक्कीतम पद्मश्री से भी सम्मानित किए जा चुके हैं. अक्कीतम को 1973 में साहित्य अकादमी पुरस्कार, 1972 और 1988 में केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार के अलावा मातृभूमि पुरस्कार और कबीर सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है.
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