गांवों में अच्छे रोजगार न होने के चलते फिर से शहर लौटने को मजबूर दो-तिहाई प्रवासी: सर्वे

गांवों में अच्छे रोजगार न होने के चलते फिर से शहर लौटने को मजबूर दो-तिहाई प्रवासी: सर्वे
एक बार फिर शहरों की तरफ लौट रहे प्रवासी मजदूर (फाइल तस्वीर)

जबकि शहरों में एक-चौथाई प्रवासी (migrants) काम की तलाश में (in search of work) लौट चुके हैं. और इस बात के प्रमाण भी हैं कि 85% लोग सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के कल्याणकारी दायरे में आ रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 3, 2020, 4:30 PM IST
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नई दिल्ली. लॉकडाउन (Lockdown) के प्रभाव का आकलन करने के लिए 11 राज्यों में ग्रामीण भारत (Rural India) के 4,835 घरों का सर्वेक्षण किया गया. गांवों में कौशल वाले रोजगार के मौजूद न होने से कैसे उल्टे पलायन (Reverse Migration) को बढ़ावा मिल रहा है, इसका आकलन भी किया गया और पाया गया कि पलायन कर चुके कई लोगों में से लगभग दो-तिहाई (2/3) प्रवासी (Migrants) या तो शहरों (cities) में लौट आए हैं या उन्होंने ऐसा करने की इच्छा व्यक्त की है. आंकड़ों से पता चलता है कि दूसरे शहरों में काम करने वाले प्रवासियों के 1,196 घरों में, 74% लोग महामारी (Pandemic) से उत्पन्न परिस्थितियों के कारण अपने गांव लौट आए थे और इनमें से 29% लोग पहले ही महानगरों (mega cities) में लौट चुके हैं. इसके अलावा गांव (village) में अब भी रह रहे 45% लोग मानते हैं कि वे शहर वापस चले जाएंगे.

जबकि शहरों में एक-चौथाई प्रवासी (migrants) काम की तलाश में लौट चुके हैं. इस दौरान कम भोजन में गुजारा करने वाले लोगों की संख्या में गिरावट के साथ बेहतर खबर सामने आई है और इस बात के प्रमाण भी हैं कि 85% लोग सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के कल्याणकारी दायरे में आ रहे हैं, 71% घरों में रसोई गैस (उज्ज्वला योजना के माध्यम से 85%) है और कई के पास फिर से गैस भरा सकने की सुविधा उपलब्ध है. हालांकि सर्वेक्षण में, केवल पीएम किसान योजना (PM Kisan scheme) के तहत केवल 38% लोगों को फंड ट्रांसफर होने की बात सामने आई है.

"हर 4 में से 1 परिवार को लगता है कि बच्चे को स्कूल से निकालना होगा"
यह सर्वे आगा खान रूरल सपोर्ट प्रोग्राम (भारत), एक्शन फॉर सोशल एडवांसमेंट, ग्रामीण सहारा, आई-सक्षम, प्रदान, SAATHI-UP, SeSTA, सेवा मंदिर और ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन की ओर से किया गया एक सहयोगात्मक अध्ययन है. और इसके लिए विकास अन्वेश फाउंडेशन और सम्बोधी ने रिसर्च के लिए सहयोग प्रदान किया था.
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यह देखते हुए कि कल्याणकारी उपाय लाभार्थियों के एक बड़े हिस्से तक पहुंच गए हैं और अर्थव्यवस्था के अनलॉक होने से कुछ क्षेत्रों में खुशहाली आई है, रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है, "संकट की घटनाएं अब भी अधिक हैं" और ग्रामीण भारत में कोविड-19 का खतरा बढ़ रहा है. यह बताया गया है कि 4 में से 1 परिवार को लगता है कि उसे अपने बच्चे को स्कूल से निकालने की आवश्यकता हो सकती है, लेकिन फिलहाल अनुभव लॉकडाउन की तुलना में बेहतर हैं.
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