JNU हिंसा: दिल्ली पुलिस ने गूगल से मांगी छात्रों की चैट डिटेल्स, कंपनी ने कहा- पहले कोर्ट ऑर्डर लाएं

बीते साल 5 जनवरी को मास्क पहने करीब 100 लोगों ने लाठी, डंडों के जरिए विश्वविद्यालय में तोड़फोड़ कर दी थी. (फाइल फोटो: News18)

JNU Violence: बीते साल 5 जनवरी को मास्क पहने करीब 100 लोगों ने लाठी, डंडों के जरिए विश्वविद्यालय में तोड़फोड़ कर दी थी. करीब चार घंटे तक चली इस हिंसा में 36 छात्र, शिक्षक और स्टाफ के सदस्य घायल हो गए थे.

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    नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में हुई हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने गूगल (Google) से जानकारी साझा करने की मांग की थी. इसपर गूगल ने प्रतिक्रिया दी है. कंपनी ने पुलिस से कोर्ट की तरफ से लैटर रोगेट्री यानि अनुरोध पत्र लाने के लिए कहा है. पुलिस ने इस मामले को लेकर व्हाट्सऐप (Whatsapp) से भी डिटेल्स देने के लिए पत्र लिखा था. हालांकि, मैसेजिंग कंपनी ने ऐसा करने से इनकार कर दिया था. बीते साल हुई इस हिंसा में करीब 36 लोग घायल हो गए थे.

    द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, गूगल ने पुलिस से अदालत की तरफ से म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी (MLAT) के तहत अनुरोध पत्र लाने के लिए कहा है. पुलिस ने व्हाट्सऐप और गूगल को पत्र लिखकर दो व्हाट्सऐप ग्रुप्स- 'यूनिटी अगेंस्ट लेफ्ट' और 'फ्रैंड्स ऑफ आरएसएस' के 33 सदस्य और छात्रों की तरफ शेयर किए गए मैसेज, फोटोज और वीडियोज की जानकारी मांगी थी.

    दरअसल, लैटर रॉगेट्री एक औपचारिक अनुरोध पत्र होता है, जो किसी अन्य देश में न्यायिक सहायता के लिए वहां कि कोर्ट को भेजा जाता है. वहीं, MLAT दो या इससे ज्यादा देशों के बीच एक समझौता है, जिसके तहत कानून लागू करने के लिए जानकारी इकट्ठा या साझा की जाती है. पुलिस ने गूगल के सथ दो व्हाट्सऐप ग्रुप्स के 33 सद्स्य और छात्रों के ई-मेल आईडी शेयर किए थे.

    पुलिस की इस मांग को व्हाट्सऐप खारिज कर चुका है. वहीं, गूगल ने कहा है कि मांगी गई जानकारी गूगल एलएलसी की सेवाओं के तहत आती है. यह कंपनी अमेरिका में अमेरिकी कानून के आधीन काम करती है. उन्होंने कहा है कि वे डेटा को सुरक्षित रखेंगे, लेकिन MLAT के तहत पत्र प्राप्त करने के बाद ही इसे साझा किया जाएगा.

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    रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि जांचकर्ताओं को छात्रों से पूछताछ के दौरान उनके फोन में कोई व्हाट्सऐप ग्रुप नहीं मिला. इससे ऐसा लगा कि संदिग्धों ने सारी चैट्स हटा दी हैं. कहा जा रहा है कि ऐसे में पुलिस का मानना है कि गूगल व्हाट्सऐप मैसेज का बैकअप भेज सकेगा, जो जांच में सहायक होगा. बीते साल 9 जनवरी को दिल्ली पुलिस ने 9 संदिग्धों के नाम जारी किए थे.



    क्या था मामला
    बीते साल 5 जनवरी को मास्क पहने करीब 100 लोगों ने लाठी, डंडों के जरिए विश्वविद्यालय में तोड़फोड़ कर दी थी. करीब चार घंटे तक चली इस हिंसा में 36 छात्र, शिक्षक और स्टाफ के सदस्य घायल हो गए थे. इस मामले में FIR दर्ज की गई थी और ममले को क्राइम ब्रांच को भेजा गया था. अब तक इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है. FIR दर्ज किए जाने के बाद पुलिस की 20 सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम जेएनयू एडमिनिस्ट्रेशन ब्लॉक के अंदर कैंप तैयार किया था.

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