JNU ने इतिहासकार रोमिला थापर से मांगा बायोडाटा, कहा- जांचेंगे एमेरिटस प्रोफेसर रहने लायक या नहीं

जवाहरलाल नेहरू शिक्षक संघ (JNUTA) ने विश्वविद्यालय प्रशासन (University Administration) की ओर से इतिहासकार रोमिला थापर (Historian Romila Thapar) से प्रोफेसर एमेरिटस (Professor Emeriti Status) पद पर बने रहने के लिए बायोडाटा (Biodata) मांगा गया है.

भाषा
Updated: September 2, 2019, 5:47 AM IST
JNU ने इतिहासकार रोमिला थापर से मांगा बायोडाटा, कहा- जांचेंगे एमेरिटस प्रोफेसर रहने लायक या नहीं
इतिहासकार रोमिला थापर से जेएनयू प्रशासन ने बायोडाटा मांगा है (फाइल फोटो)
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Updated: September 2, 2019, 5:47 AM IST
जवाहरलाल नेहरू शिक्षक संघ (JNUTA) ने विश्वविद्यालय प्रशासन (University Administration) की ओर से इतिहासकार रोमिला थापर (Historian Romila Thapar) से प्रोफेसर एमेरिटस (Professor Emeriti Status) पद पर बने रहने के लिए बायोडाटा (Biodata) मांगने के फैसले को ‘राजनीतिक रूप से प्रेरित’ बताया है. JNUTA के बयान के बाद विश्वविद्यालय ने कहा कि वह जेएनयू में प्रोफेसर एमेरिटस के पद पर नियुक्ति के लिए अपने अध्यादेश का पालन कर रहा है.

अध्यादेश के मुताबिक, विश्वविद्यालय (University) के लिए यह जरूरी है वह उन सभी को पत्र लिखे जो 75 साल की उम्र पार कर चुके हैं ताकि उनकी उपलब्धता और विश्वविद्यालय के साथ उनके संबंध को जारी रखने की उनकी इच्छा का पता चल सके. यह पत्र सिर्फ उन प्रोफेसर एमेरिटस को लिखे गए हैं जो इस श्रेणी में आते हैं.

जानबूझकर प्रशासन कर रहा बेइज्जत करने का प्रयास: JNUTA
विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि उसने यह पत्र उनकी सेवा को खत्म करने के लिए नहीं बल्कि विश्वविद्यालय की सर्वोच्च वैधानिक निकाय कार्यकारिणी परिषद द्वारा समीक्षा करने की जानकारी देने के लिए लिखा है और ऐसा अन्य प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयें जैसे एमआईटी (MIT) और प्रिसंटन विश्वविद्यालय (Princeton University) में भी होता है. थापर ने संपर्क करने पर पुष्टि की कि उन्हें जुलाई में पत्र मिला था और उन्होंने इसका जवाब दिया है ‘ यह जीवन भर का सम्मान है.’’ उन्होंने और जानकारी नहीं दी.

बहरहाल, JNUTA ने कहा कि यह एक ‘‘जानबूझकर किया गया प्रयास है और उन लोगों को बेइज्जत करना है जो वर्तमान प्रशासन के आलोचक हैं.’’ उसने इस कदम की औपचारिक वापसी और थापर के लिए व्यक्तिगत माफी जारी करने की मांग की.

जीवन भर पद पर बने रहने के लिए किया गया था नामित
एसोसिएशन ने प्रशासन द्वारा थापर को अपने ‘ओछे पत्र’ के माध्यम से जेएनयू के शिक्षण और सीखने की परंपराओं को ‘बदनाम’ करने के प्रयासों पर नाराजगी व्यक्त की. जेएनयूए ने कहा कि प्रोफेसर थापर का अपमान राजनीतिक रूप से प्रेरित एक और कदम है.
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शिक्षक संघ ने कहा कि थापर और जेएनयू के प्रत्येक अन्य प्रोफेसर एमेरिटस / एमिरिटा, को एक संस्थान के तौर पर जेएनयू के निर्माण (Making of JNU) में उनके योगदान के लिए उन्हें इस पद पर जीवन भर के लिए नामित किया गया है. विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने जुलाई में थापर को पत्र लिखकर बायोडाटा देने को कहा था ताकि वे इस बात का मूल्यांकन कर सकें कि थापर को प्रोफेसर एमेरिटस के तौर पर जारी रखना चाहिए या नहीं.

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First published: September 2, 2019, 5:45 AM IST
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